राहुल गांधी मोहम्मद दीपक मुलाकात: उत्तराखंड में कोटद्वार बाबा शॉप विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। 26 जनवरी 2026 को सामने आए इस विवाद के बाद अब कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और मोहम्मद दीपक की दिल्ली में हुई मुलाकात ने राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। भाजपा ने इस मुलाकात को तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है, जबकि कांग्रेस इसे सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक अधिकारों का समर्थन बता रही है।
23 फरवरी को दिल्ली में राहुल गांधी ने मोहम्मद दीपक से मुलाकात की। जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने दीपक की पत्नी और बेटी से फोन पर बातचीत भी की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
भाजपा का हमला: “तुष्टिकरण की राजनीति”
भाजपा विधायक और प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने राहुल गांधी और मोहम्मद दीपक की मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो भी “दीपक से मोहम्मद दीपक” बन जाता है, कांग्रेस उसका सम्मान करती है। उनके मुताबिक यह उत्तराखंड में तुष्टिकरण को बढ़ावा देने का संकेत है।
चमोली ने कहा कि जिस राहुल गांधी से मिलने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी लंबे समय तक इंतजार करते हैं, उनसे अचानक मुलाकात कर उन्हें “हीरो” के रूप में प्रस्तुत करना राजनीतिक संदेश देता है। उन्होंने इसे देवभूमि की डेमोग्राफी और शांति के लिए खतरनाक बताया।
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस राज्य में सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाली राजनीति कर रही है। उनके अनुसार, इस तरह के घटनाक्रम से प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है।
कांग्रेस का रुख: सामाजिक सौहार्द का समर्थन
हालांकि कांग्रेस की ओर से औपचारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर यह संदेश दिया जा रहा है कि यह मुलाकात अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के समर्थन का प्रतीक है।
राहुल गांधी पहले भी मोहम्मद दीपक को “नेशनल हीरो” कह चुके हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि किसी व्यक्ति को उसकी पहचान या नाम के आधार पर निशाना बनाना गलत है और ऐसे मामलों में समर्थन देना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है।
क्या है कोटद्वार बाबा शॉप विवाद?
राहुल गांधी मोहम्मद दीपक मुलाकात की शुरुआत होती है 26 जनवरी 2026 को जब कोटद्वार में “बाबा ड्रेसेस” नाम की एक दुकान है, जिसके मालिक शोएब अहमद हैं। कुछ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दुकान के नाम में “बाबा” शब्द होने पर आपत्ति जताई और इसे बदलने की मांग की।
इसी दौरान पास में जिम चलाने वाले दीपक कुमार वहां पहुंचे और शोएब अहमद का समर्थन किया। बहस के दौरान जब उनसे नाम पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया—“मोहम्मद दीपक।” यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद मामला और तूल पकड़ गया। कुछ दिनों बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे, जिससे विवाद और बढ़ गया। विपक्षी दलों ने भाजपा पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
दिल्ली मुलाकात के बाद नया मोड़
दिल्ली में राहुल गांधी मोहम्मद दीपक मुलाकात के बाद दीपक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया था और कोटद्वार आने का वादा भी किया है। दीपक के मुताबिक, राहुल गांधी ने मजाकिया अंदाज में उनके जिम की मेंबरशिप लेने की भी बात कही।
इस बयान ने राजनीतिक चर्चा को और हवा दे दी है। भाजपा इसे राजनीतिक स्टंट बता रही है, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे सामाजिक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
डेमोग्राफी और ‘देवभूमि’ की बहस
उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ के रूप में जाना जाता है। ऐसे में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे यहां तेजी से राजनीतिक रंग ले लेते हैं। विनोद चमोली ने अपने बयान में राज्य की डेमोग्राफी को लेकर चिंता जताई और कहा कि कांग्रेस का रवैया प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद स्थानीय स्तर से उठकर राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बन गया है। राहुल गांधी की सक्रियता से यह संकेत भी मिलता है कि कांग्रेस राज्य में वैचारिक मुद्दों पर सीधी चुनौती देने की रणनीति अपना रही है।
सोशल मीडिया की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई। “मोहम्मद दीपक” वाला वीडियो वायरल होते ही यह मुद्दा राज्य की सीमाओं से बाहर निकल गया। विभिन्न प्लेटफॉर्म पर समर्थन और विरोध में अभियान चलने लगे।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को अपने-अपने नैरेटिव के अनुसार पेश किया। भाजपा ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव का मामला कहा।
आगे क्या?
अब सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी का कोटद्वार दौरा होता है और यदि होता है तो उसका राजनीतिक असर क्या होगा? उत्तराखंड में आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए यह मुद्दा और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कोटद्वार बाबा शॉप विवाद अब केवल एक दुकान के नाम का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह पहचान, राजनीति और सामाजिक विमर्श का प्रतीक बन चुका है। दिल्ली में हुई मुलाकात ने इसे राष्ट्रीय स्तर की बहस में बदल दिया है।
कोटद्वार बाबा शॉप विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति को नई दिशा दे दी है। राहुल गांधी मोहम्मद दीपक मुलाकात ने जहां कांग्रेस को एक वैचारिक मुद्दा दिया है, वहीं भाजपा ने इसे तुष्टिकरण और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद स्थानीय स्तर पर शांत होता है या राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में लंबी बहस का कारण बनता है। फिलहाल इतना तय है कि कोटद्वार से उठी चिंगारी ने सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।

