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Strait of Hormuz में फिर तनाव: अमेरिकी दबाव, ईरानी चेतावनी और भारतीय जहाजों पर फायरिंग से बढ़ा संकट

Strait of Hormuz

Photo: Bugyal News

नई दिल्ली/तेहरान: दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने इस रणनीतिक जलडमरूमध्य को अस्थिर कर दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर खतरा मंडराने लगा है। बीते 24 घंटों में घटनाक्रम तेजी से बदला है, जिसमें ईरान द्वारा दो भारतीय जहाजों पर कथित फायरिंग ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।


खुलने के बाद फिर क्यों बढ़ा तनाव?

हाल ही में जब ईरान ने अपने बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद Strait of Hormuz को पूरी तरह खोलने की घोषणा की थी, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत की लहर दौड़ गई थी। इस घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई और लंबे समय से फंसे जहाजों को भी राहत मिली।

लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका की ओर से लगाई गई नाकाबंदी तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक ईरान के साथ “100 प्रतिशत समझौता” नहीं हो जाता। ट्रंप के इस बयान के बाद स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई।


IRGC का ऐलान: फिर से ब्लॉक हुआ मार्ग

ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने घोषणा की कि Strait of Hormuz को फिर से सीमित कर दिया गया है। IRGC ने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में आने वाले किसी भी जहाज को दुश्मन के साथ सहयोग मानते हुए कार्रवाई की जा सकती है।

इस चेतावनी के बाद समुद्री गतिविधियों में तुरंत असर दिखा और कई जहाजों ने अपना मार्ग बदलना शुरू कर दिया।


भारतीय जहाजों पर फायरिंग: बड़ा कूटनीतिक मामला

तनाव के बीच सबसे चौंकाने वाली घटना तब सामने आई, जब इस मार्ग से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों पर ईरानी गनबोट्स द्वारा फायरिंग की गई। इस घटना के बाद दोनों जहाजों को वापस लौटना पड़ा।

इस घटना ने भारत के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। नई दिल्ली में इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया गया और स्थिति पर जवाब मांगा गया। भारत, जो इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, अब इस संकट के सीधे प्रभाव में आ गया है।


ईरान का सख्त रुख, मुज्तबा खामेनेई का बयान

ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण रखा जाएगा। ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई ने सख्त लहजे में कहा कि उनकी नौसेना किसी भी दुश्मन को जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उनके इस बयान को क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन और चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।


परमाणु कार्यक्रम बना विवाद की जड़

अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव कोई नया नहीं है। इसका मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसका एनरिच्ड यूरेनियम भंडार है। अमेरिका लंबे समय से ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है।


21 अप्रैल को खत्म हो सकता है सीज़फायर

दोनों देशों के बीच जारी अस्थायी सीज़फायर 21 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस सीज़फायर को आगे बढ़ाने की संभावना बेहद कम है।

सूत्रों के मुताबिक, इस बीच इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत होने की संभावना है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए किसी ठोस नतीजे की उम्मीद कम ही जताई जा रही है।


वैश्विक असर: तेल बाजार और व्यापार पर संकट

Strait of Hormuz दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग एक बड़ा हिस्सा संभालता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट और गहराता है, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। साथ ही, वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है।


भारत के लिए क्यों अहम है यह मार्ग?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, जो इसी मार्ग से होकर आता है। ऐसे में इस क्षेत्र में अस्थिरता भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तर पर चिंता का विषय है।

भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक और भारत के लिए भी सीधा खतरा बन चुका है।


आगे क्या?

मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि Strait of Hormuz संकट कब तक जारी रहेगा। एक ओर अमेरिका अपने दबाव की नीति पर कायम है, तो दूसरी ओर ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा।

अगर कूटनीतिक समाधान जल्द नहीं निकला, तो यह टकराव बड़े सैन्य संघर्ष का रूप भी ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।


Strait of Hormuz में बढ़ता तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। आने वाले दिन इस संकट की दिशा तय करेंगे—क्या यह बातचीत से सुलझेगा या टकराव और गहराएगा।

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