इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। करीब तीन साल से जेल में बंद 73 वर्षीय इमरान खान को स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया है। तीन जजों की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल ले जाया जाए और वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनकी व्यापक मेडिकल जांच कराई जाए।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इमरान खान के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए। इसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ उनके निजी चिकित्सक डॉ. फैसल सुल्तान को भी शामिल किया जाना है। अदालत के निर्देश के मुताबिक इमरान खान को अगली सुनवाई तक अस्पताल में रखा जाएगा। अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होनी है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब इमरान खान के परिवार और उनकी पार्टी लंबे समय से उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते रहे हैं। उनके वकीलों ने जेल में रहते हुए उनकी सेहत बिगड़ने और खासकर दाहिनी आंख की दृष्टि को लेकर भी सवाल उठाए थे।
स्वास्थ्य को लेकर अदालत में उठे गंभीर सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इमरान खान की मेडिकल स्थिति को लेकर कई सवाल उठे। अदालत ने अधिकारियों से उनके पूरे मेडिकल रिकॉर्ड की मांग की। पीठ ने इस बात पर सवाल किया कि अदालत के सामने केवल मेडिकल रिपोर्ट का सारांश क्यों पेश किया गया, जबकि पूरे रिकॉर्ड की जरूरत है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अदालत के सामने रक्तचाप, दिल की धड़कन और आंख से जुड़ी समस्याओं सहित कई स्वास्थ्य चिंताओं का उल्लेख हुआ। इमरान खान के वकीलों और परिवार की ओर से लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि उनका इलाज ऐसे अस्पताल में कराया जाए जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों और उनके निजी चिकित्सकों को भी उनकी जांच और उपचार में भूमिका मिल सके।
इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। उनके वकीलों ने दावा किया था कि जेल में रहते हुए उनकी दाहिनी आंख की दृष्टि प्रभावित हुई। दूसरी ओर, जेल अधिकारियों की ओर से हाल में उनकी दृष्टि में सुधार का दावा भी किया गया था। इस विरोधाभास के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अब विस्तृत मेडिकल जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया है।
48 घंटे के भीतर अस्पताल ले जाने का निर्देश
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इमरान खान को अदियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें 48 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने अस्पताल में उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा गया है कि अस्पताल के बाहर कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसका सीधा मतलब है कि इमरान खान के अस्पताल पहुंचने के दौरान सुरक्षा के साथ-साथ आम मरीजों और अस्पताल की सामान्य व्यवस्था का भी ध्यान रखना होगा।
PTI ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी ने अपने समर्थकों से अस्पताल के बाहर भीड़ नहीं लगाने और इमरान खान के इलाज के लिए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील की है।
परिवार से मुलाकात पर भी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश
सुनवाई का एक अहम हिस्सा इमरान खान और उनके परिवार के बीच मुलाकातों से जुड़ा रहा। अदालत ने परिवार से मिलने के अधिकार और जेल में मुलाकातों पर लगी पाबंदियों को लेकर सवाल किए।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इमरान खान को सप्ताह में एक बार अपने परिवार से मिलने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा उनके बेटों से फोन पर संपर्क की व्यवस्था किए जाने का भी निर्देश दिया गया है। उनके परिवार और वकील लंबे समय से इस बात को लेकर चिंता जताते रहे हैं कि जेल में उनसे संपर्क करना आसान नहीं रहा है।
अदालत ने पिछले तीन वर्षों के दौरान इमरान खान से हुई मुलाकातों का रिकॉर्ड भी मांगा है। जेल अधिकारियों को यह बताने के लिए कहा गया है कि इस अवधि में कितनी मुलाकातें हुईं और संबंधित अदालतों के निर्देशों का पालन किस तरह किया गया।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। अदालत अब यह भी देख रही है कि एक लंबे समय से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री को परिवार, डॉक्टरों और कानूनी प्रतिनिधियों तक किस स्तर की पहुंच उपलब्ध रही है।
मेडिकल रिपोर्ट के राजनीतिक इस्तेमाल पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के इलाज और मेडिकल रिपोर्ट को राजनीतिक मुद्दा बनाने से बचने की भी बात कही। अदालत ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि मेडिकल जानकारी का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार या किसी अन्य उद्देश्य के लिए न हो।
अदालत ने PTI और परिवार से भी इस संबंध में आश्वासन मांगा। मेडिकल रिपोर्ट की गोपनीयता और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इमरान खान पाकिस्तान की राजनीति के सबसे प्रभावशाली और विवादित नेताओं में से एक बने हुए हैं।
अदालत ने साफ संकेत दिया कि उनका स्वास्थ्य सबसे पहले एक मानवीय और चिकित्सकीय मुद्दा है, जिसे राजनीतिक गतिविधि में बदलना उचित नहीं होगा।
निजी अस्पताल का खर्च कौन उठाएगा?
