Site icon आज की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़ और लेटेस्ट अपडेट | Bugyal News, हिंदी न्यूज़

विकासनगर में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं से मारपीट मामला: अब दुकानदार की पत्नी ने लगाए छेड़छाड़ के आरोप, जांच के केंद्र में दोनों पक्ष

विकासनगर कश्मीरी शॉल विक्रेता विवाद

देहरादून | विकासनगर कश्मीरी शॉल विक्रेता विवाद: उत्तराखंड के देहरादून जिले के विकासनगर में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं के साथ हुई मारपीट की घटना ने अब नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर कश्मीर के दो युवकों ने स्थानीय दुकानदारों पर धार्मिक और जातिगत टिप्पणियों के साथ जानलेवा हमले का आरोप लगाया था, वहीं अब उसी मामले में एक दुकानदार की पत्नी ने दोनों कश्मीरी युवकों पर छेड़छाड़ और अभद्रता के गंभीर आरोप लगाए हैं।

इस घटनाक्रम के बाद विकासनगर कश्मीरी शॉल विक्रेता विवाद अब केवल मारपीट तक सीमित न रहकर महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था से जुड़े बड़े सवालों के घेरे में आ गया है।


क्या था पूरा मामला?

मामला बीती 28 जनवरी का है, जब जम्मू-कश्मीर के रहने वाले दो युवक विकासनगर बाजार में कंबल, शॉल और सूट बेचने पहुंचे थे। आरोप है कि एक स्थानीय दुकानदार से सामान खरीदने को लेकर कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और फिर मारपीट में बदल गई।

कश्मीरी युवकों का कहना है कि विवाद के दौरान उन्हें पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ते हुए आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। इस हमले में एक युवक के सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।


पीड़ित युवकों का पक्ष

पीड़ित कश्मीरी युवकों ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके पिता पांवटा साहिब में किराए पर रहते हैं और आसपास के क्षेत्रों में फेरी लगाकर आजीविका चलाते हैं। छुट्टियों के चलते दोनों युवक कश्मीर से पांवटा साहिब आए थे और वहीं से विकासनगर बाजार में व्यापार करने पहुंचे थे।

उनका आरोप है कि यह हमला सिर्फ व्यक्तिगत विवाद नहीं था, बल्कि इसमें धार्मिक और क्षेत्रीय पहचान को निशाना बनाया गया, जिससे उनकी जान को खतरा पैदा हो गया।


पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

कश्मीरी युवकों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने एक दुकानदार और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने एक दुकानदार को हिरासत में लिया और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

हालांकि, गिरफ्तारी के बाद मामला शांत होने के बजाय और उलझ गया, जब दुकानदार की पत्नी सामने आईं और उन्होंने पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से पेश किया।


दुकानदार की पत्नी का पलटवार

30 जनवरी को दुकानदार की पत्नी ने विकासनगर कोतवाली में लिखित तहरीर देते हुए दोनों कश्मीरी युवकों पर गंभीर आरोप लगाए। महिला का कहना है कि वह पिछले 25 वर्षों से विकासनगर बाजार में दुकान चला रही हैं और स्थानीय लोगों के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं।

महिला के अनुसार, 28 जनवरी की शाम करीब 3:30 बजे दो युवक उनकी दुकान पर आए और उनके साथ अभद्र इशारे करने लगे। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोप है कि युवकों ने उनका हाथ पकड़ लिया और जबरन अपनी ओर खींचने का प्रयास किया।


झगड़े ने कैसे लिया उग्र रूप?

महिला का दावा है कि उसी दौरान उनके पति दुकान पर पहुंचे और युवकों को रोकने की कोशिश की, लेकिन युवकों ने उन पर हमला कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई, जिसमें आसपास के लोग भी शामिल हो गए।

आरोप यह भी है कि कश्मीरी युवकों ने बाहर से अन्य लोगों को बुला लिया, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई और बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


अब दोहरी जांच की चुनौती

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह विकासनगर कश्मीरी शॉल विक्रेता विवाद में दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच करे। एक ओर मारपीट और धार्मिक टिप्पणी का मामला है, तो दूसरी ओर महिला से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।


राजनीतिक स्तर पर भी हलचल

इस पूरे मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना का संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत की।

उमर अब्दुल्ला ने मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय न हो और दोषियों को कानून के तहत सजा मिले।


आगे क्या?

फिलहाल, विकासनगर में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन यह मामला सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घटना की असल वजह क्या थी और दोषी कौन है।

यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि छोटे विवाद कैसे बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों का रूप ले सकते हैं, यदि समय रहते उन्हें सही तरीके से नहीं संभाला जाए।

Exit mobile version