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Uttarakhand: नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 स्थगित, अब 2027 में होगा ‘हिमालय का महाकुंभ’

नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 स्थगित, अब 2027 में होगा आयोजन | Himalayan Mahakumbh

File Photo

नंदा देवी राजजात यात्रा 2026

चमोली। उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान मानी जाने वाली नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 को लेकर बड़ा निर्णय सामने आया है। ‘हिमालय का महाकुंभ’ कही जाने वाली यह ऐतिहासिक पैदल यात्रा वर्ष 2026 में आयोजित नहीं की जाएगी। नंदा देवी राजजात यात्रा समिति ने इसे स्थगित करते हुए अब वर्ष 2027 में आयोजन करने का निर्णय लिया है। यह फैसला यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम की प्रतिकूलता और सुरक्षा तैयारियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

राजजात समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर और महासचिव भुवन नौटियाल ने कर्णप्रयाग में इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है और 23 जनवरी को नौटी गांव में मनौती के दिन 2027 की औपचारिक घोषणा की जाएगी।


क्यों स्थगित हुई नंदा देवी राजजात यात्रा 2026?

राजजात समिति के अनुसार, नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 में प्रस्तावित यात्रा पंचांग के हिसाब से 19 और 20 सितंबर को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पहुंचती। यह वही समय होता है, जब इन क्षेत्रों में भारी बर्फबारी, खराब मौसम और तापमान में अचानक गिरावट की आशंका रहती है। ऐसे हालात में सैकड़ों किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा को सुरक्षित रूप से संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती बन सकता था।

इसके अलावा, यात्रा मार्ग पर कई निर्जन पड़ावों में अभी आवश्यक बुनियादी ढांचा, अस्थायी पड़ाव, स्वास्थ्य सुविधाएं और संचार व्यवस्था पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई है। समिति का मानना है कि अधूरी तैयारियों के साथ राजजात का आयोजन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता था।


शुभ मुहूर्त में लिया गया ऐतिहासिक संकल्प

राजजात समिति के महासचिव भुवन नौटियाल ने इसे एक ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है, जब नंदा देवी राजजात यात्रा 2027 के लिए शुभ मुहूर्त के अनुसार विधिवत संकल्प लिया गया है।
उनके मुताबिक, “राजजात यात्रा कभी भी बिल्कुल 12 साल के सटीक अंतराल पर आयोजित नहीं हो पाई है। भौगोलिक और प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए जब भी जोखिम बढ़ता है, तब यात्रा को आगे बढ़ाना ही श्रेयस्कर माना जाता है।”

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा से जुड़े कई प्रस्ताव शासन को भेजे जाएंगे, ताकि 2027 में आयोजन को और अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाया जा सके।


हिमालय की सबसे कठिन पैदल धार्मिक यात्रा

नंदा देवी राजजात यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक मानी जाती है। यह यात्रा हर 12 साल में आयोजित होती है और लगभग 280 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा के रूप में जानी जाती है।
यह यात्रा नौटी गांव से शुरू होकर उच्च हिमालय में स्थित होमकुंड तक जाती है। दुर्गम पहाड़ी रास्ते, ग्लेशियर, ऊंचे दर्रे और मौसम की मार इसे हिमालय की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में शामिल करती है।


चौसिंगा खाडू: राजजात की अनोखी परंपरा

नंदा देवी राजजात की सबसे विशिष्ट परंपरा चौसिंगा यानी चार सींग वाला खाडू है। मान्यता है कि खाडू के जन्म के साथ ही राजजात का समय तय हो जाता है। यही खाडू पूरी यात्रा का अग्रदूत होता है और इसे मां नंदा देवी का प्रतिनिधि माना जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए चौसिंगा खाडू केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत स्वरूप है, जो सदियों से इस यात्रा की पहचान बना हुआ है।


प्रशासन की भूमिका और तैयारियां

गौरव कुमार, जिलाधिकारी चमोली ने कहा कि राजजात यात्रा का अंतिम निर्णय समिति द्वारा लिया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन का दायित्व यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है।
प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि आपदा संभावनाओं और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए समिति को यात्रा की तिथि पर पुनर्विचार करने के लिए पहले ही अवगत कराया गया था।


23 जनवरी को हो सकती है औपचारिक घोषणा

हालांकि, समिति ने यात्रा को 2026 से 2027 में स्थानांतरित करने पर सहमति जता दी है, लेकिन अंतिम और औपचारिक घोषणा 23 जनवरी को नौटी में मनौती कार्यक्रम के दौरान किए जाने की संभावना है। इसी दिन यात्रा के वर्ष, दिशा और भावी तैयारियों को लेकर धार्मिक परंपराओं के अनुसार घोषणा की जाएगी।


आस्था और सुरक्षा के संतुलन का निर्णय

नंदा देवी राजजात यात्रा का स्थगन कई श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक निर्णय हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला आस्था और सुरक्षा के संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बदलते मौसम और आपदा जोखिम के दौर में यह कदम भविष्य में एक सुरक्षित और भव्य राजजात के आयोजन की नींव रखेगा।

अब श्रद्धालुओं की नजरें 2027 पर टिकी हैं, जब मां नंदा देवी की यह दिव्य यात्रा एक बार फिर पूरे वैभव और परंपरा के साथ हिमालय की गोद में निकलेगी।

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