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हल्द्वानी EVCL धोखाधड़ी मामला: हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी जांच रिपोर्ट

हल्द्वानी EVCL धोखाधड़ी मामला

File Photo

नैनीताल/हल्द्वानी: उत्तराखंड में चर्चित हल्द्वानी EVCL धोखाधड़ी मामला (एपिक विक्ट्री क्रिकेट लीग) के नाम पर हुई कथित धोखाधड़ी के मामले ने अब न्यायिक स्तर पर गंभीर मोड़ ले लिया है। मुख्य आरोपी विकास ढाका की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 17 अप्रैल तक मामले की अद्यतन स्थिति कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए।


हाईकोर्ट ने पूछा—अब तक जांच में क्या हुआ?

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई, जहां कोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह जानना चाहा कि अब तक इस बहुचर्चित धोखाधड़ी प्रकरण में क्या प्रगति हुई है। अदालत का रुख साफ संकेत देता है कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा और जांच की पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशित करते हुए कहा कि जांच की पूरी रिपोर्ट, अब तक हुई कार्रवाई, और आगे की रणनीति को विस्तार से पेश किया जाए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।


खेल सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रखा पक्ष

पूर्व आदेश के अनुपालन में उत्तराखंड के खेल सचिव अमित सिन्हा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। उन्होंने अपने पक्ष में कहा कि खेल विभाग की भूमिका केवल खेल आयोजन के लिए मैदान उपलब्ध कराने तक सीमित होती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की क्रिकेट लीग का आयोजन निजी फ्रेंचाइजी कंपनियों द्वारा किया जाता है और विभाग का उनसे प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता। यदि किसी प्रकार की धोखाधड़ी सामने आती है, तो उस पर कार्रवाई करना पुलिस और जांच एजेंसियों का दायित्व होता है।

हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को सुनने के बाद भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी रखे।


क्या है पूरा EVCL धोखाधड़ी मामला?

पूरा मामला हल्द्वानी के गौलापार स्थित इंदिरा गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम से जुड़ा हुआ है, जहां EVCL (Epic Victory Cricket League) के नाम पर क्रिकेट लीग आयोजित करने का दावा किया गया था।

आरोप है कि आयोजकों ने लोगों को यह झांसा दिया कि इस लीग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इसी आधार पर फ्रेंचाइजी बेचकर लाखों रुपये की वसूली की गई।

नैनीताल पुलिस के अनुसार, इस कथित लीग का आयोजन 3 फरवरी से 12 फरवरी के बीच होना था, लेकिन तय समय पर कोई भी आयोजन नहीं हुआ। इससे निवेश करने वाले लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।


32 लाख रुपये की ठगी, कई लोग बने शिकार

मामले में सामने आया है कि सितारगंज के पूर्व विधायक नारायण पाल और हरियाणा के एक युवक सहित कई लोगों से कुल मिलाकर लगभग 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई।

नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी ने इस पूरे प्रकरण का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से लोगों को विश्वास में लेकर निवेश कराया और बाद में आयोजन ही नहीं किया।

पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और मुख्य आरोपी विकास ढाका को 6 फरवरी को काठगोदाम क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।


आरोपी का पलटवार: गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

गिरफ्तारी के बाद विकास ढाका की ओर से नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने नियमों का पालन किए बिना गिरफ्तारी की।

आरोपी की ओर से कहा गया है कि जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें अधिकतम सजा 7 वर्ष से कम है, ऐसे में गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।

इसके अलावा एफआईआर और रिमांड शीट में गिरफ्तारी के समय को लेकर भी विरोधाभास होने का आरोप लगाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस ने दबाव में आकर कार्रवाई की है और आरोपी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।


जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी निगाहें

इस पूरे मामले में अब सबकी निगाहें 17 अप्रैल पर टिकी हुई हैं, जब राज्य सरकार को हाईकोर्ट में जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी है।

यह मामला न केवल आर्थिक धोखाधड़ी का है, बल्कि इसमें खेल आयोजन के नाम पर लोगों के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने का भी आरोप है। ऐसे में कोर्ट की सख्ती से यह उम्मीद जताई जा रही है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी।


हल्द्वानी EVCL धोखाधड़ी मामला उत्तराखंड में खेल आयोजनों की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। हाईकोर्ट की सख्त निगरानी में चल रही इस जांच से यह तय होगा कि आखिरकार इस पूरे प्रकरण के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार है और पीड़ितों को न्याय कब तक मिलेगा।

फिलहाल, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और कोर्ट की अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।

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