सुनवाई के दौरान इमरान खान को सरकारी अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल में इलाज कराने के अनुरोध पर भी सवाल हुआ। अदालत ने पूछा कि शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में होने वाले इलाज का खर्च कौन वहन करेगा।
इस पर इमरान खान की बहन से जुड़े वकील की ओर से कहा गया कि निजी अस्पताल में इलाज का खर्च परिवार की ओर से उठाया जाएगा। वहीं उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बाद में PTI को अस्पताल के खर्च से संबंधित जिम्मेदारी लेने का निर्देश दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इस पूरे मामले में अदालत ने इलाज की गुणवत्ता के साथ-साथ प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा है।
तीन साल से जेल में हैं इमरान खान
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। सत्ता से हटाए जाने के बाद उनके खिलाफ कई कानूनी मामले सामने आए। इनमें भ्रष्टाचार, सरकारी उपहार और विवाह से जुड़े मामले शामिल हैं। उनके खिलाफ 100 से अधिक कानूनी मामलों का उल्लेख भी किया गया है। इमरान खान और उनकी पार्टी कई मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं और आरोपों से इनकार करते हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, उनकी कई सजाएं निलंबित या पलटी जा चुकी हैं और कुछ मामलों में अपीलें लंबित हैं, जबकि कम से कम एक प्रमुख मामले में उनकी सजा अभी भी कानूनी चुनौती के अधीन है।
इमरान खान की गिरफ्तारी और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई ने पाकिस्तान की राजनीति को लंबे समय से प्रभावित किया है। PTI का कहना है कि उनके साथ राजनीतिक भेदभाव किया गया है, जबकि पाकिस्तान के अधिकारी इन आरोपों से अलग कानूनी प्रक्रिया की बात करते रहे हैं।
अब 16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश के बाद अब अगला बड़ा पड़ाव 16 सितंबर 2026 की सुनवाई होगी। तब तक इमरान खान की मेडिकल जांच, अस्पताल में इलाज, परिवार से मुलाकात और उनके स्वास्थ्य से जुड़े रिकॉर्ड अदालत के सामने महत्वपूर्ण रहेंगे।
अदालत ने मेडिकल बोर्ड के जरिए उनकी स्थिति का विस्तृत आकलन कराने का रास्ता साफ कर दिया है। इससे आने वाले समय में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इमरान खान को किन स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और उनके इलाज के लिए किस तरह की चिकित्सा निगरानी आवश्यक है।
फिलहाल पाकिस्तान की राजनीति में मंगलवार का सुप्रीम कोर्ट आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब तीन साल से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री को पहली बार अदालत के सीधे निर्देश पर निजी अस्पताल में व्यापक उपचार और जांच का अवसर मिला है। यह फैसला इमरान खान के लिए तत्काल राहत जरूर है, लेकिन उनके राजनीतिक और कानूनी भविष्य को लेकर तस्वीर अभी भी जटिल बनी हुई है।
अगली सुनवाई में मेडिकल रिकॉर्ड और बोर्ड की रिपोर्ट के साथ-साथ मुलाकातों तथा जेल प्रशासन से जुड़े पहलुओं पर भी अदालत की नजर रहेगी। ऐसे में इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान की राजनीति और न्यायिक घटनाक्रम दोनों के लिए महत्वपूर्ण बनी रह सकती है।

