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कर्णप्रयाग निहंग विवाद पर प्रशासन सख्त: धारा 163 लागू, हाई लेवल जांच के आदेश; सरकार बोली- सांप्रदायिक रंग देने वालों पर होगी कार्रवाई

Karnaprayag Nihang Sikh Controversy

रुद्रप्रयाग/चमोली/ Karnaprayag Nihang Sikh Controversy। उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में निहंग सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों के बीच उपजे विवाद ने राज्य प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दिनों सामने आए घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए चमोली प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है, जो 27 जून तक प्रभावी रहेगी।

हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान सामने आए इस विवाद ने स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। हालांकि राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मामले को धार्मिक या सांप्रदायिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला दो पक्षों के बीच भावनात्मक प्रतिक्रिया और आपसी मतभेदों से जुड़ा प्रतीत हो रहा है।

गुरुद्वारे की छत पर चढ़ने और शस्त्र प्रदर्शन के आरोप

घटनाक्रम के अनुसार कुछ निहंग श्रद्धालुओं पर नगरासू स्थित गुरुद्वारे की छत पर चढ़ने तथा पारंपरिक शस्त्रों का प्रदर्शन करने के आरोप लगाए गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने के लिए मोर्चा संभाला।

सुरक्षा बलों ने स्थिति को संवेदनशील मानते हुए श्रद्धालुओं से संवाद स्थापित किया और उन्हें शांतिपूर्वक नीचे उतरने के लिए समझाया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई के चलते स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया और किसी प्रकार की बड़ी अप्रिय घटना नहीं होने दी गई।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि छत पर मौजूद निहंग श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में थे और उनके पास धार्मिक परंपराओं से जुड़े शस्त्र मौजूद थे। इस बीच कुछ लोगों ने गुरुद्वारे में एक श्रद्धालु को कथित रूप से बंदी बनाए जाने का आरोप भी लगाया है, जबकि सेवादार को छोड़ने की बात सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच का विषय बनी हुई है।

विभिन्न संगठनों के कूच आह्वान के बाद बढ़ी प्रशासन की चिंता

16 जून 2026 को हुए विवाद के बाद कई संगठनों द्वारा कर्णप्रयाग कूच का आह्वान किए जाने की खबरों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी। इसी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन धारा 163 लागू करने का निर्णय लिया।

अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह एहतियाती है और इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति एवं सामान्य स्थिति बनाए रखना है। प्रशासन का दावा है कि वर्तमान में हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं तथा किसी प्रकार की हिंसा, तोड़फोड़ या जनहानि की सूचना नहीं है।

कर्णप्रयाग, नगरासू गुरुद्वारा और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है तथा खुफिया एजेंसियां भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

सरकार का स्पष्ट संदेश- धार्मिक विवाद न बनाया जाए

उत्तराखंड सरकार ने इस पूरे मामले को लेकर बेहद संतुलित और स्पष्ट रुख अपनाया है। गृह सचिव शैलेश बगौली ने कहा कि शुरुआती जांच से यह किसी धार्मिक विवाद की बजाय दो पक्षों के बीच उत्पन्न मतभेदों और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का मामला प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सदियों से धार्मिक सहिष्णुता, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक रहा है। राज्य में सभी धर्मों और समुदायों को समान सम्मान दिया जाता है और सरकार किसी भी कीमत पर इस माहौल को बिगड़ने नहीं देगी।

गृह सचिव ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG Law & Order) को भी पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

दोनों पक्षों को सुनकर होगी कार्रवाई

सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध तथ्यों का गहन परीक्षण किया जाएगा। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।

शैलेश बगौली ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ कार्रवाई केवल तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर भड़काऊ या अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचें।

हेमकुंड साहिब यात्रा पर नहीं पड़ेगा असर

प्रशासनिक अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि इस घटनाक्रम का हेमकुंड साहिब यात्रा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत कर दी गई है और श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे धार्मिक समुदाय या यात्रा से जुड़े श्रद्धालुओं के बारे में गलत धारणा बनाना उचित नहीं होगा। सरकार ने कहा कि लाखों श्रद्धालु हर वर्ष उत्तराखंड आते हैं और अधिकांश यात्राएं पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न होती हैं।

सौहार्द बनाए रखने की अपील

कर्णप्रयाग में उत्पन्न इस Karnaprayag Nihang Sikh Controversy को लेकर प्रशासन, पुलिस और राज्य सरकार लगातार लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड की पहचान उसकी धार्मिक आस्था, अतिथि सत्कार और सामाजिक सद्भाव से है, जिसे किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही विवाद के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार पक्षों की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। तब तक सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना है।

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