वक्फ बोर्ड तिरंगा आदेश: देवभूमि उत्तराखंड में इस बार गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि देशभक्ति, एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की एक नई मिसाल बनने जा रहा है। 26 जनवरी 2026 को राज्य की सभी मस्जिदों, मदरसों और वक्फ संपत्तियों पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शान से फहराया जाएगा। इस संबंध में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने अपने अधीन सभी मुतवलियों और प्रबंधन समितियों को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।
यह निर्णय न केवल संवैधानिक मूल्यों के सम्मान का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राष्ट्र प्रथम की भावना सभी धर्मों और समुदायों को एक सूत्र में पिरोती है।
संविधान और गणतंत्र दिवस का महत्व रेखांकित
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व को विस्तार से रेखांकित किया गया है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को पूरे देश में लागू हुआ। इसी के साथ भारत एक संपूर्ण गणतंत्र राष्ट्र बना।
आदेश में यह भी कहा गया है कि संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन का समय लगा और यह दस्तावेज़ आज भी भारत की लोकतांत्रिक आत्मा का आधार है। गणतंत्र दिवस का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उन अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देना है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
मुख्य सचिव के पत्र का हवाला, सख्त अनुपालन के निर्देश
वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा जारी आदेश में राज्य के मुख्य सचिव के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि 26 जनवरी को सभी वक्फ परिसरों में ध्वजारोहण अनिवार्य रूप से किया जाए। इसके साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों, देशभक्ति गीतों और संविधान की प्रस्तावना के पाठ जैसे कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
बोर्ड ने साफ शब्दों में कहा है कि इन निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शादाब शम्स का बयान: “वतन से मोहब्बत ईमान का हिस्सा”
इस ऐतिहासिक फैसले पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीर सैनिकों की भूमि के रूप में भी जाना जाता है।
उन्होंने कहा,
“जब पूरा देश अपने गणतंत्र का उत्सव मना रहा होगा, तब उत्तराखंड की हर मस्जिद, हर मदरसा और हर वक्फ संपत्ति पर तिरंगा पूरी शान से लहराएगा। वतन से मोहब्बत ईमान का एक अहम हिस्सा है, और राष्ट्रीय ध्वज से प्रेम करना हमारा फर्ज है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल उन लोगों के लिए एक सशक्त संदेश है, जो देशभक्ति को धर्म से जोड़कर देखने की संकीर्ण सोच रखते हैं।
सद्भाव और एकता का मजबूत संदेश
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करेगा और युवाओं में राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करेगा। मस्जिदों और मदरसों में तिरंगा फहराना यह दर्शाता है कि भारतीय मुस्लिम समाज संविधान और राष्ट्र के प्रति पूरी निष्ठा रखता है।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस तरह की पहल न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है।
मुतवलियों और प्रबंधन समितियों को स्पष्ट निर्देश
वक्फ बोर्ड ने अपने सभी मुतवलियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी-अपनी मैनेजमेंट कमेटियों के माध्यम से आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें। ध्वजारोहण के दौरान गरिमा और नियमों का पालन करने, राष्ट्रगान के सम्मान और स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।
राष्ट्रीय पर्व, सर्वोपरि सम्मान
बोर्ड की ओर से यह भी कहा गया है कि गणतंत्र दिवस देश का सर्वोच्च राष्ट्रीय पर्व है, जो हमें हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और संविधान के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराता है। इस दिन तिरंगा फहराना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
गणतंत्र दिवस 2026 पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड तिरंगा आदेश की यह पहल निश्चित रूप से इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी। मस्जिदों, मदरसों और वक्फ संपत्तियों पर तिरंगे का फहराना यह साबित करता है कि भारत की आत्मा उसकी विविधता और एकता में निहित है। देवभूमि उत्तराखंड से उठी यह देशभक्ति की लहर पूरे राष्ट्र को एक सकारात्मक संदेश देती है—राष्ट्र सबसे पहले।

