देहरादून: उत्तराखंड को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत, आत्मनिर्भर और रोजगार आधारित राज्य बनाने की दिशा में सेतु आयोग ने अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। सोमवार को सचिवालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, ग्रामीण सशक्तिकरण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार को लेकर व्यापक चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता सेतु आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शत्रुघ्न सिंह ने की।
बैठक में पर्यटन, कृषि, उद्यान, स्वास्थ्य, तकनीकी विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं संस्थागत प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान राज्य के संतुलित और समावेशी विकास के लिए नई कार्ययोजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, सरकारी योजनाओं की पहुंच को मजबूत करने और डिजिटल सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

स्मार्ट विलेज केंद्र बनेंगे ग्रामीण विकास की नई पहचान
बैठक में सेतु आयोग द्वारा शुरू किए गए ‘एकीकृत स्मार्ट विलेज केंद्रों’ की प्रगति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इन केंद्रों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करना है, ताकि गांवों के लोगों को विभिन्न सरकारी सेवाएं उनके निकट ही उपलब्ध हो सकें।
अधिकारियों ने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से प्रत्येक क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। यह पहल केवल डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं होगी, बल्कि गांवों में रोजगार, उद्यमिता और स्वरोजगार की संभावनाओं को भी बढ़ावा देगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्मार्ट विलेज केंद्रों को प्रभावी ढंग से संचालित किया गया तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई धुरी साबित हो सकते हैं।
किसानों, महिलाओं और युवाओं को केंद्र में रखकर बनेगी रणनीति
बैठक में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि राज्य के विकास का वास्तविक लाभ तभी संभव है जब किसानों, महिलाओं और युवाओं को विकास प्रक्रिया का केंद्र बनाया जाए। इसके लिए विभागीय कन्वर्जन मॉडल के तहत विभिन्न योजनाओं को एक मंच पर लाने और लाभार्थियों तक उनकी पहुंच आसान बनाने की रणनीति पर जोर दिया गया।
सेतु आयोग का मानना है कि कई बार योजनाएं होने के बावजूद जानकारी के अभाव या विभागीय समन्वय की कमी के कारण उनका लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में स्थानीय समुदायों के साथ भरोसेमंद संबंध स्थापित कर उन्हें योजनाओं से जोड़ना आवश्यक है।
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनभागीदारी बढ़ाए बिना विकास की गति को स्थायी नहीं बनाया जा सकता। इसलिए स्थानीय लोगों, स्वयं सहायता समूहों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं को विकास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।
समावेशी और सतत विकास पर सेतु आयोग का जोर
बैठक को संबोधित करते हुए सेतु आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां और पर्यावरणीय संवेदनशीलता अन्य राज्यों से अलग हैं। इसलिए यहां विकास की योजनाएं बनाते समय संतुलन और सतत विकास के सिद्धांतों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि ऐसा विकास मॉडल तैयार करना है जिसमें समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिलें। इसके लिए विभिन्न विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा और योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में गंभीरता दिखानी होगी।
शत्रुघ्न सिंह ने स्पष्ट किया कि सभी पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए विभागों, पंचायतों और स्थानीय समुदायों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने ग्रामोत्थान को राज्य के समग्र विकास का आधार बताते हुए विभागीय योजनाओं के बेहतर कन्वर्जन पर बल दिया।
पंचायत स्तर पर तैयार होगी एक वर्ष की कार्ययोजना
बैठक के दौरान पंचायत स्तर पर विकास की ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया गया। सेतु आयोग ने चिन्हित केंद्रों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित कर उनकी जरूरतों और समस्याओं का आकलन करें।
इसके आधार पर एक वर्ष की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल सेवाओं और सरकारी योजनाओं की उपलब्धता जैसे विषय शामिल होंगे। आयोग ने निर्देश दिया कि यह कार्ययोजना जून के अंतिम सप्ताह तक तैयार कर प्रस्तुत की जाए।
अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय जरूरतों के आधार पर तैयार की गई योजनाएं अधिक प्रभावी साबित होंगी और उनका सीधा लाभ ग्रामीण आबादी को मिलेगा।
स्मार्ट सेंटर, हेल्प डेस्क और स्थानीय प्रशिक्षण पर भी चर्चा
बैठक में कई महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आए। इनमें चिन्हित केंद्रों को स्मार्ट सेंटर के रूप में विकसित करना, ग्रामीणों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क स्थापित करना और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करना शामिल रहा।
इसके अलावा केंद्रों के संचालन के लिए एक व्यवहारिक बिजनेस मॉडल तैयार करने और उसकी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) विकसित करने का सुझाव भी दिया गया। माना जा रहा है कि इससे इन केंद्रों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होगी और वे ग्रामीण विकास के स्थायी केंद्र बन सकेंगे।
उत्तराखंड के विकास मॉडल को नई दिशा देने की पहल
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सेतु आयोग की यह पहल सफल होती है तो उत्तराखंड में ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। स्मार्ट विलेज केंद्रों के माध्यम से जहां सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी, वहीं स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जहां पलायन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है, वहां रोजगार आधारित विकास मॉडल तैयार करना समय की आवश्यकता है। सेतु आयोग की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बैठक में सलाहकार डॉ. भावना शिंदे सहित सेवायोजन, जलागम, स्वास्थ्य और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी प्रतिभागियों ने राज्य के संतुलित, समावेशी और सतत विकास के लिए विभागीय समन्वय और जनभागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।
उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सेतु आयोग की यह रणनीति आने वाले वर्षों में राज्य के विकास मॉडल को नई पहचान दे सकती है।