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MGNREGA dilution: CPI(M) ने केंद्र सरकार पर कॉरपोरेट हित साधने का लगाया आरोप

MGNREGA dilution

Photo Credit: KOMMURI SRINIVAS

नई दिल्ली/राज्य ब्यूरो:
MGNREGA dilution: देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) – CPI(M) ने शुक्रवार, 19 दिसंबर, को योजना में कथित “डायल्यूशन” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार MGNREGA की मूल भावना को कमजोर कर कॉरपोरेट हितों को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जिससे गरीब और ग्रामीण श्रमिकों को सीधा नुकसान होगा।


बापूजी मार्केट के पास प्रदर्शन, केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी

यह बयान बापूजी मार्केट के पास आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान सामने आया, जिसमें CPI(M) के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के राज्य सचिवालय सदस्य कंकनाला अंजनैयुलु और जिला सचिव एसके माबू ने किया।

नेताओं ने कहा कि MGNREGA केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ है, जिसे कमजोर करना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की अवधारणा पर सीधा हमला है।


2005 में वाम दलों के दबाव में शुरू हुई थी MGNREGA

CPI(M) नेताओं ने याद दिलाया कि MGNREGA की शुरुआत वर्ष 2005 में यूपीए सरकार के दौरान हुई थी, जिसमें वाम दलों की निर्णायक भूमिका रही थी। उन्होंने कहा कि उस समय ग्रामीण बेरोजगारी, पलायन और गरीबी से निपटने के लिए यह योजना लाई गई थी।

नेताओं का कहना था कि यह योजना संविधान के जीवन के अधिकार को व्यवहारिक रूप देने का एक प्रयास थी, जिससे ग्रामीण परिवारों को कम से कम 100 दिन का सुनिश्चित रोजगार मिल सके।


नाम बदलने से आगे की साजिश: CPI(M)

CPI(M) ने केंद्र सरकार द्वारा योजना का नाम बदलकर ‘Viksit Bharat Rozgar and Ajeevika Mission’ करने के प्रस्ताव पर भी कड़ा ऐतराज जताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह केवल महात्मा गांधी के नाम को हटाने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक नीतिगत और संरचनात्मक बदलाव की तैयारी है।

नेताओं ने आरोप लगाया कि:


2014 से ही योजना के खिलाफ रहे हैं पीएम मोदी: CPI(M) का आरोप

CPI(M) नेताओं ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में सत्ता संभालने के तुरंत बाद MGNREGA को लेकर असंतोष जाहिर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि तब से ही इस योजना को धीरे-धीरे कमजोर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।

पार्टी के अनुसार, केंद्र सरकार ने कभी बजट कटौती के जरिए तो कभी प्रशासनिक अड़चनों के माध्यम से योजना के प्रभाव को सीमित करने का प्रयास किया है।


ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है MGNREGA

CPI(M) के जिला समिति सदस्य वी. बालकोटैया ने कहा कि MGNREGA ने केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि ग्रामीण भारत में टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण भी किया।

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत:

इससे गांवों में स्थानीय बाजार मजबूत हुए और आर्थिक गतिविधियों को गति मिली।


कॉरपोरेट ‘लूट’ का आरोप, राष्ट्रीय संपत्ति पर खतरा

CPI(M) ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि MGNREGA को कमजोर कर राष्ट्रीय संपत्ति को कॉरपोरेट कंपनियों के लिए खोलने की कोशिश की जा रही है।

नेताओं का कहना था कि जब सरकारी योजनाएं कमजोर होंगी, तो निजी कंपनियों को सस्ते श्रम और संसाधनों तक आसान पहुंच मिलेगी, जिससे राष्ट्रीय संपदा की लूट का रास्ता खुलेगा।


गरीब मजदूरों पर पड़ेगा सीधा असर

पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि MGNREGA dilution की संरचना में बदलाव किए गए, तो इसका सीधा असर:

पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे ग्रामीण परिवारों के लिए यह योजना जीवन रेखा के समान है।


CPI(M) का ऐलान: देशव्यापी आंदोलन होगा तेज

प्रदर्शन के दौरान CPI(M) ने संकेत दिए कि यदि केंद्र सरकार ने MGNREGA dilution से जुड़े फैसलों को वापस नहीं लिया, तो पार्टी देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने अन्य विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।


निष्कर्ष

MGNREGA dilution को लेकर CPI(M) का यह विरोध केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के भविष्य को लेकर उठाई गई गंभीर चेतावनी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और अधिक गर्माने की संभावना है।

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