हल्द्वानी। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हल्द्वानी दौरे के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया। चुनावी माहौल की आहट के बीच उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हर चुनाव से पहले ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ जैसे मुद्दों को हवा देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती है। हरीश रावत ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को इस मुद्दे को “ताबीज” बनाकर गले में डाल लेना चाहिए, क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में भी इसी तरह के भावनात्मक मुद्दों के सहारे पार्टी सत्ता में आई थी।
हल्द्वानी पहुंचने पर विधायक सुमित हृदयेश और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में रावत ने भाजपा सरकार की नीतियों, देहरादून में जमीन आवंटन से जुड़े विवाद और प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर खुलकर प्रतिक्रिया दी।
‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ मुद्दा बना चुनावी हथियार
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि जब-जब चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा ऐसे मुद्दों को उछालने लगती है जिनका सीधा संबंध भावनाओं से होता है। उन्होंने कहा, “भाजपा हर बार मुस्लिम यूनिवर्सिटी का शोर मचाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश करती है। अगर यह इतना ही प्रभावी मुद्दा है तो इसे ताबीज की तरह गले में डाल लें, क्योंकि इसी के सहारे वे पिछली बार सत्ता में आए थे।”
रावत का इशारा उन आरोपों की ओर था जिनमें विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा को विकास और रोजगार जैसे ठोस मुद्दों पर बात करनी चाहिए, न कि समाज को बांटने वाले विषयों पर।
उन्होंने आगे कहा कि देहरादून में जिस भूमि को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वहां प्लॉट खरीदने वाले अधिकांश लोग हिंदू समुदाय से हैं। “अगर किसी सरकार ने जमीन आवंटित की है तो वह नियमानुसार ही किया गया होगा। इसे सांप्रदायिक रंग देना अनुचित है,” रावत ने कहा।
देहरादून जमीन आवंटन विवाद पर सफाई
देहरादून में जमीन आवंटन से जुड़े आरोपों पर रावत ने कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी भूमि आवंटन की प्रक्रिया शासन के तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत होती है।
उन्होंने कहा, “यदि किसी को किसी प्रकार की आपत्ति है तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की मांग कर सकता है, लेकिन बिना तथ्यों के आरोप लगाना केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।”
रावत ने यह भी कहा कि भाजपा विपक्ष को बदनाम करने के लिए ऐसे मुद्दों को उछाल रही है, जबकि राज्य के सामने बेरोजगारी, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे गंभीर प्रश्न खड़े हैं।
कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजधानी देहरादून सहित कई जिलों में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
“राजधानी में आए दिन हत्याएं हो रही हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। लोग भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं,” उन्होंने कहा। रावत ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी से भटक गया है और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की पहचान उसकी कानून व्यवस्था से होती है। यदि राजधानी में ही लोग असुरक्षित महसूस करें तो यह शासन-प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है।
भाजपा पर राजनीतिक ध्रुवीकरण का आरोप
हरीश रावत ने भाजपा पर राजनीतिक ध्रुवीकरण की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनावी लाभ के लिए समाज को बांटने की कोशिश लोकतंत्र के लिए ठीक संकेत नहीं है।
उन्होंने कहा, “प्रदेश की जनता अब समझदार हो चुकी है। वह विकास, रोजगार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग कर रही है। केवल भावनात्मक मुद्दों से अब जनता को लंबे समय तक भ्रमित नहीं किया जा सकता।”
रावत ने दावा किया कि आने वाले चुनाव में जनता सरकार के कामकाज का आकलन करेगी और वास्तविक मुद्दों पर मतदान करेगी।
कांग्रेस की रणनीति पर संकेत
हालांकि हरीश रावत ने सीधे तौर पर चुनावी रणनीति का खुलासा नहीं किया, लेकिन उनके बयान से यह संकेत मिला कि कांग्रेस आगामी चुनाव में विकास और जनहित के मुद्दों को केंद्र में रखेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी जमीनी स्तर पर जनता से संवाद बढ़ा रही है और प्रदेश के हर वर्ग की समस्याओं को सुन रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य प्रदेश में पारदर्शी और जवाबदेह शासन स्थापित करना है।
राजनीतिक तापमान में बढ़ोतरी
हरीश रावत का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो रही हैं। आगामी चुनाव को लेकर सभी दल अपने-अपने मुद्दों को धार देने में जुटे हैं। भाजपा जहां अपनी उपलब्धियों को गिनाने में लगी है, वहीं कांग्रेस सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही।
हल्द्वानी में दिए गए रावत के बयान से साफ है कि चुनावी मुकाबला अब मुद्दों और आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श में कितनी जगह बना पाते हैं और जनता का रुख किस दिशा में जाता है।
फिलहाल, हल्द्वानी दौरे के जरिए हरीश रावत ने यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस भाजपा के हर राजनीतिक हमले का जवाब देने के लिए तैयार है और चुनावी मैदान में मुद्दों की लड़ाई तेज होने वाली है।

