सूरत होली रेल भीड़Photo: PTI

सूरत होली रेल भीड़: हीरा और टेक्सटाइल नगरी के रूप में पहचान रखने वाले सूरत में होली का त्योहार नजदीक आते ही रेलवे स्टेशनों पर अभूतपूर्व भीड़ उमड़ पड़ी है। खासकर उधना रेलवे स्टेशन पर हालात किसी बड़े मेले जैसे नजर आ रहे हैं। प्लेटफॉर्म से लेकर प्रवेश द्वार तक यात्रियों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं।

सूरत होली रेल भीड़ का असर सबसे अधिक उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जाने वाले प्रवासी मजदूरों पर पड़ा है, जो अपने परिवार के साथ घर लौटने के लिए घंटों पहले स्टेशन पहुंचकर लाइन में लगने को मजबूर हैं।


12 से 14 घंटे पहले पहुंच रहे यात्री

यात्रियों का कहना है कि जनरल टिकट से सफर करने वालों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। ट्रेन के निर्धारित समय से 12 से 14 घंटे पहले ही लोग स्टेशन पहुंचकर अपनी जगह सुरक्षित कर रहे हैं।

आसमानी गर्मी और अव्यवस्था के बीच बच्चे और बुजुर्ग प्लेटफॉर्म के फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने तो रात स्टेशन परिसर में ही गुजार दी ताकि ट्रेन में चढ़ने का मौका मिल सके।

एक प्रवासी मजदूर ने बताया, “हर साल होली और दीपावली पर यही हाल होता है। हम लोग महीनों पहले टिकट बुक करते हैं, लेकिन वेटिंग इतनी लंबी होती है कि आखिरकार जनरल डिब्बे का ही सहारा लेना पड़ता है।”


रिजर्वेशन के बावजूद नहीं मिल पा रही कन्फर्म सीट

सूरत होली रेल भीड़ के बीच सबसे बड़ा संकट कन्फर्म टिकट का है। यात्रियों का कहना है कि महीनों पहले आरक्षण कराने के बावजूद वेटिंग लिस्ट 100-150 तक पहुंच जाती है।

ऐसे में यात्रियों के सामने या तो यात्रा टालने का विकल्प है या फिर जनरल कोच में भीड़ के बीच सफर करने का जोखिम उठाना। कई यात्रियों ने रेलवे की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था और कोटा सिस्टम पर भी सवाल उठाए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सूरत जैसे औद्योगिक शहर में बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय प्रवासी काम करते हैं। त्योहारों के दौरान उनकी घर वापसी की मांग का आकलन पहले से किया जा सकता है, लेकिन ट्रेनों की संख्या और फ्रीक्वेंसी उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई जाती।


स्पेशल ट्रेनों के बावजूद राहत नहीं

रेलवे प्रशासन की ओर से कुछ स्पेशल ट्रेनें जरूर चलाई जा रही हैं, लेकिन लाखों की संख्या में घर जाने वाले यात्रियों के लिए यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है।

रेलवे सूत्रों के अनुसार अतिरिक्त कोच जोड़ने और कुछ रूटों पर विशेष गाड़ियां चलाने की कोशिश की गई है, लेकिन मांग के मुकाबले संसाधन कम पड़ रहे हैं।

यात्रियों का कहना है कि हर त्योहार पर यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला।


बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी

सूरत होली रेल भीड़ का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर दिख रहा है। भीड़ के कारण प्लेटफॉर्म पर खड़े रहना मुश्किल हो रहा है। कई जगहों पर पीने के पानी और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

महिलाएं और बुजुर्ग फर्श पर बैठकर ट्रेन आने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ यात्रियों ने शिकायत की कि भीड़ प्रबंधन के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात नहीं किए गए, जिससे धक्का-मुक्की की स्थिति बन रही है।


औद्योगिक शहर से क्यों नहीं बढ़ती ट्रेनें?

सूरत देश के सबसे बड़े औद्योगिक शहरों में से एक है। हीरा पॉलिशिंग और टेक्सटाइल उद्योग में काम करने वाले लाखों मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से आते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि सूरत से इन राज्यों की ओर जाने वाली ट्रेनों की संख्या त्योहारों के दौरान मांग के अनुरूप क्यों नहीं बढ़ाई जाती?

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे को डेटा-आधारित योजना बनाकर त्योहारों से पहले अतिरिक्त ट्रेनों की घोषणा करनी चाहिए। साथ ही, जनरल कोच की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए ताकि यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का अवसर मिल सके।


हर साल दोहराई जाती है समस्या

होली, दीपावली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों पर सूरत से उत्तर भारत की ओर जाने वाले रूटों पर भीड़ चरम पर होती है। इसके बावजूद दीर्घकालिक योजना का अभाव नजर आता है।

यात्रियों का कहना है कि अस्थायी उपायों की बजाय स्थायी समाधान की जरूरत है। प्रमुख रूटों पर नियमित रूप से अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था की जाए और पीक सीजन के दौरान फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाए।


प्रशासन के सामने चुनौती

रेलवे प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और यात्री सुरक्षा की है। यदि समय रहते पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई, तो भगदड़ या दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सूरत होली रेल भीड़ ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि औद्योगिक शहरों से प्रवासी मजदूरों की आवाजाही को लेकर ठोस नीति की आवश्यकता है।


होली का त्योहार जहां खुशियों और रंगों का प्रतीक है, वहीं सूरत के हजारों प्रवासी मजदूरों के लिए यह संघर्ष का समय बन गया है। घर पहुंचने की जद्दोजहद में उन्हें लंबी लाइनों, भीड़ और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।

जब तक प्रमुख रूटों पर ट्रेनों की संख्या और फ्रीक्वेंसी में स्थायी वृद्धि नहीं होगी, तब तक हर त्योहार पर यही स्थिति दोहराई जाती रहेगी।

सूरत होली रेल भीड़ सिर्फ भीड़ का आंकड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की कहानी है जो बढ़ती मांग के सामने कमजोर साबित हो रही है। अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन इस चुनौती से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

By Bhaskar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *