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Wayanad Landslide: वायनाड में फिर टूटा पहाड़, टनल निर्माण स्थल पर भयावह भूस्खलन, 5 की मौत; 2024 की त्रासदी की यादें हुईं ताजा

वायनाड लैंडस्लाइड

Photo: ANI

वायनाड (केरल): केरल के पहाड़ी जिले में वायनाड लैंडस्लाइड ने एक बार फिर प्रकृति का भयावह रूप देखा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच मेप्पाडी क्षेत्र में मीनाक्षी पुल के पास हुए भीषण भूस्खलन ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं, लेकिन लगातार बारिश और अस्थिर पहाड़ी इलाके के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

वायनाड लैंडस्लाइड घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में चिंता का माहौल है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिरता है और देखते ही देखते सड़क, निर्माण क्षेत्र तथा आसपास का इलाका मलबे की चपेट में आ जाता है। कुछ ही क्षणों में पूरा क्षेत्र धूल, पत्थरों और मिट्टी के विशाल ढेर में तब्दील हो गया।

टनल निर्माण स्थल बना हादसे का केंद्र

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हादसा सुबह करीब 11 बजे उस समय हुआ जब मेप्पाडी के कल्लाडी क्षेत्र में अनाक्कमपॉयल-कल्लाडी-मेप्पाडी ट्विन टनल परियोजना के तहत निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण के दौरान निकाली गई मिट्टी का बड़ा टीला मीनाक्षी पुल के पास जमा किया गया था। लगातार हो रही तेज बारिश के कारण यह टीला कमजोर पड़ गया और इसके साथ ही आसपास की पहाड़ी का बड़ा हिस्सा भी अचानक दरक गया।

भूस्खलन की चपेट में निर्माण स्थल के नीचे बनाया गया अस्थायी श्रमिक शिविर भी आ गया। यहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रह रहे थे। स्थानीय मजदूरों को लेकर पहुंचीं दो बसें भी मलबे में दब गईं। यही वजह है कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

मलबे में जिंदगी की तलाश, समय के खिलाफ जंग

वायनाड लैंडस्लाइड हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मदद के लिए आगे आए। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। बाद में फायर एंड रेस्क्यू सर्विस, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और अन्य आपदा राहत दल मौके पर पहुंचे और संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया।

लगातार बारिश, फिसलन और पहाड़ी से अब भी पत्थर गिरने का खतरा राहत कार्य में बड़ी बाधा बना हुआ है। बचाव दल आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। प्रशासन ने आसपास के लोगों से प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने की अपील की है।

2024 की भयावह त्रासदी फिर आई याद

वायनाड लैंडस्लाइड की यह घटना केवल एक नया हादसा नहीं, बल्कि पिछले वर्ष हुई उस भीषण त्रासदी की दर्दनाक याद भी लेकर आई है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। वर्ष 2024 में वायनाड के मुंडाक्कई और आसपास के इलाकों में हुए विनाशकारी भूस्खलन में 300 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और हजारों लोग प्रभावित हुए थे।

इस बार भी हादसा उसी संवेदनशील क्षेत्र के करीब हुआ है, जहां कई होमस्टे, छोटे व्यवसाय और स्थानीय आबादी मौजूद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश ने पूरे इलाके की भू-स्थिति को बेहद कमजोर बना दिया है, जिससे पहाड़ियों में दरारें और भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है।

महत्वपूर्ण परियोजना पर भी उठे सवाल

जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां मलप्पुरम और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी ट्विन टनल परियोजना का निर्माण चल रहा है। इस परियोजना के पूरा होने से दोनों जिलों के बीच यात्रा का समय कम होने और पर्यटन के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

हालांकि इस हादसे के बाद निर्माण कार्य की सुरक्षा व्यवस्था, भू-वैज्ञानिक अध्ययन, मिट्टी के निस्तारण और मानसून के दौरान निर्माण कार्यों के प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान मौसम और भूगर्भीय परिस्थितियों का लगातार वैज्ञानिक मूल्यांकन बेहद जरूरी होता है।

देश के कई राज्यों में मौसम का कहर जारी

केवल केरल ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्से इस समय भारी बारिश की मार झेल रहे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश सहित अनेक राज्यों में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर सड़कें धंस गई हैं, नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

बारिश के कारण पहाड़ी राज्यों और पश्चिमी घाट के क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक वर्षा के दौरान ढलानों की स्थिरता कमजोर पड़ जाती है, जिससे अचानक बड़े पैमाने पर मिट्टी और चट्टानों का खिसकना शुरू हो जाता है।

15 राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग ने देश के 15 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ तेज आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

प्रकृति के सामने सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

वायनाड लैंडस्लाइड की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही अत्यधिक बारिश कितनी तेजी से बड़े हादसों का कारण बन सकती है। आधुनिक तकनीक, बेहतर निर्माण मानक और मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था के बावजूद प्रकृति के सामने लापरवाही भारी पड़ सकती है।

फिलहाल पूरे देश की निगाहें वायनाड लैंडस्लाइड में चल रहे राहत एवं बचाव अभियान पर टिकी हैं। हर गुजरते घंटे के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालना है, जबकि स्थानीय लोग भी राहत कार्यों में सक्रिय सहयोग कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि मौसम में सुधार के साथ बचाव अभियान और तेज होगा तथा मलबे में फंसे लोगों तक जल्द पहुंचा जा सकेगा।

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