Makar Sankranti Magh Ekadashi SnanMakar Sankranti Magh Ekadashi Snan

Makar Sankranti Magh Ekadashi Snan

प्रयागराज/हरिद्वार:
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत झलक बुधवार तड़के उस वक्त देखने को मिली, जब मकर संक्रांति और माघ मास की एकादशी के दुर्लभ संयोग पर देशभर से आए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में पुण्य स्नान किया। कड़ाके की ठंड और कोहरे के बावजूद आस्था का ज्वार ऐसा उमड़ा कि प्रयागराज के संगम तट से लेकर हरिद्वार की हर की पौड़ी तक “हर-हर गंगे” और “जय गंगा मैया” के जयघोष गूंजते रहे। यह महासंयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से विशेष माना गया, बल्कि इसने एक बार फिर भारत की सामूहिक आस्था और परंपराओं की गहराई को रेखांकित किया।


प्रयागराज: संगम की रेती पर ‘लघु कुंभ’ जैसा दृश्य

Makar Sankranti Magh Ekadashi Snan उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले ने मकर संक्रांति और एकादशी के अवसर पर लघु कुंभ का स्वरूप धारण कर लिया। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सैलाब त्रिवेणी संगम की ओर बढ़ने लगा। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आस्था की ऐसी लहर दिखी कि संगम क्षेत्र के हर घाट पर तिल रखने की जगह नहीं बची।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास की एकादशी पर संगम में स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने इस दिन को अत्यंत फलदायी मानते हुए स्नान के बाद दान-पुण्य किया। संगम तट पर खिचड़ी, तिल, वस्त्र और अन्नदान का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा।


हरिद्वार: हर की पौड़ी पर आस्था का सैलाब

उधर, Makar Sankranti Magh Ekadashi Snan उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में भी नजारा कम भव्य नहीं था। गंगा की पहली लहर के साथ ही श्रद्धालुओं ने हर की पौड़ी स्थित ब्रह्मकुंड में स्नान शुरू कर दिया। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दिया।

स्थानीय पंडितों और तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन हर की पौड़ी पर किया गया स्नान विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इस बार माघ एकादशी का संयोग इसे और भी दुर्लभ बना रहा। घाटों पर भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार का वातावरण पूरे दिन बना रहा।


अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था: ड्रोन, एटीएस और जल पुलिस तैनात

Makar Sankranti Magh Ekadashi Snan पर भारी भीड़ और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया।

  • एटीएस की तैनाती: उत्तर प्रदेश एटीएस की मोबाइल गश्ती टीमें पूरे मेला क्षेत्र में लगातार निगरानी करती रहीं। संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
  • ड्रोन से निगरानी: हर सेक्टर और घाट पर ड्रोन कैमरों से नजर रखी गई। कंट्रोल रूम से भीड़ के दबाव और आवागमन की पल-पल की जानकारी ली जाती रही।
  • जल पुलिस और गोताखोर: गंगा के गहरे हिस्सों में जल पुलिस और प्रशिक्षित गोताखोर तैनात रहे, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

हरिद्वार में भी पुलिस, पीएसी और जल पुलिस की संयुक्त तैनाती की गई थी। सीसीटीवी और ड्रोन के जरिए पूरे घाट क्षेत्र की निगरानी की गई।


Makar Sankranti Magh Ekadashi Snan पर यातायात प्रबंधन और रेलवे की भूमिका

श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए प्रयागराज और हरिद्वार दोनों शहरों में यातायात के विशेष इंतजाम किए गए। भारी वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया और बाहरी क्षेत्रों में विशाल पार्किंग स्थल बनाए गए। प्रयागराज में रेलवे ने भी कई स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सहूलियत मिल सके।


मकर संक्रांति और माघ एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे देवताओं का दिन माना जाता है। वहीं माघ मास की एकादशी को पापों के शमन और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बताया गया है।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दिन किया गया Makar Sankranti Magh Ekadashi Snan न केवल शारीरिक शुद्धि करता है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान का भी माध्यम बनता है। यही कारण है कि देशभर से श्रद्धालु इस महासंयोग का साक्षी बनने प्रयागराज और हरिद्वार पहुंचे।


स्वास्थ्य सुविधाएं और प्रशासनिक सतर्कता

ठंड को देखते हुए घाटों पर अलाव की व्यवस्था की गई थी। मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल, एम्बुलेंस और मेडिकल टीमें 24 घंटे तैनात रहीं। एसएसपी माघ मेला ने बताया कि पूरे क्षेत्र को जोन और सेक्टर में बांटकर भीड़ प्रबंधन किया गया, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।


निष्कर्ष

मकर संक्रांति और माघ एकादशी का यह महास्नान भारतीय आस्था, परंपरा और सामूहिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया। प्रयागराज का संगम और हरिद्वार की हर की पौड़ी एक बार फिर यह साबित करती दिखीं कि आधुनिकता के इस दौर में भी भारत की आध्यात्मिक जड़ें कितनी मजबूत हैं। एक ओर श्रद्धालु भक्ति में लीन दिखे, तो दूसरी ओर प्रशासन की मुस्तैदी ने इस ऐतिहासिक Makar Sankranti Magh Ekadashi Snan को सुरक्षित और सफल बनाया।

By Bhaskar

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