पिथौरागढ़। शुभचिंतक सामाजिक समिति, पिथौरागढ़ द्वारा आयोजित 45 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का समापन नगर निगम हॉल में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ संपन्न हुआ। समापन अवसर पर जयवर्धन जी द्वारा लिखित एवं कुमार कैलाश के निर्देशन में तैयार नाटक “किस्सा मौजपुर का” का शानदार मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को भावनात्मक और वैचारिक रूप से गहराई तक प्रभावित किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ज़िला अधिकारी आशीष भटगांई उपस्थित रहे, जबकि डॉ. अशोक कुमार पंत और राज भट्ट विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। अतिथियों ने कलाकारों के अभिनय, नाटक की विषयवस्तु और निर्देशन की सराहना करते हुए इसे सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया।
ग्रामीण समाज की सच्चाइयों को उजागर करता नाटक
“किस्सा मौजपुर का” एक काल्पनिक गाँव के माध्यम से भारतीय ग्रामीण समाज की उन सच्चाइयों को सामने लाता है, जिनमें गरीबी, अन्याय, शोषण, राजनीति, सामाजिक पाखंड और रूढ़िवादी सोच गहराई से समाई हुई है। नाटक में किसान, मजदूर, महिलाएँ, बुजुर्ग और युवा अपने-अपने संघर्षों के साथ मंच पर दिखाई देते हैं।
नाटक का सबसे मार्मिक पक्ष उस परिवार की कहानी है, जहाँ लड़की का जन्म खुशी नहीं बल्कि दुख और मातम का कारण बन जाता है। यह दृश्य पितृसत्तात्मक सोच और लैंगिक भेदभाव पर तीखा प्रहार करता है, जिसने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया।
विज्ञान पर उठता है गंभीर सवाल
नाटक में विज्ञान को कहीं चमत्कार तो कहीं भगवान के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसने मानव जीवन को सुविधाजनक बनाया। लेकिन इसके साथ ही नाटक एक गंभीर सवाल भी उठाता है—
क्या विज्ञान वास्तव में वरदान है या वह अभिशाप भी बन सकता है?
नाटक का स्पष्ट संदेश है कि विज्ञान न अच्छा है और न बुरा, उसका प्रभाव मानव सोच और उपयोग पर निर्भर करता है।
कलाकारों के अभिनय ने बांधा समा
नाटक में अभिषेक पटेल, राजेश सामंत, आदर्श, अंकित पाण्डे, सूरज रावत, आदर्श रावत, विशाल सिरौला, तारा भण्डारी, सुनील उप्रेती, सपना, तनुज भट्ट, सिद्धार्थ सिसताल, तारा और साक्षी तिवारी ने सशक्त और सजीव अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। संवाद अदायगी और मंचीय संयोजन ने प्रस्तुति को बेहद प्रभावशाली बना दिया।
रंगमंच से समाज को जागरूक करने का प्रयास
45 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के सफल समापन के साथ शुभचिंतक सामाजिक समिति ने यह संदेश दिया कि रंगमंच केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों और आयोजकों का उत्साहवर्धन किया।

