नैनीताल (उत्तराखंड): उत्तराखंड के विकास ऊंचाई देने वाली जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध नजर आ रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जनपद भ्रमण के दौरान गोला नदी पर निर्माणाधीन जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने परियोजना स्थल पर पहुंचकर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों व तकनीकी विशेषज्ञों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा किया जाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल एक बांध नहीं, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दशकों से लंबित क्षेत्रवासियों की मांग को स्वीकृति देकर प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
पर्यावरणीय व तकनीकी बाधाओं का हुआ समाधान
मुख्यमंत्री ने बताया कि जमरानी बांध परियोजना को आगे बढ़ाने में पर्यावरणीय और तकनीकी स्तर पर कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच निरंतर संवाद और सकारात्मक दृष्टिकोण के चलते सभी बाधाओं का समाधान संभव हो सका। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि विकास कार्य पर्यावरण संतुलन के साथ आगे बढ़ें।
कागजों से जमीन तक योजनाओं को उतारने की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार योजनाओं को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने में विश्वास रखती है। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों में विश्वास करती है। जनहित से जुड़े किसी भी विकास कार्य में धनराशि या संसाधनों की कमी को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।
सिंचाई और पेयजल के क्षेत्र में मील का पत्थर
जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना के पूर्ण होने के बाद कुमाऊं क्षेत्र के तराई इलाकों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति की तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोला नदी पर बनने वाला यह बांध किसानों के लिए वरदान साबित होगा और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को स्थायी समाधान प्रदान करेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस परियोजना का लाभ केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के किसानों और क्षेत्रवासियों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
रोजगार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जमरानी बांध परियोजना राज्य में रोजगार सृजन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। निर्माण कार्यों के दौरान स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं भविष्य में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थायी रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने संकेत दिए कि परियोजना से विद्युत उत्पादन की संभावनाओं पर भी केंद्र सरकार से चर्चा की जाएगी।
परियोजना की प्रगति: जून 2029 तक लक्ष्य
जमरानी बांध परियोजना के महाप्रबंधक महेश खरे ने जानकारी दी कि परियोजना के अंतर्गत बनाई जा रही दो टनलों का कार्य लगभग 88 प्रतिशत पूरा हो चुका है। नदी के जल प्रवाह को डायवर्ट करने के लिए कॉफर डैम का निर्माण भी तेजी से प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक टनल और कृत्रिम डैम का कार्य पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद मानसून के दौरान नदी का जल टनलों के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा।
इसके पश्चात स्थायी बांध के निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। परियोजना का संपूर्ण कार्य जून 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति, विकास को मिला समर्थन
इस अवसर पर कालाढुंगी विधायक बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दर्मवाल, दर्जा राज्यमंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू सहित कई जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने परियोजना को क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम
कुल मिलाकर, जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना उत्तराखंड की विकास यात्रा में एक निर्णायक मोड़ साबित होती दिख रही है। सिंचाई, पेयजल, रोजगार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास के बहुआयामी लाभों के साथ यह परियोजना राज्य को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

