देहरादून शस्त्र लाइसेंस निरस्त
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जिला प्रशासन ने शस्त्र लाइसेंस व्यवस्था को लेकर अब तक की सबसे सख्त और व्यापक कार्रवाई की है। केंद्र सरकार और राज्य शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में प्रशासन ने एक साथ 827 शस्त्र लाइसेंस धारकों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। यह कार्रवाई न केवल कानून के सख्त पालन का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब शस्त्र लाइसेंस को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह निर्णय गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयुध (संशोधन) नियम-2019 और आयुध अधिनियम, 1959 में किए गए संशोधनों के तहत लिया गया है, जिनका उद्देश्य शस्त्रों की संख्या पर नियंत्रण और पारदर्शी लाइसेंस प्रणाली को लागू करना है।
एक व्यक्ति के पास अब अधिकतम दो शस्त्र ही वैध
गृह मंत्रालय की वर्ष 2019 की अधिसूचना के अनुसार, आयुध अधिनियम की धारा-03 में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया गया कि अब एक व्यक्ति अधिकतम दो शस्त्र ही रख सकता है। इससे पहले यह सीमा तीन शस्त्रों की थी। इसके बाद उत्तराखण्ड शासन ने सभी जिलों को निर्देश दिए कि जिन शस्त्र लाइसेंस धारकों के पास निर्धारित सीमा से अधिक हथियार हैं, उनके विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जाए।
देहरादून में चला विशेष अभियान, नोटिस के बाद भी नहीं माने 54 लाइसेंसधारी
शासन के निर्देशों के क्रम में जनपद देहरादून में जिला प्रशासन ने विशेष सत्यापन अभियान शुरू किया। जिन शस्त्र लाइसेंस धारकों के पास दो से अधिक शस्त्र पाए गए, उन्हें 26 अप्रैल 2025 को अतिरिक्त शस्त्र हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए।
हालांकि, नोटिस दिए जाने के बावजूद 54 शस्त्र लाइसेंस धारकों ने न तो कोई जवाब दिया और न ही कोई वैध तर्क प्रस्तुत किया। जांच में पाया गया कि इन सभी के नाम पर NDAL-ALIS पोर्टल पर अभी भी दो से अधिक शस्त्र दर्ज थे।
जिलाधिकारी की अनुमति के बाद, इन 54 शस्त्र धारकों (शूटिंग खेल प्रतियोगिताओं के लिए विशेष अनुमति प्राप्त लाइसेंस धारकों को छोड़कर) के सभी अतिरिक्त शस्त्र और संबंधित लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए। साथ ही, इनका पूरा रिकॉर्ड पोर्टल से भी हटा दिया गया।
NDAL-ALIS पोर्टल और UIN बना निर्णायक आधार
शस्त्र लाइसेंस व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने NDAL-ALIS (National Database of Arms Licences – Arms Licence Issuance System) पोर्टल लागू किया है। इसके तहत प्रत्येक शस्त्र लाइसेंस के लिए UIN (Unique Identification Number) जनरेट करना अनिवार्य है।
उत्तराखंड शासन के गृह अनुभाग-05 द्वारा जारी शासनादेश (03 मई 2017, 09 मार्च 2023 और 03 सितंबर 2025) में साफ निर्देश दिए गए थे कि 30 जून 2020 के बाद जिन शस्त्र लाइसेंसों का UIN जनरेट नहीं हुआ है, उन्हें निरस्त किया जाए।
773 बिना UIN वाले शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त
इन निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन देहरादून ने समय-समय पर प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से शस्त्र धारकों को जागरूक किया। बिना UIN वाले लाइसेंस धारकों से बार-बार अपील की गई कि वे अभिलेखों सहित कार्यालय में उपस्थित होकर नई ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत आवेदन करें।
इसके बावजूद, जांच में सामने आया कि जनपद देहरादून में 773 शस्त्र लाइसेंस ऐसे थे जिनका अब तक UIN जनरेट नहीं हुआ था। शासनादेशों का उल्लंघन मानते हुए जिला प्रशासन ने इन सभी 773 शस्त्र लाइसेंसों को भी निरस्त कर NDAL-ALIS पोर्टल से विलोपित कर दिया।
कुल 827 लाइसेंस निरस्त, प्रदेश में सख्त संदेश
इस तरह देहरादून जिले में कुल मिलाकर
- 02 से अधिक शस्त्र रखने वाले 54 लाइसेंसधारी, और
- UIN जनरेट न कराने वाले 773 लाइसेंसधारी,
यानी कुल 827 शस्त्र लाइसेंस एक साथ निरस्त किए गए हैं। यह कार्रवाई उत्तराखंड में अब तक की सबसे बड़ी शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण कार्रवाई मानी जा रही है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश: नियम तोड़ने पर नहीं मिलेगी राहत
जिला प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासन के हित में उठाया गया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि भविष्य में भी शस्त्र लाइसेंसों की नियमित समीक्षा जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर बिना किसी दबाव के कार्रवाई होगी।
निष्कर्ष
देहरादून में शस्त्र लाइसेंसों पर हुई यह बड़ी कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब शस्त्र रखना केवल अधिकार नहीं, बल्कि कड़े नियमों और जिम्मेदारियों से जुड़ा विषय है। देहरादून शस्त्र लाइसेंस निरस्त अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और डिजिटल व्यवस्था को नजरअंदाज करने वालों के लिए अब कोई गुंजाइश नहीं बची है।

