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केरल चुनाव 2026: IUML ने रचा इतिहास, UDF की सत्ता वापसी में मुस्लिम लीग बनी सबसे बड़ी ताकत

केरल विधानसभा चुनाव 2026

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तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज कर दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए दस वर्षों बाद सत्ता में वापसी की है, जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को करारी हार का सामना करना पड़ा।

हालांकि इस चुनाव की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कहानी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की रही, जिसने अपनी अब तक की सबसे बड़ी चुनावी सफलता दर्ज करते हुए राज्य की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया। पार्टी ने 27 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 22 सीटों पर जीत हासिल कर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया।

यह प्रदर्शन न सिर्फ IUML के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ चुनावी प्रदर्शन माना जा रहा है, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया कि केरल की गठबंधन राजनीति में मुस्लिम लीग की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।

UDF की सत्ता में वापसी, LDF को बड़ा झटका

140 सदस्यीय केरल विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान हुआ था, जबकि मतगणना 4 मई को पूरी हुई। नतीजों में कांग्रेस ने 63 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में वापसी की। वहीं सत्तारूढ़ CPM महज 26 सीटों तक सिमट गई और उसकी सहयोगी CPI को केवल 8 सीटें मिलीं।

राजनीतिक तौर पर यह परिणाम बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि 1977 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब भारत के किसी भी राज्य में वामपंथी दल सत्ता में नहीं बचे हैं। केरल लंबे समय तक वामपंथी राजनीति का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस चुनाव में जनता ने सत्ता परिवर्तन का स्पष्ट संदेश दिया।

विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई, बेरोजगारी, प्रशासनिक विवाद और स्थानीय स्तर पर बढ़ती नाराजगी LDF सरकार के खिलाफ बड़ा कारण बनी।

IUML क्यों बनी चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा?

केरल की राजनीति में कांग्रेस और CPM के बाद अगर किसी पार्टी का सबसे ज्यादा प्रभाव माना जाता है तो वह इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग है। दशकों से यह पार्टी UDF गठबंधन का मजबूत स्तंभ रही है और सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभाती आई है।

लेकिन इस बार पार्टी ने जो प्रदर्शन किया, उसने उसे केवल सहयोगी दल नहीं बल्कि “किंगमेकर” की स्थिति में पहुंचा दिया।

IUML का प्रभाव पारंपरिक रूप से मालाबार क्षेत्र, खासकर मलप्पुरम जिले में माना जाता रहा है, लेकिन 2026 चुनाव में पार्टी ने अपने पारंपरिक गढ़ से बाहर भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक पार्टी ने पहली बार राज्य के सभी 14 जिलों में संगठनात्मक और चुनावी उपस्थिति दर्ज कराई।

पिछले वर्ष 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में भी IUML ने रिकॉर्ड सफलता हासिल की थी। उस चुनाव में पार्टी ने 3200 से अधिक सीटें जीतकर संकेत दे दिया था कि वह विधानसभा चुनाव में बड़ी ताकत बनकर उभर सकती है।

महिला उम्मीदवार की ऐतिहासिक जीत

इस चुनाव की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि यह रही कि पहली बार IUML की किसी महिला उम्मीदवार ने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की।

पार्टी ने पहली बार दो महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था। इनमें एडवोकेट फातिमा तहलिया ने शानदार जीत हासिल की, जबकि दूसरी उम्मीदवार जयंती राजन को हार का सामना करना पड़ा।

फातिमा तहलिया की जीत को केवल चुनावी सफलता नहीं बल्कि IUML के भीतर बदलती राजनीतिक सोच और महिला प्रतिनिधित्व की दिशा में बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय तक पार्टी पर महिला भागीदारी को लेकर सवाल उठते रहे थे, लेकिन इस चुनाव ने उस छवि को बदलने का संकेत दिया है।

2011 का रिकॉर्ड टूटा

IUML का इससे पहले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2011 विधानसभा चुनाव में रहा था, जब पार्टी ने 20 सीटें जीती थीं। लेकिन 2026 में 22 सीटों की जीत के साथ उसने अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।

दिलचस्प बात यह भी है कि पार्टी ने तमिलनाडु की अपनी दो पारंपरिक सीटों को भी बरकरार रखा है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पार्टी केवल केरल तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि दक्षिण भारत में अपना व्यापक प्रभाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

आज़ादी से पहले की राजनीति से जुड़ी हैं जड़ें

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की स्थापना 10 मार्च 1948 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुई थी। हालांकि इसकी वैचारिक जड़ें ब्रिटिश भारत की ऑल इंडिया मुस्लिम लीग से जुड़ी मानी जाती हैं, जिसने पाकिस्तान निर्माण के दौरान अहम भूमिका निभाई थी।

भारत विभाजन के बाद भारतीय लोकतंत्र के भीतर काम करने के उद्देश्य से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का गठन किया गया। उस समय केरल अलग राज्य नहीं था और त्रावणकोर, मालाबार तथा कोचीन क्षेत्र मद्रास प्रेसिडेंसी का हिस्सा थे।

समय के साथ पार्टी ने खुद को केरल की सामाजिक और राजनीतिक संरचना में गहराई से स्थापित कर लिया। आज यह राज्य की सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय पार्टियों में गिनी जाती है।

गठबंधन राजनीति में बढ़ेगा IUML का दबदबा

केरल विधानसभा चुनाव 2026 परिणामों के बाद अब माना जा रहा है कि नई सरकार में IUML की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। मंत्रालयों के बंटवारे से लेकर नीति निर्माण तक पार्टी की भागीदारी बढ़ सकती है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस के लिए भी IUML अब केवल सहयोगी दल नहीं बल्कि सत्ता संतुलन का अहम केंद्र बन चुकी है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि IUML अपनी इस ऐतिहासिक सफलता को राज्य की राजनीति में किस तरह दीर्घकालिक प्रभाव में बदलती है। फिलहाल इतना तय है कि केरल चुनाव 2026 ने मुस्लिम लीग को नई राजनीतिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया है और राज्य की राजनीति का समीकरण पूरी तरह बदल दिया है।

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