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ED के 70 साल: 2.36 लाख करोड़ की संपत्ति अटैच, 94% कन्विक्शन रेट के साथ एजेंसी का बड़ा दावा

ED 70th Foundation Day

Photo: Bugyal News

नई दिल्ली/ ED 70th Foundation Day: देश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करने वाली प्रमुख जांच एजेंसी Enforcement Directorate (ED) ने अपने 70वें स्थापना दिवस पर उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति का विस्तृत खाका पेश किया। इस मौके पर ईडी निदेशक Rahul Navin ने एजेंसी के सफर को ‘जिम्मेदारी और बदलाव’ का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह अवसर केवल जश्न का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आगे की दिशा तय करने का भी है।

कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री Pankaj Chaudhary, राजस्व विभाग के सचिव Arvind Shrivastava और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल S. V. Raju समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


बदलते अपराधों के साथ बदली ED की रणनीति

ED 70th Foundation Day पर निदेशक ने स्पष्ट किया कि समय के साथ आर्थिक अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां एजेंसी का मुख्य फोकस बैंक फ्रॉड, कॉर्पोरेट घोटाले और रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर था, वहीं अब अपराध का दायरा डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैल चुका है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली धोखाधड़ी, साइबर क्राइम, आतंकवाद की फंडिंग और ड्रग्स तस्करी जैसे मामलों ने नई चुनौती खड़ी की है। इनसे निपटने के लिए एजेंसी ने अपनी जांच प्रणाली को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाया है।

राहुल नवीन ने कहा कि अब ईडी केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने पर जोर दे रही है। खासकर नारकोटिक्स और आतंकवाद से जुड़े मामलों में ‘फॉलो द मनी’ रणनीति को प्राथमिकता दी जा रही है।


रिकॉर्ड कार्रवाई: 812 चार्जशीट, 94% कन्विक्शन रेट

वित्त वर्ष 2025-26 में ईडी की कार्रवाई के आंकड़े एजेंसी की सक्रियता को दर्शाते हैं। राहुल नवीन के अनुसार:

उन्होंने दावा किया कि एजेंसी का कन्विक्शन रेट 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

फिलहाल 2400 से अधिक मामले अदालतों में लंबित हैं और आने वाले समय में इन मामलों में तेजी से फैसले आने की उम्मीद जताई गई है।


2.36 लाख करोड़ की संपत्ति अटैच, पीड़ितों को राहत

ईडी की कार्रवाई का सबसे अहम पहलू अवैध संपत्ति की जब्ती और पीड़ितों को राहत पहुंचाना रहा है। निदेशक के अनुसार:

ईडी ने अब तक 63,142 करोड़ रुपये पीड़ितों—जैसे बैंक, निवेशक और होमबायर्स—को वापस दिलाए हैं।

उदाहरण के तौर पर, PACL लिमिटेड घोटाले में 15,581 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाए गए। वहीं, उदयपुर के एक रियल एस्टेट मामले में 200 से अधिक होमबायर्स को उनकी संपत्ति वापस दिलाई गई।


भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर कड़ा शिकंजा

भगोड़े आर्थिक अपराधी कानून (FEOA) के तहत ईडी ने अब तक 54 मामलों में कार्रवाई शुरू की है। इनमें से 21 लोगों को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।

इन मामलों में 2178 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि एजेंसी अब देश से बाहर भागने वाले आर्थिक अपराधियों के खिलाफ भी सख्ती से कार्रवाई कर रही है।


वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका

ईडी अब केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

भारत वर्तमान में ARIN-AP (एशिया-प्रशांत एसेट रिकवरी नेटवर्क) के स्टेयरिंग ग्रुप की अध्यक्षता कर रहा है। इसके अलावा:

यह भारत की वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिष्ठा और आर्थिक अपराधों के खिलाफ उसकी मजबूत नीति को दर्शाता है।


पारदर्शिता के लिए तकनीकी सुधार

ईडी ने अपनी जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई तकनीकी सुधार किए हैं।

अब QR कोड आधारित सिस्टम के जरिए समन की सत्यता की जांच की जा सकती है, जिससे फर्जी समन और धोखाधड़ी की घटनाओं पर रोक लगेगी।

यह कदम एजेंसी की विश्वसनीयता बढ़ाने और आम लोगों के भरोसे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


सरकार का संदेश: ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति जारी

ED 70th Foundation Day कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने साफ किया कि ईडी को दी गई शक्तियों का उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि देश को आर्थिक अपराधों से बचाना है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध “कैंसर” की तरह हैं, जिनका इलाज सख्ती से ही संभव है।

मंत्री ने बढ़ते साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली धोखाधड़ी पर चिंता जताते हुए एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी और देश का पैसा लूटने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।


बदलते दौर में मजबूत होती ED

ED 70th Foundation Day का यह सफर न केवल एजेंसी की उपलब्धियों का प्रमाण है, बल्कि बदलते आर्थिक अपराधों के खिलाफ उसकी तैयारियों को भी दर्शाता है।

डिजिटल युग में जहां अपराध के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं, वहीं ईडी का फोकस अब केवल जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने पर केंद्रित है।

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