नई दिल्ली, 11 दिसंबर: देश के पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न और भारतीय राजनीति की धुरी माने जाने वाले प्रणब मुखर्जी की जयंती पर बुधवार को पूरे देश ने उन्हें याद किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए भारत के इस प्रखर और बुद्धिमान राजनेता को श्रद्धांजलि दी। शाह ने कहा कि प्रणब मुखर्जी की संविधान की गहरी समझ और सार्वजनिक जीवन पर उनकी पकड़ ने देश की लोकतांत्रिक यात्रा को मजबूती प्रदान की।
अमित शाह ने अपने संदेश में लिखा,
“भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। जनसेवा के प्रति समर्पित नेता मुखर्जी की संविधान की गहरी समझ ने सार्वजनिक पदों पर उनके कार्यकाल को परिभाषित किया। उनका जीवन और कार्य हमारी लोकतांत्रिक यात्रा को प्रेरित करते रहेंगे।”
शाह की इस श्रद्धांजलि के साथ एक बार फिर यह स्मरण किया गया कि प्रणब मुखर्जी भारतीय राजनीति में केवल एक पदाधिकारी नहीं, बल्कि नीति निर्धारण, संसदीय प्रक्रियाओं की जटिलता और संवैधानिक समझ के चलते एक संस्थान समान व्यक्तित्व थे।
प्रणब मुखर्जी: पांच दशक लंबी राजनीतिक यात्रा
प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक करियर भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। लगभग पांच दशक तक सक्रिय रहकर उन्होंने वित्त, रक्षा, विदेश सहित कई अहम मंत्रालयों का नेतृत्व किया।
उनकी राजनीतिक यात्रा—
1969 में राज्यसभा सदस्य के रूप में शुरुआत
केंद्र की विभिन्न सरकारों में 35 से अधिक वर्षों तक प्रमुख मंत्री पद
विदेश मंत्री, जिनके समय में भारत की विदेश नीति को नई दिशा मिली
वित्त मंत्री के रूप में बजट और आर्थिक नीति पर उनकी पकड़ अद्वितीय
संरक्षण मंत्री के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूती
2012 में वे देश के 13वें राष्ट्रपति बने। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण बिलों पर अपनी विशिष्ट टिप्पणी, विचार-विमर्श और दृष्टिकोण दर्ज कराए। सरकारी निर्णयों को वे संवैधानिक कसौटी पर परखने में विश्वास रखते थे।
संविधान की गहरी समझ—उनकी सबसे बड़ी पहचान
अमित शाह के संदेश का सबसे बड़ा सार यह रहा कि प्रणब मुखर्जी की पहचान एक ऐसे नेता की रही, जिसकी संविधान पर पकड़ असाधारण थी।
संसद के अंदर उनकी भूमिका अक्सर सुलझाने वाली, संतुलनकारी और व्यवहारिक मानी जाती रही।
प्रणब मुखर्जी, जिन्हें अक्सर “वॉकिंग एनसाइक्लोपीडिया ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स” कहा जाता था, संसद में किसी भी विधेयक पर धारदार, तथ्यों पर आधारित और संसदीय प्रक्रियाओं के अनुरूप सुझाव देने के लिए पहचाने जाते थे।
शांत, सुसंस्कृत और निर्णायक—एक अनोखी शैली
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रणब मुखर्जी एक ऐसी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते थे, जो असहमति के भीतर भी संवाद की संभावना ढूंढती थी।
उनकी शैली—
बहस में तथ्यों और इतिहास का व्यापक उपयोग
विपक्ष के नेताओं से संवाद के खुले रास्ते
निर्णय लेने में स्पष्टता
राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखना
राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत संबंधों से अलग रखना
एक वरिष्ठ संसदीय विशेषज्ञ के मुताबिक, “प्रणब दा जिस तरह बिना आवाज़ ऊँची किए बहुमत को साथ लेकर चलते थे, वह आज की राजनीति में बहुत दुर्लभ हो गया है।”
राष्ट्रपति के रूप में निर्णायक भूमिका
राष्ट्रपति भवन में उनका कार्यकाल भारत के इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी बना।
संसद द्वारा पारित विधेयकों का सूक्ष्म परीक्षण
दया याचिकाओं पर समयबद्ध निर्णय
राज्यों में संवैधानिक संकट के मामलों पर स्पष्ट दृष्टिकोण
भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों की मजबूती पर बल
उनके कार्यकाल में कई बार ऐसे क्षण आए जब उन्होंने अपने विवेक को संविधान की मर्यादा और परंपरा के अनुरूप प्रयोग किया।
उनका जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत
अमित शाह का संदेश इस बात को भी रेखांकित करता है कि प्रणब मुखर्जी का योगदान सिर्फ राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती और प्रशासनिक ढांचे को समझने में भी देश को दिशा दी।
उनकी कई किताबें, भाषण और साक्षात्कार आज भी सार्वजनिक नीति पढ़ने वाले छात्रों और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री के रूप में देखे जाते हैं।
2020 में उनके निधन के बाद भी उनके विचार भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक सोच में जीवित हैं। 2019 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया—जो उनके योगदान की सर्वोच्च मान्यता है।
नेता जिन्होंने हर सरकार के साथ काम किया
प्रणब मुखर्जी की राजनीतिक यात्रा की एक अनोखी विशेषता यह रही कि उन्होंने विभिन्न नेताओं और प्रधानमंत्रियों के साथ काम करते हुए एक अनूठा अनुभव संचित किया।
इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पी.वी. नरसिंहा राव, मनमोहन सिंह सहित कई प्रधानमंत्रियों की कैबिनेट में वे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
उनकी यह क्षमता कि वे बदलते राजनीतिक परिदृश्यों में स्थिरता, संतुलन और निरंतरता बनाए रखें—उन्हें एक विशिष्ट नेता बनाती थी।
जयंती पर राजनेताओं और बुद्धिजीवियों ने किया स्मरण
अमित शाह के अलावा कई अन्य नेताओं ने भी प्रणब मुखर्जी को याद किया।
कांग्रेस नेताओं, वरिष्ठ नौकरशाहों और पूर्व कैबिनेट सदस्यों ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि प्रणब दा की कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
कई विश्वविद्यालयों और थिंक-टैंकों ने भी आज उनके सम्मान में विशेष आयोजनों का आयोजन किया, जहाँ उनकी नीतिगत सोच और योगदान पर विस्तृत चर्चा हुई।
निष्कर्ष
अमित शाह द्वारा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि सिर्फ एक औपचारिक संदेश नहीं, बल्कि इस बात की स्वीकारोक्ति भी है कि प्रणब मुखर्जी भारतीय राजनीतिक इतिहास की उन विरल शख्सियतों में शामिल हैं, जिनकी बुद्धिमत्ता, विवेक और संवैधानिक समझ आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।
उनका जीवन राष्ट्र सेवा, विनम्रता और उच्च दर्जे की संसदीय मर्यादा का एक जीवंत उदाहरण है—जो आज के भारत में लोकतंत्र के लिए दिशा-निर्देशक का काम करता है।


