हल्द्वानी बनभूलपुरा कांडFile Photo: PTI

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट में बहुचर्चित हल्द्वानी बनभूलपुरा कांड के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन उन्हें फिलहाल कोई राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद इसे दूसरी पीठ के पास भेजने का आदेश दिया है। इससे पहले भी इस मामले की सुनवाई दो अलग-अलग पीठों के समक्ष आ चुकी है।

हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह पहले इस मामले से जुड़े एक पक्ष के अधिवक्ता रह चुके हैं। ऐसे में उन्होंने नैतिक आधार पर इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया और मामले को दूसरी पीठ के समक्ष भेज दिया।

इस फैसले के बाद अब अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई किसी अन्य पीठ के समक्ष होगी, जिससे फिलहाल आरोपी को राहत मिलने की उम्मीद टल गई है।


पहले भी दूसरी पीठ को भेजा जा चुका है मामला

यह पहला अवसर नहीं है जब इस मामले को सुनवाई के लिए दूसरी पीठ के पास भेजा गया हो। इससे पहले वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की पीठ ने भी इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करते हुए इसे दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर दिया था।

लगातार अलग-अलग पीठों के सामने जाने के कारण इस मामले में जमानत याचिका पर अंतिम निर्णय अभी तक नहीं हो पाया है। इससे आरोपी पक्ष को राहत मिलने में देरी हो रही है।


क्या है हल्द्वानी बनभूलपुरा कांड

हल्द्वानी बनभूलपुरा कांड उत्तराखंड के हालिया समय के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक है। यह मामला उस समय सामने आया जब प्रशासन बनभूलपुरा क्षेत्र में सरकारी भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करने पहुंचा था।

प्रशासन के अनुसार, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध करते हुए प्रशासन और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह स्थिति हिंसक हो गई और पूरे इलाके में तनाव फैल गया।

इस दौरान पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए और सरकारी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात करना पड़ा।


अब्दुल मलिक पर चार मुकदमे दर्ज

इस मामले में पुलिस ने अब्दुल मलिक समेत कई लोगों के खिलाफ चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं।

इनमें एक गंभीर आरोप यह भी है कि अब्दुल मलिक ने कथित तौर पर कूटरचित और झूठे शपथपत्र के आधार पर सरकारी भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की

पुलिस और प्रशासन के अनुसार, मलिक पर आरोप है कि उन्होंने नजूल भूमि पर कब्जा करके वहां अवैध प्लॉटिंग और निर्माण कराया तथा बाद में इन संपत्तियों को बेचने का प्रयास किया।

जब जिला प्रशासन अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर पहुंचा, तब कथित तौर पर प्रशासनिक टीम और पुलिस पर हमला किया गया, जिसके बाद हालात बिगड़ गए और मामला दंगे में बदल गया।


आरोपी पक्ष का दावा – झूठा फंसाया गया

वहीं, आरोपी पक्ष का कहना है कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उनका दावा है कि शुरुआती एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं था और बाद में पुलिस ने जबरन उन्हें इस मामले में आरोपी बना दिया।

अब्दुल मलिक की ओर से दायर जमानत याचिका में कहा गया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें लंबे समय से जेल में रखा गया है। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

आरोपी पक्ष ने यह भी दलील दी है कि इस मामले में शामिल कई अन्य आरोपियों को पहले ही अदालत से जमानत मिल चुकी है।


पुलिस और प्रशासन का पक्ष

पुलिस और प्रशासन का कहना है कि बनभूलपुरा कांड एक गंभीर आपराधिक घटना थी, जिसमें कानून-व्यवस्था को चुनौती दी गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में कई लोगों की भूमिका सामने आई है और सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण को हटाने के लिए कार्रवाई की गई थी, लेकिन कुछ लोगों ने इसका हिंसक विरोध किया।


कई आरोपियों को मिल चुकी है जमानत

इस मामले में गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों को अदालत से पहले ही जमानत मिल चुकी है। हालांकि, मुख्य आरोपी माने जा रहे अब्दुल मलिक की जमानत याचिका अभी तक स्वीकार नहीं की गई है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार कर रही है।


अगली सुनवाई पर टिकी नजर

हल्द्वानी बनभूलपुरा कांड मामले की सुनवाई उत्तराखंड हाईकोर्ट की किसी अन्य पीठ के समक्ष होगी, जहां जमानत याचिका पर आगे की प्रक्रिया चलेगी।

कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालत इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही अंतिम फैसला लेगी। ऐसे में आने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

हल्द्वानी बनभूलपुरा कांड पहले ही राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा मुद्दा बन चुका है, इसलिए अदालत के अगले फैसले को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

By Bhaskar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *