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उत्तराखंड में साइबर अपराध का विस्फोट: हर दिन 46 लाख की ठगी, NCRB रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

उत्तराखंड में साइबर अपराध

Photo: Bugyal News

देहरादून: पहाड़ों की शांत वादियों और अपेक्षाकृत सुरक्षित राज्यों में गिने जाने वाले उत्तराखंड में साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा वार्षिक रिपोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि राज्य में पारंपरिक अपराधों में कमी आई है, लेकिन साइबर अपराध अब सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में उत्तराखंड में साइबर अपराध के मामलों में करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इनमें लगभग 70 फीसदी मामले वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े पाए गए हैं। ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, निवेश घोटाले, फर्जी कॉल और सोशल मीडिया फ्रॉड जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसने आम लोगों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।

हर दिन करोड़ों की डिजिटल ठगी का जाल

उत्तराखंड पुलिस और साइबर सेल के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य में करीब 90 हजार लोग साइबर ठगी का शिकार हुए। इस दौरान साइबर अपराधियों ने लगभग 468 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केवल वर्ष 2024 में ही करीब 133 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी दर्ज की गई। यानी औसतन हर दिन लगभग 46 लाख रुपये साइबर अपराधियों के खातों में पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई पेमेंट, ऑनलाइन निवेश और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग ने लोगों की जिंदगी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसी तकनीक का फायदा उठाकर साइबर अपराधी नए-नए तरीके विकसित कर रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट: डर और दबाव का खतरनाक खेल

हाल के महीनों में “डिजिटल अरेस्ट” उत्तराखंड समेत पूरे देश में तेजी से फैलता साइबर अपराध बन गया है। उत्तराखंड एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह के अनुसार यह इस समय का सबसे खतरनाक साइबर स्कैम बन चुका है।

इस अपराध में ठग खुद को CBI, पुलिस, ED, कस्टम विभाग या TRAI का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। इसके बाद पीड़ित को किसी फर्जी कानूनी मामले में फंसाने या गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता है। मानसिक दबाव और भय का माहौल बनाकर अपराधी पीड़ित को घंटों वीडियो कॉल पर रखते हैं और बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं।

पिछले तीन वर्षों में उत्तराखंड में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 43 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें करीब 30 करोड़ रुपये की ठगी हुई। इन मामलों में सबसे ज्यादा बुजुर्ग, नौकरीपेशा लोग और कारोबारी वर्ग प्रभावित हुआ है।

निवेश और KYC फ्रॉड में तेजी

राज्य में केवल डिजिटल अरेस्ट ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग फ्रॉड के मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेश करवाते हैं और बाद में पूरा पैसा गायब कर देते हैं।

इसके अलावा फर्जी लोन ऐप, KYC अपडेट के नाम पर OTP मांगना, OLX खरीद-बिक्री फ्रॉड, फर्जी कस्टमर केयर नंबर और सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग जैसे मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

साइबर पुलिस का कहना है कि अब अपराधी केवल तकनीकी रूप से ही नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में अपराधी पीड़ित की निजी जानकारी जुटाकर उसे विश्वास में लेते हैं और फिर ठगी को अंजाम देते हैं।

महिलाओं के खिलाफ अपराध और गंभीर अपराधों में कमी

जहां उत्तराखंड में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं NCRB रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में करीब 1.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय का कहना है कि महिला हेल्प डेस्क, त्वरित कार्रवाई और जागरूकता अभियानों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।

इसके अलावा हत्या, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में भी 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियानों और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।

स्मार्ट पुलिसिंग में देशभर में अव्वल उत्तराखंड

उत्तराखंड में साइबर अपराध बढ़ने के बीच पुलिस की डिजिटल पुलिसिंग व्यवस्था को देशभर में सराहना मिली है। स्मार्ट पुलिसिंग और डिजिटल डाटा प्रबंधन के मामले में राज्य ने शीर्ष स्थान हासिल किया है।

“वन डाटा वन एंट्री सिस्टम”, CCTNS और इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के प्रभावी संचालन में उत्तराखंड ने 93.46 का स्कोर हासिल किया है। राज्य में अब एफआईआर से लेकर चार्जशीट तक की प्रक्रिया डिजिटल हो चुकी है।

ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध होने से अपराधियों की निगरानी और मामलों की जांच में तेजी आई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अपराध नियंत्रण में मदद मिल रही है, लेकिन साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए आम जनता की सतर्कता भी बेहद जरूरी है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उत्तराखंड में साइबर अपराध और अधिक जटिल हो सकते हैं। ऐसे में लोगों को अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक, फर्जी निवेश योजनाओं और OTP साझा करने जैसी गलतियों से बचना होगा।

पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है और लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में दें।

उत्तराखंड में साइबर अपराध की यह तेजी साफ संकेत देती है कि डिजिटल दुनिया जितनी तेजी से बढ़ रही है, खतरे भी उसी अनुपात में बढ़ रहे हैं। अब साइबर अपराध केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह मानसिक तनाव और सामाजिक असुरक्षा का बड़ा कारण भी बनते जा रहे हैं।

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