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हरिद्वार में किन्नरों के कार्यक्षेत्र विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, भगवानपुर पुलिस को सुरक्षा देने के निर्देश

हरिद्वार किन्नर कार्यक्षेत्र विवाद

Haridwar Kinnar Dispute

नैनीताल/हरिद्वार/ हरिद्वार किन्नर कार्यक्षेत्र विवाद: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के भगवानपुर क्षेत्र में किन्नर समुदाय के दो पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहे कार्यक्षेत्र विवाद को गंभीरता से लेते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने याचिकाकर्ता पक्ष की सुरक्षा संबंधी मांग पर सुनवाई करते हुए भगवानपुर थाना प्रभारी (एसएचओ) को निर्देश दिया है कि संबंधित पक्ष को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें किसी प्रकार की शारीरिक या आर्थिक क्षति न पहुंचे। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।

कार्यक्षेत्र को लेकर बढ़ा विवाद, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

मामला किन्नर सपना और अन्य याचिकाकर्ताओं से जुड़ा है, जिन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सुरक्षा की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया कि विपक्षी पक्ष के सदस्य अंजली कुमार, मोना किन्नर, कैनात किन्नर, सोनम किन्नर और सादाब से उन्हें जान-माल का खतरा है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच पहले से कार्य करने के क्षेत्रों का स्पष्ट बंटवारा किया गया था। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष अब उनके क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहा है और उन क्षेत्रों पर अपना अधिकार जताते हुए कार्य करने से रोक रहा है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जिससे तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है।

कोर्ट ने सुरक्षा को माना प्राथमिकता का विषय

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि मौजूदा हालात में उनके साथ किसी भी समय अप्रिय घटना घट सकती है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि विपक्षी पक्ष को पूर्व में न्यायालय से सुरक्षा प्राप्त हो चुकी है। इसी आधार पर उन्होंने भी समान सुरक्षा व्यवस्था की मांग की। अदालत ने इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

विपक्षी पक्ष ने आरोपों को किया खारिज

वहीं दूसरी ओर विपक्षी पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके द्वारा याचिकाकर्ताओं को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्षेत्र को लेकर पहले जो समझौता हुआ था, उसका पालन किया जा रहा है और वे याचिकाकर्ताओं के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।

विपक्षी पक्ष ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और वास्तविक स्थिति इससे अलग है। हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों के दावों को रिकॉर्ड पर लेते हुए फिलहाल सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

भगवानपुर पुलिस को दिए गए स्पष्ट निर्देश

हाईकोर्ट ने भगवानपुर थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि यदि विपक्षी पक्ष को इस संबंध में कोई आपत्ति हो तो उसे भी विधिवत दर्ज किया जाए।

न्यायालय का यह आदेश कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित टकराव को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

किन्नर समुदाय के भीतर विवादों पर फिर उठे सवाल

यह मामला एक बार फिर किन्नर समुदाय के भीतर कार्यक्षेत्र और पारंपरिक अधिकारों को लेकर होने वाले विवादों को चर्चा में ले आया है। कई क्षेत्रों में समुदाय के विभिन्न समूहों के बीच कार्यक्षेत्र को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं, जिनका असर सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर भी देखने को मिलता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवादों का समाधान संवाद, सामुदायिक सहमति और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है। न्यायालय का हस्तक्षेप फिलहाल दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

27 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। अब सभी की निगाहें 27 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय ले सकती है।

हरिद्वार किन्नर कार्यक्षेत्र विवाद से जुड़ा यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि समुदाय के भीतर अधिकारों और क्षेत्रीय व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील पहलुओं को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में अदालत की अगली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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