Bugyal News – हिंदी समाचार | उत्तराखंड न्यूज़ | ब्रेकिंग न्यूज़ | Latest Hindi News

अंगदान बने जनआंदोलन, तभी हजारों जिंदगियों को मिलेगा नया जीवन: जे.पी. नड्डा

दधीचि अंगदान संकल्प अभियान

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित दधीचि अंगदान संकल्प अभियान के तहत राष्ट्रीय संगोष्ठी ने अंगदान को लेकर समाज में नई चेतना जगाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहभागिता करते हुए अंगदान को मानव सेवा का सर्वोच्च माध्यम बताया। देशभर से पहुंचे चिकित्सकों, विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने इस अवसर पर अंगदान के महत्व पर मंथन किया, जबकि सैकड़ों लोगों ने मानवता की सेवा के लिए अंगदान का संकल्प लिया।

दधीचि अंगदान संकल्प अभियान

दधीचि अंगदान संकल्प अभियान कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि अंगदान मानवता के प्रति सबसे बड़ा उपहार है, क्योंकि एक व्यक्ति का यह निर्णय कई लोगों को नया जीवन दे सकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के बावजूद आज भी हजारों मरीज ऐसे हैं, जिन्हें समय पर अंग नहीं मिल पाने के कारण जीवन से हाथ धोना पड़ता है। यदि समाज में जागरूकता बढ़े और अधिक लोग स्वेच्छा से अंगदान का संकल्प लें, तो हजारों परिवारों की उम्मीदें फिर से जीवित हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि अंगदान को केवल चिकित्सा विज्ञान तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी के रूप में भी समझना आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार किए हैं और अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुलभ तथा प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत संस्थागत ढांचा विकसित किया है। उन्होंने बताया कि राज्यों में भी अंगदान से जुड़े संगठनों को सक्रिय किया जा रहा है, जिससे लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को और तेज बनाया जा सके।

नड्डा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में अंगदान के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि समाज, सरकार और सामाजिक संगठन मिलकर इस दिशा में कार्य करें तो अंगदान को एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की महान परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति त्याग, सेवा, समर्पण और परमार्थ की भावना पर आधारित है। उन्होंने महर्षि दधीचि के अद्वितीय त्याग का स्मरण करते हुए कहा कि मानवता और धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने अपनी अस्थियों तक का दान कर दिया था। इसी प्रकार राजा शिवि की कथा भारतीय संस्कृति में करुणा और परोपकार की सर्वोच्च मिसाल प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसके अंग किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकते हैं, तो इससे बड़ा मानव कल्याण का कार्य कोई नहीं हो सकता। उन्होंने समाज से आगे आकर अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

दधीचि अंगदान संकल्प अभियान में उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही हैं। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने गरीब और जरूरतमंद लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उत्तराखंड सरकार भी राज्य में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार कर रही है और अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में सरकारी एवं निजी अस्पतालों, प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा दून मेडिकल कॉलेज में राज्य का पहला सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र विकसित किया जा रहा है। साथ ही अंग प्रत्यारोपण केंद्रों, अंग बैंक और जिला स्तरीय अंगदान केंद्रों का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में भी तेजी से काम चल रहा है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर जीवनरक्षक अंग उपलब्ध कराए जा सकें।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार और शांतिकुंज द्वारा पिछले एक शताब्दी से आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों के प्रसार और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में किए जा रहे योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का संदेश “हम बदलेंगे तो युग बदलेगा” आज भी समाज को सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में प्रेरित करता है।

राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि त्याग, सहयोग, कर्तव्य और लोकमंगल की जीवनशैली है। उन्होंने कहा कि समाज के लिए अपने समय, श्रम और संसाधनों का समर्पण ही यज्ञ की वास्तविक भावना है और अंगदान इसी महान विचार का आधुनिक स्वरूप है।

संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने अंगदान के वैज्ञानिक, सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि भारत में अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है, लेकिन जागरूकता की कमी और सामाजिक भ्रांतियों के कारण अपेक्षित संख्या में अंगदान नहीं हो पा रहा है। ऐसे आयोजनों से लोगों में विश्वास बढ़ेगा और अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ेंगे।

दधीचि अंगदान संकल्प अभियान कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उपस्थित लोगों को अंगदान का संकल्प दिलाया। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने स्वेच्छा से अंगदान के लिए अपनी सहमति दर्ज कराई।

दधीचि अंगदान संकल्प अभियान के इस अवसर पर आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानंद, डॉ. अनिल कुमार, पद्मश्री नीलेश मांडलेवाला, डॉ. विजय धस्माना, राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रो. मीनू सिंह सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक, प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक और देशभर से आए साधक उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ती रही और प्रत्येक नागरिक इसे मानव सेवा के सर्वोच्च संकल्प के रूप में स्वीकार करे, तो आने वाले वर्षों में हजारों गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।

Exit mobile version