मॉस्को, 28 फरवरी। ईरान पर हुए US-इजरायल संयुक्त हमला को लेकर वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। रूस ने शनिवार को इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अकारण और पूर्व-नियोजित आक्रामकता” करार दिया। मॉस्को का कहना है कि यह हमला एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी क्षेत्र पर किए गए हमले संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश के खिलाफ “पूर्व-नियोजित सशस्त्र आक्रमण” हैं। रूस ने आरोप लगाया कि इस सैन्य कार्रवाई से पहले व्यापक सैन्य, राजनीतिक और प्रचारात्मक तैयारियां की गईं, जो यह साबित करती हैं कि यह कदम अचानक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध था।
‘अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन’
रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस हमले से पहले क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी और ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई गई। बयान में कहा गया कि यह कदम “संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों” के खिलाफ है।
मॉस्को ने यह भी आरोप लगाया कि हमले को एक नए वार्ता प्रयास के आवरण में अंजाम दिया गया, जबकि वास्तविकता में इसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बढ़ाना था।
ट्रंप प्रशासन पर निशाना
रूस ने संकेत दिया कि यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर नया समझौता करने का दबाव बढ़ा रहे थे।
रूसी बयान के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई पश्चिम एशिया क्षेत्र को “मानवीय, आर्थिक और संभावित रूप से रेडियोलॉजिकल आपदा” के करीब ले जा सकती है।
मॉस्को ने कहा कि “हमलावरों की मंशा स्पष्ट है—वे एक ऐसे राज्य की संवैधानिक व्यवस्था को नष्ट करना चाहते हैं जिसने बल और वर्चस्व की राजनीति के आगे झुकने से इनकार किया।”
संयुक्त राष्ट्र और IAEA से हस्तक्षेप की मांग
रूस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) से अपील की है कि वे इन घटनाओं का निष्पक्ष और कठोर मूल्यांकन करें।
मॉस्को का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा को कमजोर करता है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीते महीनों में अमेरिकी प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाइयों का “श्रृंखलाबद्ध प्रभाव” वैश्विक व्यवस्था के कानूनी स्तंभों को कमजोर कर रहा है, जिनमें आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान शामिल है।
इजरायल के संकेतों के बावजूद हमला
रूस ने यह भी दावा किया कि इजरायल की ओर से पहले संकेत दिए गए थे कि तेल अवीव का ईरान के साथ प्रत्यक्ष सैन्य टकराव में रुचि नहीं है।
इसके बावजूद संयुक्त हमला किया गया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
ईरान पर US-इजरायल संयुक्त हमला न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती है, बल्कि इसके वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं।
तेल की कीमतों में अस्थिरता, समुद्री मार्गों पर खतरा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है।
रूस ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई की जिम्मेदारी पूरी तरह अमेरिका और इजरायल पर होगी।
कूटनीतिक समाधान पर जोर
मॉस्को ने कहा कि वह पहले की तरह अंतरराष्ट्रीय कानून, पारस्परिक सम्मान और हितों के संतुलन के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान की तलाश में सहयोग करने को तैयार है।
रूसी बयान में कहा गया कि मौजूदा संकट का एकमात्र रास्ता राजनीतिक और कूटनीतिक वार्ता है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है।
बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक राजनीति पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव झेल रही है।
रूस और पश्चिमी देशों के बीच संबंध पहले ही तनावपूर्ण हैं, और ईरान पर यह संयुक्त हमला नई कूटनीतिक खाई पैदा कर सकता है।
यदि वार्ता की प्रक्रिया तुरंत बहाल नहीं होती, तो पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता की आशंका और बढ़ सकती है।
ईरान पर US-इजरायल संयुक्त हमला को लेकर रूस की कड़ी प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए विवाद को जन्म दे दिया है।
मॉस्को का स्पष्ट संदेश है कि सैन्य कार्रवाई समाधान नहीं है और अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा है।
अब नजरें संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं—क्या वे कूटनीति को आगे बढ़ाएंगे या क्षेत्र और गहरे संकट की ओर बढ़ेगा?

