नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में NEET पेपर लीक आंदोलन व विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में जारी प्रदर्शन बुधवार को 32वें दिन में प्रवेश कर गया। हजारों छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर लगातार धरना दे रहे हैं। इसी बीच सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की।
इस मुलाकात को मौजूदा गतिरोध को समाप्त करने और संवाद की नई शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से जारी आंदोलन के बीच सरकार की यह पहल राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
32वें दिन भी जंतर-मंतर पर डटे छात्र, आंदोलन जारी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल NEET पेपर लीक आंदोलन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की भर्ती और प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की लड़ाई है। आंदोलनकारी लगातार निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कानूनी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
धरना स्थल पर छात्रों की मौजूदगी लगातार बनी हुई है। विभिन्न राज्यों से पहुंचे युवाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और प्रभावी निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार से बातचीत पर बदला रुख, अभिजीत दीपके का बड़ा बयान
NEET पेपर लीक आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब आंदोलनकारी प्रतिनिधिमंडल सरकार के बुलावे पर बातचीत के लिए नहीं जाएगा।
अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो उसे स्वयं जंतर-मंतर आकर प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करनी चाहिए। उनके अनुसार, अब समय केवल औपचारिक बैठकों का नहीं, बल्कि छात्रों के बीच पहुंचकर उनकी चिंताओं को समझने का है।
उनके इस बयान के बाद आंदोलन के राजनीतिक और सामाजिक महत्व में और बढ़ोतरी देखी जा रही है।
मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक से मिले केंद्रीय मंत्री
इसी बीच सरकार की ओर से सकारात्मक पहल करते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और वर्तमान हालात पर चर्चा भी की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल स्वास्थ्य संबंधी औपचारिकता नहीं, बल्कि आंदोलन के समाधान की दिशा में विश्वास बहाल करने की कोशिश भी हो सकती है। हालांकि, इस मुलाकात के बाद किसी औपचारिक समझौते या निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने आंदोलन का समर्थन करते हुए अनशन शुरू किया।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें पहले दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के पश्चात उन्हें छुट्टी मिली और बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
सड़क से संसद तक गरमाया पेपर लीक का मुद्दा
NEET पेपर लीक विवाद अब केवल छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है। यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। विपक्षी दल लगातार सरकार पर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं।
विपक्ष का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने करोड़ों युवाओं के विश्वास को झटका पहुंचाया है और सरकार को इस विषय पर जवाबदेही तय करनी चाहिए। वहीं सरकार का पक्ष है कि दोषियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और मामले की जांच पूरी गंभीरता से आगे बढ़ रही है।
सरकार यह भी कह रही है कि वह संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए आंदोलन को हवा दे रहा है।
विपक्षी नेताओं की सक्रियता बढ़ी
जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं का आना लगातार जारी है। विभिन्न दलों के नेता आंदोलनकारी छात्रों के बीच पहुंचकर अपना समर्थन जता रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने देर रात जंतर-मंतर पहुंचकर सरकार पर छात्रों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाना सरकार की जिम्मेदारी है।
वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका समर्थन आंदोलन के साथ बना रहेगा। उन्होंने सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील भी की।
सरकार का दावा—दोषियों पर हो रही सख्त कार्रवाई
सरकार लगातार यह दोहरा रही है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित एजेंसियां जांच कर रही हैं और जहां भी अनियमितता सामने आई है, वहां कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदमों पर भी काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
अब सबकी नजर अगले कदम पर
आंदोलन के 32वें दिन सरकार और आंदोलनकारी पक्ष दोनों अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों की सोनम वांगचुक से मुलाकात ने यह संकेत जरूर दिया है कि संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
यदि आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच औपचारिक बातचीत आगे बढ़ती है, तो लंबे समय से जारी यह गतिरोध समाप्त होने की संभावना बन सकती है। फिलहाल जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक आंदोलन जारी है और देशभर के लाखों छात्र इस आंदोलन से जुड़ी हर नई जानकारी पर नजर बनाए हुए हैं।

