हैदराबाद में हाई-प्रोफाइल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़हैदराबाद में हाई-प्रोफाइल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़

हैदराबाद में हाई-प्रोफाइल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़

हैदराबाद | ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में हाई-प्रोफाइल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ में पुलिस ने एक संगठित और हाई-प्रोफाइल ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह की सबसे चौंकाने वाली कड़ी यह है कि इसमें एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में कार्यरत महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और आधुनिक डिजिटल टूल्स के सहारे शहर में नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहा था।

यह संयुक्त कार्रवाई Hyderabad Narcotics Enforcement Wing (H-NEW) और चिक्कडपल्ली पुलिस द्वारा अंजाम दी गई, जिसमें ड्रग्स, नकदी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ बरामद हुए हैं। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब ₹3.1 लाख बताई जा रही है।


हैदराबाद में हाई-प्रोफाइल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ में कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

पुलिस ने चारों आरोपियों की पहचान सार्वजनिक करते हुए उनकी भूमिकाएं भी स्पष्ट की हैं—

  1. उम्मिडी इम्मानुएल (25) – पेशे से इवेंट मैनेजर, इस पूरे गिरोह का कथित मुख्य मास्टरमाइंड
  2. चोडावरापु सुष्मिता देवी उर्फ ‘लिली’ (21) – एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जो ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन, फंड मैनेजमेंट और ड्रग वितरण के संचालन में सक्रिय थी।
  3. जी. साई कुमार (28)डिलीवरी राइडर, जो हैदराबाद के विभिन्न इलाकों में नशीले पदार्थों की आपूर्ति करता था।
  4. तालाबत्तुला तारका लक्ष्मीकांत अयप्पा (24) – ड्रग यूज़र, जिसे पूछताछ और नेटवर्क कनेक्शन की जांच के लिए हिरासत में लिया गया।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह सोशल प्रोफाइल और निजी नेटवर्क के जरिये ग्राहकों तक पहुंच बनाता था और बेहद गोपनीय तरीके से डिलीवरी करता था।


छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?

संयुक्त छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में अलग-अलग किस्म के नशीले पदार्थ मिले—

  • 22 ग्राम OG (हाइड्रोपोनिक गांजा)
  • 5 ग्राम MDMA
  • 6 LSD ब्लॉट्स
  • 5.5 ग्राम एक्स्टेसी
  • ₹50,000 नकद
  • चार मोबाइल फोन

इन मोबाइल फोनों में संदिग्ध चैट्स, भुगतान विवरण और डार्क वेब से जुड़े तकनीकी सबूत मिलने की बात पुलिस ने कही है।


डार्क वेब और क्रिप्टो से चलता था पूरा खेल

हैदराबाद में हाई-प्रोफाइल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ जांच में सामने आया है कि इम्मानुएल ड्रग्स की सप्लाई के लिए डार्क वेब का सहारा लेता था। पहचान छुपाने के लिए Tor ब्राउज़र जैसे एन्क्रिप्टेड टूल्स का इस्तेमाल किया जाता था। भुगतान को ट्रेस होने से बचाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स के माध्यम से लेनदेन होता था।

सुष्मिता देवी इस नेटवर्क की डिजिटल रीढ़ मानी जा रही है। वह ऑनलाइन पेमेंट्स, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और फंड मैनेजमेंट संभालती थी। पुलिस का कहना है कि इम्मानुएल की अनुपस्थिति में सुष्मिता ही ड्रग वितरण के संचालन को मैनेज करती थी। वहीं, साई कुमार स्थानीय स्तर पर तेज़ी से डिलीवरी सुनिश्चित करता था।


आईटी प्रोफेशनल की भूमिका ने बढ़ाई चिंता

एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर की इस रैकेट में संलिप्तता ने पुलिस और समाज—दोनों को चौंका दिया है। अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी ज्ञान के कारण ही गिरोह डिजिटल ट्रेस से बचने में सफल रहा। यह मामला इस ओर भी इशारा करता है कि कैसे पढ़े-लिखे युवा भी आसान पैसों के लालच में अपराध के दलदल में फंसते जा रहे हैं।


NDPS एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई

हैदराबाद में हाई-प्रोफाइल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ के चारों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस रिमांड के दौरान उनसे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, स्थानीय सप्लायर्स और संभावित अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन के बारे में पूछताछ की जा रही है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह नेटवर्क केवल हैदराबाद तक सीमित नहीं हो सकता। डिजिटल सबूतों के आधार पर अन्य शहरों में फैले लिंक भी सामने आ सकते हैं।


पुलिस का संदेश: ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’

हैदराबाद पुलिस ने साफ किया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। स्कूल-कॉलेजों और आईटी कॉरिडोर में बढ़ते ड्रग ट्रेंड को देखते हुए आने वाले दिनों में निगरानी और सख्त की जाएगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।


By Bhaskar

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