नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल बेहद गरमाया नजर आया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने साफ कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस हमेशा से मजबूती से खड़ी रही है और आगे भी रहेगी।
प्रियंका गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार की मंशा और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
“महिला आरक्षण की प्रणेता भाजपा नहीं” – प्रियंका गांधी
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके वक्तव्य से ऐसा प्रतीत होता है जैसे भाजपा ही महिला आरक्षण की सबसे बड़ी समर्थक और प्रणेता रही हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भले ही श्रेय लेने से इनकार किया हो, लेकिन उनके पूरे भाषण का केंद्र यही था।
प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि जब 2023 में महिला आरक्षण अधिनियम संसद से पारित हुआ, तब कांग्रेस ने अपनी विचारधारा के अनुरूप इसका पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि राहुल गांधी द्वारा पहले लिखे गए पत्र के बाद इस दिशा में कदम उठाए गए थे।
“प्रधानमंत्री ने आधा सच बताया” – कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री पर ‘आधा सच’ प्रस्तुत करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह तो बताया कि महिला आरक्षण का विरोध हुआ था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि विरोध किसने किया था।
प्रियंका गांधी ने दावा किया कि वास्तविकता यह है कि भाजपा ने ही शुरुआती दौर में इस प्रस्ताव का विरोध किया था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी दौर में महिला अधिकारों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे।
“संविधान संशोधन से लोकतंत्र पर खतरा”
प्रियंका गांधी ने इस मुद्दे को केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे लोकतंत्र के व्यापक संदर्भ से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यदि यह संविधान संशोधन विधेयक वर्तमान स्वरूप में पारित होता है, तो इससे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
उनका यह बयान सत्तापक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
महिला अधिकारों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र
अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने महिला अधिकारों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस विषय की नींव 1928 में ही रख दी गई थी, जब मोतीलाल नेहरू ने एक रिपोर्ट तैयार कर कांग्रेस कार्यसमिति को सौंपी थी।
इस रिपोर्ट में 19 मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया था, जिसमें महिलाओं के अधिकारों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया था। प्रियंका गांधी ने कहा कि यह दर्शाता है कि कांग्रेस का महिला सशक्तिकरण के प्रति दृष्टिकोण हमेशा से स्पष्ट और प्रगतिशील रहा है।
संसद में बढ़ती राजनीतिक गर्मी
महिला आरक्षण बिल 2026 और परिसीमन विधेयक को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। जहां एक ओर सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया कदम करार दे रहा है।
इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में और भी तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है, क्योंकि यह विषय सीधे तौर पर देश की आधी आबादी और लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा हुआ है।
महिला आरक्षण पर राजनीति जारी
महिला आरक्षण बिल 2026 को लेकर संसद में जो बहस चल रही है, वह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं बल्कि राजनीतिक विचारधाराओं की टकराहट का भी प्रतीक है। प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह विधेयक किस रूप में पारित होता है और देश की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ता है।

