उत्तराखंड: नैनीताल हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में अंतरिम राहत देते हुए प्रेम विवाह करने वाले युवक की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के बाद दिया, जिसमें युवक ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की थी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई, जहां कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई तक युवक को राहत प्रदान की। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता जांच में पूरा सहयोग करेगा।
क्या है पूरा मामला?
मामला हरिद्वार जिले के रानीपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक युवक और युवती ने आपसी सहमति से विवाह किया। याचिका के अनुसार, दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे और एक-दूसरे को पसंद करते थे।
युवक ने नैनीताल हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने 1 मार्च 2026 को रोशनाबाद स्थित एक शिव मंदिर में विधिवत विवाह किया। हालांकि, इस विवाह से युवती के पिता असंतुष्ट थे और उन्होंने इस संबंध में आपत्ति जताई।
युवती के पिता का आरोप: नाबालिग होने का दावा
युवती के पिता ने युवक के खिलाफ थाना रानीपुर में मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाह के समय उनकी बेटी नाबालिग थी और युवक ने उसे बहला-फुसलाकर शादी कर ली।
यह आरोप गंभीर कानूनी पहलुओं से जुड़ा हुआ है, क्योंकि यदि युवती नाबालिग पाई जाती है, तो मामला आपराधिक श्रेणी में आ सकता है।
युवक का पक्ष: दोनों थे बालिग
वहीं, याचिकाकर्ता युवक ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि विवाह के समय दोनों ही बालिग थे। उसने अपने पक्ष में दस्तावेज भी प्रस्तुत किए, जिनमें युवती की जन्मतिथि 4 फरवरी 2008 और अपनी जन्मतिथि 20 अक्टूबर 1995 बताई गई है।
युवक का कहना है कि दोनों ने अपनी इच्छा से विवाह किया और इस संबंध में किसी प्रकार का दबाव या धोखाधड़ी नहीं की गई।
कोर्ट में युवती का शपथ पत्र भी पेश
इस मामले में युवती की ओर से भी नैनीताल हाईकोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें उसने खुद को बालिग बताया और कहा कि उसने अपनी मर्जी से युवक से विवाह किया है।
यह शपथ पत्र इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह युवती की सहमति और उसकी उम्र से जुड़े विवाद को प्रभावित कर सकता है।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नैनीताल हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए युवक की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करेगा और किसी भी प्रकार से जांच प्रक्रिया में बाधा नहीं डालेगा।
साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार और युवती के पिता को नोटिस जारी करते हुए इस मामले में अपनी आपत्ति दाखिल करने को कहा है।
अगली सुनवाई 6 अप्रैल को
नैनीताल हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अप्रैल की तारीख तय की है। इस दौरान कोर्ट दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनेगा और यह तय करेगा कि दर्ज मुकदमे को निरस्त किया जाए या नहीं।
कानूनी और सामाजिक महत्व
यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। प्रेम विवाह और परिवार की सहमति के बीच टकराव अक्सर न्यायालय तक पहुंच जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अदालत का मुख्य फोकस यह होता है कि विवाह आपसी सहमति से हुआ है या नहीं और संबंधित पक्ष बालिग हैं या नहीं।
नैनीताल हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश फिलहाल युवक को बड़ी राहत देता है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक मामला पूरी तरह से समाप्त नहीं माना जा सकता।
अब सभी की नजरें 6 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां कोर्ट इस संवेदनशील मामले में आगे की दिशा तय करेगा।

