यह वह रात थी जब हार्दिक पांड्या ने दिखा दिया कि मैदान पर उनकी उपस्थिति टीम के लिए क्या मायने रखती है। जब वह पूरी तरह से फिट होते हैं और लय में होते हैं, तो वह उस टीम में भी सबसे मूल्यवान खिलाड़ी (Most Valuable Player) हो सकते हैं जिसमें अभिषेक शर्मा, जसप्रीत बुमराह, सूर्यकुमार यादव, वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव जैसे एक्स-फैक्टर खिलाड़ी मौजूद हैं।
कटक की एक ठंडी, सर्द रात में, जब उनके साथी खिलाड़ी दो-तरफा (two-paced) पिच पर संघर्ष करते दिखे, हार्दिक ने 210.71 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। उनकी 28 गेंदों पर खेली गई नाबाद 59 रनों की पारी निर्णायक साबित हुई, जिसने लड़खड़ाती हुई भारतीय पारी को 175/6 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया। अंततः, गेंदबाजों ने इस स्कोर का सफलतापूर्वक बचाव किया और भारत को सीरीज में शुरुआती बढ़त दिला दी।
एशिया कप के बाद वापसी: इरादा पहले ही दिखा
एशिया कप अभियान के बीच में सितंबर में चोट लगने के बाद टीम में लौटे पांड्या का इरादा शुरू से ही स्पष्ट था। मैच की पूर्व संध्या पर अभ्यास सत्र चूकने के बावजूद, मंगलवार को मैदान में उतरते ही उनका ध्यान पूरी तरह खेल पर केंद्रित था:
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पिच का निरीक्षण: मैदान में प्रवेश करते ही वह तुरंत पिच का मुआयना करने गए।
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ट्रेनर के साथ ड्रिल: इसके बाद, वह बाराबती स्टेडियम के एक कोने में चले गए, जहाँ उन्होंने ट्रेनर एड्रियन ले रॉक्स के साथ कुछ अभ्यास किया, जिसमें उनका मुख्य ध्यान हाथों को फ्री करने (freeing his arms) पर था।
यह दर्शाता है कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह तैयार थे।
‘फिनिशर’ की भूमिका में ब्रूटल पावर
भारतीय टीम में बल्लेबाजी क्रम लचीला है, लेकिन जब बात गेम फिनिश करने की आती है, तो टीम प्रबंधन पूरी तरह से हार्दिक पांड्या पर निर्भर करता है। यह निर्भरता उनकी क्रूर शक्ति (brutal power) के कारण है, जिसके दम पर वह किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस करने की क्षमता रखते हैं।
कटक में, उन्होंने उस भूमिका को बखूबी निभाया, न केवल टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जब वह फॉर्म में होते हैं, तो वह अकेले दम पर मैच का रुख पलट सकते हैं। यह जीत टीम इंडिया के लिए अच्छी शुरुआत है और हार्दिक की फिटनेस और फॉर्म एक बड़ा सकारात्मक संकेत है।
