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DM देहरादून की संस्तुति पर उप निबंधक ऋषिकेश निलंबित, स्टाम्प चोरी और फर्जी रजिस्ट्रियों का बड़ा खुलासा

उप निबंधक ऋषिकेश निलंबित

देहरादून, 14 फरवरी 2026। उप निबंधक ऋषिकेश निलंबित:
जिला प्रशासन की सख्त रिपोर्ट पर शासन ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए ऋषिकेश के उप निबंधक को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। डीएम की संस्तुति पर हुई इस कार्रवाई ने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग में हलचल मचा दी है। औचक निरीक्षण में करोड़ों रुपये की संभावित स्टाम्प चोरी, फर्जी कर्मचारी द्वारा रजिस्ट्रियां, मूल अभिलेखों को महीनों दबाकर रखने और भूमि उपयोग में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।

यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है और इसे राजस्व हितों से खिलवाड़ पर “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।


औचक निरीक्षण में उजागर हुई गंभीर अनियमितताएं

जिलाधिकारी सविन बसंल ने आमजन की शिकायतों के आधार पर उप निबंधक कार्यालय, ऋषिकेश का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिकेश और जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) भी मौजूद रहे। संयुक्त जांच आख्या में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद गंभीर थे।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह रहा कि उप निबंधक की अनुपस्थिति में एक निबंधक लिपिक द्वारा अवैधानिक रूप से विलेखों का पंजीकरण किया जा रहा था। इतना ही नहीं, एक कथित “घोस्ट कार्मिक” भी कार्यालय में कार्यरत मिला, जिसके पास न तो नियुक्ति पत्र था और न ही उपस्थिति पंजिका में उसका नाम दर्ज था।

जांच में यह भी पाया गया कि पंजीकृत दस्तावेज महीनों और कुछ मामलों में वर्षों तक कार्यालय में लंबित रखे गए। जबकि नियमों के अनुसार मूल अभिलेख अधिकतम तीन दिनों के भीतर आवेदकों को लौटाए जाने चाहिए।


करोड़ों की स्टाम्प चोरी की आशंका

निरीक्षण में भारतीय स्टाम्प (उत्तराखंड संशोधन) अधिनियम 2015 की धारा 47क तथा भारतीय रजिस्ट्रेशन मैनुअल के नियम 325, 195 और 196 की अवहेलना सामने आई। संपत्ति मूल्यांकन की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही पाई गई।

जांच में खुलासा हुआ कि ग्राम माजरी ग्रांट, तहसील डोईवाला क्षेत्र में दून घाटी विशेष महायोजना-2031 के अंतर्गत आरक्षित औद्योगिक भूमि को आवासीय दरों पर दर्जनों छोटे भूखंडों में विभाजित कर रजिस्ट्रियां कराई गईं। इससे सरकार को भारी राजस्व हानि होने की आशंका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि औद्योगिक भूमि का पंजीकरण आवासीय दरों पर किया गया है तो यह न केवल स्टाम्प अपवंचना है, बल्कि भूमि उपयोग नियमों का गंभीर उल्लंघन भी है।


मूल अभिलेखों को महीनों दबाकर रखा गया

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि सैकड़ों मूल विलेख अलमारियों में धूल खा रहे थे। फरियादियों ने मौके पर अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्हें महीनों से न तो रजिस्ट्री की प्रमाणित नकल मिल रही थी और न ही उनके मूल दस्तावेज लौटाए जा रहे थे।

नियमों के अनुसार अर्जेंट रजिस्ट्री की नकल 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराई जानी चाहिए, लेकिन कई मामलों में यह सुविधा महीनों और वर्षों से लंबित पाई गई।

इससे आमजन में गहरा असंतोष था और यही शिकायतें औचक निरीक्षण का आधार बनीं।


फर्जी कर्मचारी से कराई जा रही थीं रजिस्ट्रियां

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि कार्यालय में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा पंजीकरण कार्य कराया जा रहा था। न तो उसका विधिवत नियुक्ति पत्र था और न ही विभागीय रिकॉर्ड में कोई प्रविष्टि।

यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही दर्शाती है, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार और संगठित स्टाम्प चोरी की ओर भी संकेत करती है।

राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, यदि बाहरी व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रियां कराई गई हैं तो उन सभी दस्तावेजों की वैधता की समीक्षा भी की जा सकती है।


डीएम की सख्ती और शासन की कार्रवाई

जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तत्काल प्रभाव से उप निबंधक को निलंबित करते हुए मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है और अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी है।

प्रशासन का कहना है कि राजस्व हितों से खिलवाड़, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक, अन्य सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी इसी प्रकार के औचक निरीक्षण की तैयारी की जा रही है।


व्यापक प्रभाव और आगे की राह

इस पूरे प्रकरण ने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपराधिक जांच तक भी जा सकता है।

भूमि खरीदने वाले नागरिकों के हितों की सुरक्षा और राजस्व की पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता बताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, संपत्ति मूल्यांकन की ऑनलाइन पारदर्शी व्यवस्था और समयबद्ध दस्तावेज वापसी तंत्र को सख्ती से लागू किए बिना ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।


संदेश स्पष्ट: अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस

उप निबंधक ऋषिकेश निलंबित” की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि जिला प्रशासन अब शिकायतों को हल्के में नहीं ले रहा। आमजन की पीड़ा और शिकायतों को आधार बनाकर किया गया औचक निरीक्षण प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

राजस्व हितों की रक्षा और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए यह कार्रवाई मिसाल बन सकती है। आने वाले दिनों में यदि अन्य कार्यालयों में भी इसी तरह की जांच होती है तो स्टाम्प एवं पंजीकरण प्रणाली में व्यापक सुधार देखने को मिल सकता है।

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