नई दिल्ली: संसद का बहुप्रतीक्षित बजट सत्र 2026 (Parliament Budget Session 2026) आज, 28 जनवरी से औपचारिक रूप से शुरू हो रहा है। यह सत्र 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा और दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। सत्र की शुरुआत परंपरागत रूप से द्रौपदी मुर्मू के संसद के संयुक्त सत्र को संबोधन से होगी। यह अभिभाषण सरकार की नीतियों, प्राथमिकताओं और आगामी एजेंडे की दिशा तय करने वाला माना जाता है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी औपचारिक शुरुआत
बजट सत्र की पहली कार्यवाही लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू होगी। यह संबोधन सरकार द्वारा तैयार किया गया नीति वक्तव्य होता है, जिसमें बीते वर्ष की उपलब्धियों और आने वाले समय की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया जाता है। राष्ट्रपति का यह भाषण संसद के दोनों सदनों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज की तरह देखा जाता है।
अभिभाषण के बाद दोनों सदनों में इस पर धन्यवाद प्रस्ताव लाया जाएगा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना रहती है।
बजट सत्र 2026: दो चरणों में होगी कार्यवाही
इस वर्ष का बजट सत्र दो हिस्सों में बांटा गया है—
- सत्र की शुरुआत: 28 जनवरी 2026
- पहला चरण: 28 जनवरी से 13 फरवरी 2026
- दूसरा चरण: 9 मार्च से 2 अप्रैल 2026
पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण, आर्थिक सर्वेक्षण और आम बजट से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी, जबकि दूसरे चरण में विधायी कार्यों और विभिन्न बिलों पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।
29 जनवरी को प्रधानमंत्री का मीडिया संबोधन
बजट सत्र के बीच एक अहम राजनीतिक कार्यक्रम 29 जनवरी 2026 को होगा, जब नरेंद्र मोदी संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री सुबह 10 बजे हंस द्वार पर पत्रकारों से बातचीत करेंगे।
इस मीडिया ब्रीफिंग में केवल उन्हीं संवाददाताओं को शामिल होने की अनुमति होगी, जिनके पास लोकसभा या राज्यसभा प्रेस गैलरी का वैध पास होगा। वहीं, कैमरापर्सन और फोटोग्राफरों के लिए CPIC द्वारा जारी पास अनिवार्य किया गया है। इस संबोधन को बजट सत्र से पहले सरकार का रुख स्पष्ट करने वाला अहम संदेश माना जा रहा है।
Economic Survey 2026-27 होगा पेश
बजट सत्र के दौरान 29 जनवरी को ही आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 संसद में पेश किया जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण देश की आर्थिक स्थिति का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है और आगामी बजट के लिए आधार तैयार करता है।
इसमें विकास दर, महंगाई, रोजगार, राजकोषीय घाटा, औद्योगिक उत्पादन और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य जैसे विषयों पर विश्लेषण होता है। सरकार और बाजार, दोनों की निगाहें इस दस्तावेज पर टिकी रहेंगी।
सत्र के दौरान उठेंगे कई अहम विधेयक
बजट सत्र के दौरान सरकार द्वारा कई अहम बिल पेश किए जाने की संभावना है। इनमें आर्थिक सुधार, सामाजिक कल्याण, प्रशासनिक सुधार और शासन व्यवस्था से जुड़े प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं।
सरकार की कोशिश रहेगी कि प्रमुख विधेयकों को संसद की मंजूरी दिलाई जाए, जबकि विपक्ष इन पर विस्तृत चर्चा और संशोधन की मांग कर सकता है।
विपक्ष की रणनीति: सरकार को घेरने की तैयारी
बजट सत्र को लेकर विपक्ष पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाने के मूड में है। विपक्षी दल महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की स्थिति, सामाजिक न्याय और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है, खासकर तब जब बजट और आर्थिक नीतियों पर चर्चा शुरू होगी।
बजट सत्र का राजनीतिक और आर्थिक महत्व
Parliament Budget Session 2026 केवल आर्थिक घोषणाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह सरकार के पूरे साल के एजेंडे की झलक भी देता है। राष्ट्रपति का अभिभाषण, आर्थिक सर्वेक्षण और प्रधानमंत्री का संदेश—तीनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि सरकार किस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
इसके साथ ही, विपक्ष के लिए यह सत्र सरकार की नीतियों को चुनौती देने और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने का बड़ा मंच होता है।
आने वाले दिनों पर टिकी निगाहें
जैसे-जैसे बजट सत्र आगे बढ़ेगा, देश की निगाहें संसद की कार्यवाही, बहसों और फैसलों पर टिकी रहेंगी। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े और बाद में पेश होने वाला आम बजट 2026-27 आने वाले समय में देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
कुल मिलाकर, Parliament Budget Session 2026 राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण से लेकर आर्थिक सर्वेक्षण और सरकार-विपक्ष की रणनीति तक—हर कदम देश की नीति और राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
