नई दिल्ली: PM मोदी का GenZ के नाम भावुक संदेश शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए देश के युवाओं और विशेष रूप से GenZ को संबोधित किया। हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर हुए विवाद और कुछ युवाओं द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कठोर कार्रवाई की बजाय संवेदनशीलता, संवाद और सुधार का रास्ता अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बचपन और युवावस्था में गलतियां हो जाती हैं, लेकिन समाज का दायित्व उन्हें दंडित करना नहीं बल्कि सही दिशा दिखाना है।
PM मोदी का GenZ के नाम भावुक संदेश ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर की घटना और उसमें शामिल कुछ युवाओं की भाषा को लेकर व्यापक बहस चल रही है। अपने वीडियो में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ और उनकी दिवंगत माता के लिए इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों से वे आहत जरूर हुए, लेकिन उनके मन में प्रतिशोध नहीं बल्कि सुधार की भावना है।
‘मैं बच्चों को माफ करना चाहता हूं’
अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने युवाओं से सीधे संवाद करते हुए कहा कि आज उनका मन केवल बच्चों और युवाओं से बात करने का है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा। कुछ शरारती बच्चों ने ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं कही जा सकती।
उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से गालियां दी गईं और उनकी स्वर्गीय माता के प्रति भी बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य बदला लेना नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “मैं इन बच्चों को माफ करना चाहता हूं। मैं नहीं चाहता कि ये अदालतों के चक्कर लगाएं। मैं चाहता हूं कि इन्हें समझाया जाए, इन्हें सही रास्ता दिखाया जाए।”
गलतियां होती हैं, लेकिन सुधार का अवसर भी होना चाहिए
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन और युवावस्था सीखने का समय होता है। इस दौर में कई बार व्यक्ति भावनाओं में बहकर गलत फैसले ले लेता है या अनुचित भाषा का इस्तेमाल कर बैठता है। लेकिन समाज की परिपक्वता इसी में है कि वह ऐसे युवाओं को हमेशा के लिए अपराधी घोषित करने की बजाय उन्हें सुधारने का अवसर दे।
उन्होंने कहा कि समाज में इस घटना को लेकर जो आक्रोश है, वह स्वाभाविक है। विशेष रूप से तब, जब देश की बेटियां सार्वजनिक मंच पर इस तरह की भाषा का प्रयोग करती दिखाई दें। प्रधानमंत्री ने इसे एक “सांस्कृतिक झटका” बताते हुए कहा कि यह चिंता का विषय जरूर है, लेकिन इसका समाधान केवल दंड नहीं हो सकता।
‘गुमराह बच्चों को राह दिखाना हमारी जिम्मेदारी’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि ये बच्चे समाज के ही हिस्से हैं और यदि वे गुमराह हुए हैं तो उन्हें सही दिशा देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे युवाओं को केवल सजा देने या सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने का रास्ता अपनाया जाएगा तो परिस्थितियां नहीं बदलेंगी।
उन्होंने कहा कि समाज को धैर्य और संवेदनशीलता के साथ युवाओं को समझाने का प्रयास करना चाहिए। कठिन परिस्थितियों में सही मार्गदर्शन देना ही एक जिम्मेदार समाज की पहचान है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुमराह को राह दिखाना आसान नहीं होता, लेकिन यही सबसे बड़ा सामाजिक दायित्व है।
दांत और जीभ का उदाहरण देकर समझाया संदेश
अपने वीडियो में प्रधानमंत्री ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि कई बार भोजन करते समय दांतों के बीच जीभ आ जाती है और उससे खून भी निकल आता है। लेकिन क्या कोई व्यक्ति अपने दांत तोड़ देता है? नहीं, क्योंकि दांत भी अपने हैं और जीभ भी अपनी है।
इसी तरह उन्होंने कहा कि देश के बच्चे भी अपने ही हैं। यदि उनसे गलती हो जाए तो उन्हें हमेशा के लिए अलग कर देना समाधान नहीं है। बल्कि उन्हें अपनाकर सही दिशा दिखाना अधिक आवश्यक है।
यह उदाहरण सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया और कई लोगों ने इसे प्रधानमंत्री के संदेश का सबसे भावनात्मक हिस्सा बताया।
युवाओं से की सकारात्मक भविष्य की अपील
PM मोदी का GenZ के नाम भावुक संदेश के वीडियो में अंतिम हिस्से में प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी गलतियों से सीखें और देश निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में युवाओं के सामने असीम अवसर होंगे। इसलिए ऊर्जा को नकारात्मक दिशा में लगाने के बजाय शिक्षा, नवाचार, कौशल और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका सपना है कि देश का हर युवा अपने जीवन में सफलता प्राप्त करे और भारत के विकास में सहभागी बने। उन्होंने कहा कि वे युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं और चाहते हैं कि हर बच्चा अपने सपनों को साकार करे।
लगातार दूसरे दिन युवाओं से संवाद
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार दूसरे दिन सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं और छात्रों से जुड़े विषयों पर संवाद करते नजर आए। इससे एक दिन पहले भी उन्होंने वीडियो जारी कर संसद से पारित उस नए कानून का उल्लेख किया था, जिसका उद्देश्य देश की परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।
विश्लेषकों का मानना है कि लगातार दो दिनों तक युवाओं, शिक्षा और भविष्य पर केंद्रित संदेश देकर प्रधानमंत्री ने यह संकेत दिया है कि सरकार केवल कानून और व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के नैतिक और सामाजिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहती है।
संदेश से निकला बड़ा सामाजिक संकेत
PM मोदी का GenZ के नाम भावुक संदेश का यह वीडियो केवल जंतर-मंतर की घटना पर प्रतिक्रिया भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे समाज और युवाओं के बीच संवाद की आवश्यकता पर दिया गया व्यापक संदेश भी समझा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में असहमति का अधिकार है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति गरिमा और शालीनता के साथ होनी चाहिए।
साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि युवाओं को स्थायी रूप से दोषी ठहराने के बजाय उन्हें सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देना ही एक संवेदनशील समाज की पहचान है। प्रधानमंत्री का यह संदेश आने वाले दिनों में सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

