पिथौरागढ़: विश्व प्रसिद्ध और आस्था के सबसे कठिन धार्मिक मार्गों में गिनी जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। गुरुवार, 30 अप्रैल से इस पवित्र यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी गई है। इच्छुक श्रद्धालु 19 मई तक आवेदन कर सकते हैं।
इस वर्ष भी यात्रा उत्तराखण्ड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथुला मार्ग से संचालित की जाएगी। दोनों मार्गों से कुल 10-10 दलों में लगभग 500-500 यात्रियों को भेजने की योजना बनाई गई है। प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने का काम तेजी से जारी है।
लिपुलेख और नाथुला मार्ग से होगी यात्रा
इस बार यात्रा का संचालन दो प्रमुख मार्गों से किया जाएगा—उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्र में स्थित लिपुलेख दर्रा और सिक्किम का नाथुला दर्रा।
पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख मार्ग से यात्रा संचालन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में विदेश मंत्रालय, कुमाऊं मंडल विकास निगम और भारत तिब्बत सीमा पुलिस के बीच समन्वय स्थापित किया गया, जिसमें यात्रा की तैयारियों और संचालन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू, ऐसे करें आवेदन
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। श्रद्धालुओं को विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://kmy.gov.in पर जाकर पंजीकरण करना होगा।
आवेदन प्रक्रिया के तहत:
- नया अकाउंट बनाना अनिवार्य है
- व्यक्तिगत जानकारी और पासपोर्ट विवरण भरना होगा
- पासपोर्ट की स्कैन कॉपी, फोटो और अन्य दस्तावेज अपलोड करने होंगे
- आवेदन सबमिट होने के बाद प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवेदन की अंतिम तिथि 19 मई निर्धारित की गई है, इसलिए इच्छुक यात्री समय रहते आवेदन सुनिश्चित करें।
कंप्यूटरीकृत ड्रॉ से होगा चयन
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। आवेदन के बाद सभी आवेदनों की जांच की जाती है और फिर कंप्यूटरीकृत ड्रॉ के माध्यम से यात्रियों का चयन होता है।
इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का मैनुअल हस्तक्षेप नहीं होता, जिससे चयन निष्पक्ष और पारदर्शी बना रहता है। चयनित यात्रियों को SMS और ईमेल के माध्यम से सूचना दी जाती है।
मेडिकल जांच के बाद ही मिलेगा अंतिम अनुमति
लॉटरी में चयनित यात्रियों को दिल्ली में मेडिकल परीक्षण से गुजरना अनिवार्य होता है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा स्वास्थ्य जांच की जाती है।
केवल पूरी तरह फिट पाए जाने वाले यात्रियों को ही आगे यात्रा के लिए अनुमति दी जाती है। इसके साथ ही निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद ही यात्रा का अंतिम कन्फर्मेशन मिलता है।
जून के पहले सप्ताह से शुरू होगी यात्रा
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई के अनुसार यात्रा जून के पहले सप्ताह से प्रारंभ होगी।
उन्होंने बताया कि लिपुलेख मार्ग से कुल 10 दल भेजे जाएंगे और प्रत्येक दल में लगभग 50 यात्री शामिल होंगे। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं और जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
KMVN करेगा यात्रा संचालन, सुरक्षा में ITBP की अहम भूमिका
उत्तराखण्ड के लिपुलेख मार्ग से होने वाली यात्रा का संचालन कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा किया जाता है।
वर्ष 1981 से KMVN इस यात्रा का संचालन कर रहा है, जिसमें यात्रियों के ठहरने, भोजन और आवागमन की पूरी व्यवस्था शामिल होती है। वहीं भारत तिब्बत सीमा पुलिस यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
बदला यात्रा मार्ग, अब अधिक आसान हुई यात्रा
पिछले कुछ वर्षों में कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले यह यात्रा हल्द्वानी और अल्मोड़ा से होकर गुजरती थी, लेकिन अब इसे टनकपुर-चंपावत होते हुए संचालित किया जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत यात्रा दिल्ली से शुरू होकर टनकपुर, चंपावत, पिथौरागढ़ और धारचूला होते हुए आगे बढ़ती है। धारचूला में रात्रि विश्राम के बाद यात्री वाहन से गुंजी पहुंचते हैं, जहां स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है।
पैदल यात्रा में आई कमी, सुविधाएं हुई बेहतर
वर्ष 2019 से पहले यात्रियों को लगभग 60 किलोमीटर तक कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बार यात्रियों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
अब लिपुलेख तक सड़क बनने के बाद अधिकांश पैदल मार्ग समाप्त हो चुके हैं। वर्तमान में केवल चीन सीमा के पास लगभग 400-400 मीटर की दूरी ही पैदल तय करनी होती है। इससे यात्रा पहले की तुलना में काफी सुगम और सुरक्षित हो गई है।
ओम पर्वत और मानसरोवर के दर्शन का आध्यात्मिक महत्व
यात्रा के दौरान गुंजी से आगे नाभीढांग में श्रद्धालुओं को पवित्र ओम पर्वत के दर्शन होते हैं। इसके बाद लिपुलेख दर्रा पार कर यात्री चीन में प्रवेश करते हैं और तकलाकोट व दार्चिन होते हुए मानसरोवर पहुंचते हैं।
कैलाश मानसरोवर को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है और यह हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है।
1962 के बाद बदली यात्रा व्यवस्था
वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले इस यात्रा पर कोई विशेष प्रतिबंध नहीं था। लेकिन युद्ध के बाद इसे बंद कर दिया गया। बाद में विदेश मंत्रालय के सहयोग से यात्रा को पुनः शुरू किया गया और पासपोर्ट अनिवार्य कर दिया गया।
आदि कैलाश यात्रा भी 1 मई से शुरू
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के साथ ही पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा भी 1 मई से शुरू होने जा रही है।
अब तक लगभग 160 श्रद्धालुओं ने इनर लाइन परमिट (ILP) के लिए आवेदन किया है, जिनमें से 80 परमिट जारी किए जा चुके हैं।
धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी के अनुसार परमिट जारी करने की प्रक्रिया लगातार जारी है और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
प्रशासन ने दिए आवश्यक निर्देश
जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
आस्था और आधुनिक व्यवस्थाओं का संगम
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि आधुनिक तकनीक और बेहतर व्यवस्थाओं के चलते अब पहले से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक भी हो गई है।
उत्तराखण्ड प्रशासन, केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से यह यात्रा हर वर्ष नए मानक स्थापित कर रही है। ऐसे में इस वर्ष भी हजारों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनकर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करेंगे।

