देहरादून, 06 अप्रैल 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम एक बार फिर प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण बनकर उभरा। कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित इस जनसुनवाई में 212 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से कई मामलों में मौके पर ही राहत प्रदान की गई।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बुजुर्गों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में प्रशासन ने न सिर्फ सहानुभूतिपूर्वक सुनवाई की, बल्कि तत्काल समाधान के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश भी दिए।
82 वर्षीय दिव्यांग को बड़ी राहत, पानी का ₹31,657 बिल माफ
जनता दर्शन में सबसे भावुक मामला छबीलबाग, कांवली रोड निवासी 82 वर्षीय दिव्यांग नत्थीलाल का सामने आया। उन्होंने देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल से गुहार लगाई कि उनका पुत्र पिछले 12-13 वर्षों से लापता है और दो पोतों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। आर्थिक तंगी के बीच उनके घर का पानी का बिल ₹31,657 आ गया था।
इस पर जिलाधिकारी ने तुरंत जल संस्थान को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जांच के बाद ₹11,487 का ब्याज माफ किया गया और वन टाइम सेटलमेंट के तहत शेष ₹20,170 की राशि ‘राइफल फंड’ से जमा कराने का निर्णय लिया गया। इस फैसले से न सिर्फ बुजुर्ग को राहत मिली, बल्कि प्रशासन की मानवीय पहल भी सामने आई।
मृतक पुत्र के मामले में न्याय की आस, डीएम ने दिए सख्त निर्देश
विकासनगर निवासी मीना बंसल ने देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल से अपने पुत्र की मौत के मामले में न्याय की गुहार लगाई। उनका आरोप था कि वर्ष 2023 में एक होटल में कार्यरत उनके पुत्र की दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, लेकिन नियोक्ता कंपनी ने कोई मुआवजा नहीं दिया।
इस पर डीएम ने सहायक श्रम आयुक्त (ALC) को निर्देश दिए कि संबंधित फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और मामला लेबर कोर्ट में प्रस्तुत कर दो माह के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन की इस पहल से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
घरेलू उत्पीड़न मामले में त्वरित कार्रवाई के निर्देश
ऋषिकेश निवासी बुजुर्ग दंपति नीलम अरोड़ा और उनके पति ने अपनी पुत्रवधु पर मारपीट और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। शिकायत पर जिलाधिकारी ने एसडीएम कोर्ट ऋषिकेश में भरण-पोषण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए।
यह मामला दर्शाता है कि जनता दर्शन सिर्फ आर्थिक समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक विवादों के समाधान का भी एक प्रभावी मंच बन चुका है।
दो बेटियों की शिक्षा का जिम्मा उठाएगा ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’
धर्मपुर निवासी रोशनी रावत ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अपनी दो बेटियों की शिक्षा के लिए मदद मांगी। देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास विभाग को निर्देश दिए कि दोनों बच्चियों की शिक्षा ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के तहत सुनिश्चित की जाए।
इस निर्णय से न केवल दो बच्चों का भविष्य सुरक्षित हुआ, बल्कि सरकार की शिक्षा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी सामने आया।

हर्रावाला में नहर क्षतिग्रस्त करने पर जांच के आदेश
हर्रावाला क्षेत्र से आए बाबूराम मौर्य ने शिकायत की कि कुछ लोगों ने सरकारी नहर को जेसीबी से क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे सिंचाई बाधित हो गई और किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं।
जिलाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर जिलाधिकारी, एसडीएम डोईवाला और लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों को तत्काल जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
‘जनता दर्शन’ में उमड़ा जनसैलाब, 212 से अधिक शिकायतें दर्ज
मुख्यमंत्री की प्रेरणा से चल रहे इस कार्यक्रम में लोगों का भरोसा लगातार बढ़ता दिख रहा है। इस बार 212 से अधिक शिकायतें दर्ज होना इस बात का संकेत है कि जनता प्रशासन से सीधे संवाद के इस मंच को प्रभावी मान रही है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रशासनिक टीम की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, पुलिस अधीक्षक यातायात लोकजीत सिंह, उप नगर आयुक्त संतोष पांडेय, एसडीएम कुमकुम जोशी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
यह समन्वित प्रयास दर्शाता है कि जिला प्रशासन अब बहु-विभागीय समन्वय के साथ समस्याओं के समाधान की दिशा में काम कर रहा है।
संवेदनशील प्रशासन से बढ़ा जनता का भरोसा
देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल यह ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं, बल्कि त्वरित समाधान और मानवीय दृष्टिकोण का प्रतीक बन चुका है। बुजुर्ग, महिलाएं और जरूरतमंद वर्ग जिस तरह से राहत पा रहे हैं, उससे प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है।