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देहरादून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 3.09 करोड़ की ठगी, साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग महिला को बनाया निशाना

Dehradun Cyber Fraud

File Photo

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी में Dehradun Cyber Fraud का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है। डालनवाला क्षेत्र की 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर साइबर ठगों ने 3 करोड़ 9 लाख रुपये की ठगी कर डाली।

पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


कैसे रचा गया Dehradun Cyber Fraud का जाल?

जानकारी के अनुसार, एक सितंबर 2025 को पीड़िता के मोबाइल पर एक अज्ञात कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए अपना नाम प्रदीप मिश्रा बताया। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए बातचीत की और अपना नाम सुनील कुमार गौतम बताया।

दोनों ने महिला को बताया कि उनका नाम 68 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में सामने आया है। महिला को यह भी कहा गया कि उनके बैंक खाते से 68 लाख रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन की रसीद मौजूद है, जिसकी एक कथित कॉपी व्हाट्सएप पर भेजी गई।

इसके बाद साइबर ठगों ने महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की धमकी दी और कहा कि यदि उन्होंने किसी को इसकी जानकारी दी तो उन्हें और उनके बच्चों को गिरफ्तार किया जा सकता है।


‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक दबाव

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि 9 सितंबर 2025 से 30 अक्टूबर 2025 के बीच अलग-अलग नंबरों से लगातार व्हाट्सएप कॉल आते रहे। ठगों ने खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए उन्हें लगातार निगरानी में होने का एहसास कराया।

महिला के अनुसार, साइबर अपराधियों ने उनकी लोकेशन के बारे में जानकारी जुटाई और उनके घर की तस्वीरें तक भेजीं, जिससे वह मानसिक रूप से डर गईं। इस डर और दबाव में आकर उन्होंने अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करनी शुरू कर दी।


किन-किन बैंकों में ट्रांसफर हुए पैसे?

शिकायत के अनुसार, महिला ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), आईडीएफसी और इंडसइंड बैंक के खातों में कुल 3 करोड़ 9 लाख रुपये ट्रांसफर किए।

रकम जुटाने के लिए उन्होंने अपनी एफडी तुड़वाई, शेयर बेचे और यहां तक कि गोल्ड लोन भी लिया। जब उपलब्ध नकदी कम पड़ी, तब भी ठगों के दबाव में उन्होंने अतिरिक्त धन की व्यवस्था कर ट्रांसफर किया।

यह पूरा घटनाक्रम करीब दो महीने तक चलता रहा और महिला को इस बात का अहसास तब हुआ जब लगातार पैसे ट्रांसफर करने के बाद भी कथित जांच खत्म नहीं हुई।


पुलिस ने क्या कहा?

Dehradun Cyber Fraud साइबर पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। साइबर एएसपी कुश मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लोगों को डराने और मानसिक दबाव बनाने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

उन्होंने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को इस तरह की कॉल आती है, तो तुरंत नजदीकी थाने या साइबर पुलिस से संपर्क करें।


उत्तराखंड में बढ़ रहे साइबर अपराध

प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। निवेश के नाम पर ठगी, ऑनलाइन लोन, फर्जी कॉल सेंटर, फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर धोखाधड़ी—ये सभी तरीके आम हो चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग अब मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। बुजुर्ग और अकेले रहने वाले लोग इनके आसान शिकार बनते जा रहे हैं।


कैसे बचें साइबर ठगी से?

Dehradun Cyber Fraud जैसे मामलों से बचने के लिए पुलिस और विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं:

  1. किसी भी अनजान कॉल पर अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
  2. कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी या पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश नहीं देती।
  3. ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है।
  4. डराने या गोपनीयता की शर्त रखने वाली कॉल पर तुरंत कॉल काट दें।
  5. संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में दें।

सामाजिक और मानसिक प्रभाव

इस तरह की घटनाएं केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचातीं, बल्कि पीड़ितों को मानसिक रूप से भी तोड़ देती हैं। परिवार में अविश्वास, सामाजिक शर्मिंदगी और आत्मग्लानि जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध के खिलाफ तकनीकी उपायों के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी उतना ही जरूरी है।


आगे की कार्रवाई

साइबर पुलिस उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें रकम ट्रांसफर की गई। खातों की केवाईसी डिटेल, लेन-देन का ट्रेल और संभावित कॉल सेंटर लोकेशन की भी पड़ताल की जा रही है।

Dehradun Cyber Fraud का यह मामला एक बार फिर चेतावनी देता है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की धमकी या जांच एजेंसी के नाम पर आने वाली कॉल पर घबराने के बजाय तुरंत आधिकारिक सत्यापन करें।


राजधानी में सामने आया यह मामला Dehradun Cyber Fraud न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में बढ़ते साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाता है। 3 करोड़ 9 लाख रुपये की ठगी ने एक बुजुर्ग महिला की जीवन भर की पूंजी को खत्म कर दिया।

अब जरूरी है कि प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ आम नागरिक भी सतर्क रहें। क्योंकि साइबर ठगों के जाल से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है—जागरूकता, संयम और समय रहते शिकायत।

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