नई दिल्ली।
77वें गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व झोंकने वाले भारतीय सेना के जांबाज़ों को राष्ट्र की ओर से बड़ा सम्मान मिला है। द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों (JCOs) और जवानों को उनकी असाधारण वीरता, अदम्य साहस और विशिष्ट सेवाओं के लिए वीरता पुरस्कार और विशिष्ट सेवा पुरस्कार प्रदान किए जाने की मंजूरी दी है।
इन सम्मानों के माध्यम से उन योद्धाओं को नमन किया गया है, जिन्होंने दुर्गम इलाकों, घने जंगलों, सीमावर्ती क्षेत्रों और आतंकवाद-रोधी अभियानों में अपनी जान की परवाह किए बिना राष्ट्र की रक्षा की।
वीरता पुरस्कारों की श्रेणी में 12 चक्र सम्मान
इस वर्ष चक्र श्रेणी के अंतर्गत कुल 12 वीरता पुरस्कार दिए गए हैं।
इनमें —
- 2 कीर्ति चक्र
- 10 शौर्य चक्र (जिसमें 1 शौर्य चक्र मरणोपरांत)
शामिल हैं। ये पुरस्कार उन सैन्य अभियानों के लिए दिए गए हैं, जहां जवानों ने भारी गोलीबारी, विषम परिस्थितियों और प्रतिकूल हालात के बावजूद दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम किया।
सेना मेडल (वीरता) और विशिष्ट सेवा सम्मान
वीरता के अतिरिक्त विशिष्ट सेवा के लिए भी बड़ी संख्या में पुरस्कार घोषित किए गए हैं—
सेना मेडल (वीरता)
- सेना मेडल (वीरता) – एक बार
- 44 सेना मेडल (वीरता)
- इनमें 5 मरणोपरांत शामिल
विशिष्ट सेवा पुरस्कार
- 19 परम विशिष्ट सेवा मेडल
- 4 उत्तम युद्ध सेवा मेडल
- 35 अति विशिष्ट सेवा मेडल
- 7 युद्ध सेवा मेडल
- सेना मेडल (विशिष्ट) – 2 बार
- 43 सेना मेडल (विशिष्ट)
- 85 विशिष्ट सेवा मेडल
ऑपरेशनों में उत्कृष्ट योगदान के लिए 81 मेंशन-इन-डिस्पैच
देश के अलग-अलग हिस्सों में चलाए गए ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, ऑपरेशन हिफाजत, ऑपरेशन ऑर्किड और ऑपरेशन मेघदूत सहित कई सैन्य व राहत अभियानों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 81 मेंशन-इन-डिस्पैच भी प्रदान किए गए हैं। इनमें आतंकवाद-रोधी अभियान, बचाव कार्य और हताहत निकासी ऑपरेशन शामिल हैं।
कीर्ति चक्र विजेताओं की वीर गाथा
मेजर अर्शदीप सिंह (1 असम राइफल्स)
14 मई 2025 को भारत-म्यांमार सीमा पर विशेष गश्ती दल का नेतृत्व करते हुए अचानक हुए हमले में मेजर अर्शदीप सिंह ने घने जंगलों में ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन के ठिकाने पर साहसिक धावा बोला। भारी गोलीबारी के बावजूद उन्होंने कई सशस्त्र उग्रवादियों को निष्क्रिय किया और अपनी टुकड़ी को सुरक्षित बाहर निकाला।
नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
11 अप्रैल 2025 को किश्तवाड़ के जंगलों में आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा ने भारी फायर के बीच आगे बढ़ते हुए एक विदेशी आतंकवादी को नजदीक से मार गिराया, जबकि दूसरे को भी निष्क्रिय किया। उनका साहस और धैर्य प्रेरणादायी रहा।
शौर्य चक्र से सम्मानित वीर योद्धा
लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार
भारत-म्यांमार सीमा पर 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच सटीक योजना और प्रभावी नेतृत्व से उग्रवादी शिविर को ध्वस्त किया, जिसमें 9 आतंकवादी मारे गए।
मेजर अंशुल बलटू
असम के दीमा हसाओ जिले में मुठभेड़ के दौरान व्यक्तिगत साहस दिखाते हुए एक उग्रवादी को ढेर किया, जबकि कुल तीन आतंकवादी मारे गए।
मेजर शिवकांत यादव
शोपियां में कठिन परिस्थितियों के बीच आतंकवादियों का पीछा करते हुए नजदीकी मुकाबले में एक खतरनाक आतंकवादी को मार गिराया।
लांस दफादार बलदेव चंद (मरणोपरांत)
किश्तवाड़ में आमने-सामने की मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अंतिम सांस तक लड़ते रहे और सर्वोच्च बलिदान दिया।
(अन्य शौर्य चक्र विजेताओं ने भी नागरिकों की सुरक्षा और साथियों की जान बचाने में असाधारण साहस का परिचय दिया।)
राष्ट्र की ओर से वीरों को सलाम
गणतंत्र दिवस 2026 से पहले घोषित ये वीरता पुरस्कार न केवल भारतीय सेना की बहादुरी को दर्शाते हैं, बल्कि यह संदेश भी देते हैं कि राष्ट्र अपने हर उस सपूत के साथ खड़ा है, जो देश की सुरक्षा के लिए हर वक्त तैयार रहता है। इन योद्धाओं की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।


