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उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का बड़े पैमाने पर पंजीकरण पूरा, 5.17 लाख में से 2.16 लाख संपत्तियों को मिली मंजूरी

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नई दिल्ली, 8 दिसंबर: देशभर की वक्फ संपत्तियों के सुव्यवस्थित प्रबंधन और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए ‘उम्मीद’ पोर्टल ने छह महीने की अवधि में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पोर्टल पर कुल 5.17 लाख वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण किया गया, जिनमें से 2,16,905 संपत्तियों को नामित अनुमोदकों द्वारा मंजूरी प्रदान कर दी गई है। वक्फ संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण की दिशा में यह उपलब्धि अब तक की सबसे बड़ी पहल मानी जा रही है।

रिजिजू ने की थी पोर्टल की शुरुआत, समय सीमा पूरी

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरें रिजिजू ने 6 जून 2025 को ‘उम्मीद’ पोर्टल की औपचारिक लॉन्चिंग की थी। यह पोर्टल वक्फ अधिनियम, 1995 और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत विकसित किया गया है, जिसमें वक्फ बोर्डों को अपनी सभी संपत्तियों का डेटा छह माह के भीतर ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य किया गया था। मंत्रालय ने 6 दिसंबर 2025 की अंतिम तारीख तय की थी, जो अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुकी है।

मंत्रालय के अनुसार, यह पोर्टल राष्ट्रीय स्तर पर वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण को एक केंद्रीकृत स्वरूप देता है और इससे संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, उपयोग और स्थिति का पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी। मंत्रालय का यह भी कहना है कि इस पोर्टल के माध्यम से बड़ी संख्या में संपत्तियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने से नीतिगत फैसले लेने में आसानी होगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पंजीकरण?

भारत में वक्फ बोर्डों के पास संपत्तियों का विशाल नेटवर्क है, जिसमें मस्जिदें, दरगाहें, कब्रिस्तान, धार्मिक स्थलों से लेकर कृषि और वाणिज्यिक भूमि तक शामिल हैं। लंबे समय से इन संपत्तियों के रिकॉर्ड को लेकर विवादों और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई संपत्तियों के स्वामित्व और सीमांकन को लेकर भ्रम की स्थिति रहती थी, क्योंकि रिकॉर्ड अक्सर अधूरे, अस्पष्ट या पुराने होते थे।

विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल पंजीकरण के बाद—

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पहले कई राज्यों में वक्फ संपत्तियों का डेटा प्रायः पेपर रजिस्टर या अलग-अलग सॉफ्टवेयर पर रखा जाता था, जिससे किसी भी समय राष्ट्रीय स्तर का समेकित आंकड़ा उपलब्ध नहीं होता था। ‘उम्मीद’ पोर्टल ने इस चुनौती को दूर कर दिया है।

मंजूर की गई 2.16 लाख संपत्तियाँ—सत्यापन प्रक्रिया क्या है?

पोर्टल पर पंजीकृत कुल 5.17 लाख संपत्तियों में से 2.16 लाख संपत्तियाँ औपचारिक सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर चुकी हैं। अनुमोदन प्रक्रिया में स्थानीय वक्फ बोर्ड, भू-राजस्व रिकॉर्ड, जियो-लोकेशन व दस्तावेजों का मिलान शामिल है। केवल उन्हीं संपत्तियों को मंज़ूरी दी जाती है जिनकी स्वामित्व स्थिति और दस्तावेज पोर्टल पर उपलब्ध नियमों और अधिनियम के अनुरूप पाए गए हों।

सरकार के अनुसार, आने वाले महीनों में बाकी संपत्तियों का भी सत्यापन तेज़ी से पूरा किया जाएगा। मंत्रालय का दावा है कि इस प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग ने रिकॉर्ड में छिपी विसंगतियों और पुराने विवादित मामलों की पहचान करना आसान कर दिया है।

पारदर्शिता और जवाबदेही में बड़ा सुधार

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का कहना है कि ‘उम्मीद’ पोर्टल वक्फ संपत्तियों से जुड़े प्रबंधन में पारदर्शिता स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा। पहले की व्यवस्था में कई राज्यों में संपत्तियों की वास्तविक स्थिति और उनसे होने वाली आय का डेटा उपलब्ध नहीं रहता था। कई बार शिकायतें मिलीं कि वक्फ बोर्डों के रिकॉर्ड सटीक नहीं हैं, जिससे सरकारी योजनाओं और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए निधि की उपलब्धता प्रभावित होती थी।

नई व्यवस्था से:

मंत्रालय के अनुसार पोर्टल पर संपत्ति की जियो-टैग्ड लोकेशन, फोटो, दस्तावेज़ और उपयोग के विवरण से किसी भी संपत्ति की स्थिति सत्यापित करना पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल हो गया है। इससे वक्फ बोर्डों के भीतर प्रशासनिक क्षमता का भी सुदृढ़ीकरण होगा।

केंद्रीयकृत डेटा बैंक बनने की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का कहना है कि पोर्टल पर तैयार हो रहा वक्फ संपत्तियों का राष्ट्रीय डेटा बैंक भविष्य की नीतियों के लिए आधार तैयार करेगा। यह डेटा बैंक न केवल राज्यों को सटीक जानकारी देगा बल्कि केंद्र सरकार को भी संसाधनों की योजना बनाने और मॉनिटरिंग करने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल कदम से आने वाले वर्षों में वक्फ बोर्डों की आय में भी सुधार होगा, क्योंकि पहले कई संपत्तियाँ अनुपयोगी पड़ी रहती थीं या अनधिकृत कब्जे में चली जाती थीं।

आगे क्या?

मंत्रालय ने संकेत दिया है कि पोर्टल के अगले चरण में—

जैसे फीचर्स भी शामिल किए जा सकते हैं। इससे वक्फ बोर्डों के कामकाज को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।

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