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उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को एक वर्ष पूरा, ‘UCC दिवस’ पर सरकार ने गिनाईं उपलब्धियां

Uniform Civil Code Uttarakhand

UCC Divas

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code Uttarakhand) लागू हुए एक वर्ष का समय पूरा हो गया है। 27 जनवरी 2025 को लागू हुई यूसीसी ने राज्य के सामाजिक और कानूनी ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार ने पूरे प्रदेश में यूसीसी दिवस को भव्य रूप से मनाया। राजधानी देहरादून सहित सभी जिलों में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए इस कानून की यात्रा और उपलब्धियों को रेखांकित किया गया।

यूसीसी दिवस के मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता की एक साल की यात्रा, चुनौतियों और सफलताओं को साझा किया। इस दौरान यूसीसी का प्रारूप तैयार करने वाली समिति के सदस्यों, इसके सफल क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण प्रक्रिया में सहयोग देने वाले वीएलसी (Village Level Coordinators) को सम्मानित किया गया।

एक साल में रिकॉर्ड पंजीकरण, डिजिटल गवर्नेंस की मिसाल

यूसीसी लागू होने के बाद बीते एक वर्ष में उत्तराखंड सरकार के यूसीसी पोर्टल पर पंजीकरण को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 4.8 लाख से ज्यादा आवेदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है।

विवाह पंजीकरण सबसे अधिक लोकप्रिय सेवा के रूप में उभरी है। इसके तहत 4.2 लाख से अधिक आवेदन आए, जिनमें से लगभग 4 लाख विवाह पंजीकरण स्वीकृत किए गए। वहीं, पहले से पंजीकृत विवाह की स्वीकृति के लिए 86 हजार से अधिक आवेदन मिले, जिनमें से 83 हजार से ज्यादा को मंजूरी प्रदान की गई।

इसके अलावा, वसीयत पंजीकरण के क्षेत्र में भी लोगों की भागीदारी बढ़ी है। वसीयत से जुड़े 5 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 4 हजार से ज्यादा स्वीकृत किए गए हैं। ये आंकड़े न केवल कानून के प्रति जनता के भरोसे को दर्शाते हैं, बल्कि डिजिटल और पारदर्शी शासन की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को भी रेखांकित करते हैं।

यूसीसी तक पहुंचने की ऐतिहासिक यात्रा

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने की प्रक्रिया लंबी और सुविचारित रही। इसकी शुरुआत 12 फरवरी 2022 को हुई, जब राज्य सरकार ने यूसीसी लाने का औपचारिक संकल्प लिया। इसके बाद 27 मई 2022 को कानून का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया।

रिटायर्ड जज रंजना देसाई की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने व्यापक जनसंवाद, सुझाव और कानूनी अध्ययन के बाद 2 फरवरी 2024 को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। रिपोर्ट मिलने के दो दिन बाद ही मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी और 6 फरवरी 2024 को यूसीसी को विधानसभा में पेश किया गया।

महज एक दिन के भीतर, यानी 7 फरवरी 2024 को विधानसभा से इसे पारित कर दिया गया। इसके बाद राज्यपाल के माध्यम से यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा गया। 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 12 मार्च 2024 को यूसीसी का गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया।

नियमावली से लेकर लागू होने तक

यूसीसी को व्यवहारिक रूप देने के लिए पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में सात सदस्यीय रूल्स मेकिंग एंड इंप्लीमेंटेशन कमेटी का गठन किया गया। इस समिति ने 12 जुलाई 2024 को अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की और 18 अक्टूबर 2024 को यूसीसी नियमावली सरकार को सौंपी।

आखिरकार 20 जनवरी 2025 को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां समान नागरिक संहिता को विधिवत रूप से लागू किया गया।

यूसीसी के तहत जनता को मिलने वाली प्रमुख सेवाएं

समान नागरिक संहिता के अंतर्गत नागरिकों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें विवाह पंजीकरण, तलाक या विवाह की अमान्यता का पंजीकरण, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन और समाप्ति, बिना वसीयत उत्तराधिकार में कानूनी वारिसों की घोषणा, वसीयत और कोडिसिल का पंजीकरण, वसीयत या कोडिसिल को रद्द या पुनर्जीवित करने की सुविधा शामिल है।

सीएम धामी का बड़ा बयान

Uniform Civil Code Uttarakhand ‘यूसीसी दिवस’ पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज रहेगा। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति हमेशा से समानता और समरसता की पक्षधर रही है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता की परिकल्पना की थी, जिसे उत्तराखंड ने साकार किया है।

सीएम धामी ने कहा कि यूसीसी लागू होने से राज्य में महिलाओं के अधिकार मजबूत हुए हैं और विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण के नए युग की शुरुआत बताया।

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