देहरादून | Congress leader Harish Rawat: से राष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़ी अहम प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लोकसभा में देश का आम बजट पेश करने जा रही हैं। ऐसे में पूरे देश की निगाहें इस बजट पर टिकी हुई हैं। आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक हर वर्ग यह जानना चाहता है कि आगामी वित्तीय वर्ष में सरकार किसे कितनी राहत देगी और किन क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलेगी।
इसी क्रम में ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान हरीश रावत ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और बजट की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा समय में निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग दोनों ही सबसे ज्यादा दबाव में हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य आमदनी से बाहर
हरीश रावत ने कहा कि आज देश में शिक्षा और स्वास्थ्य का खर्च आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। मध्यम वर्ग की आय जिस गति से बढ़ रही है, उस अनुपात में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कई गुना बढ़ चुकी है।
उनका कहना था कि यदि बजट आम आदमी के जीवन को आसान नहीं बनाता, तो उसकी सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। महंगाई पर नियंत्रण और रोजगार सृजन को बजट की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
रोजगार मूलक नहीं तो बजट देश के अनुरूप नहीं
Congress leader Harish Rawat ने दो टूक कहा कि अगर केंद्रीय बजट रोजगार मूलक नहीं है, तो वह देश की जरूरतों के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार की है, लेकिन बजट में इस दिशा में ठोस प्रयास दिखाई नहीं देते।
उन्होंने चिंता जताई कि डॉलर के मुकाबले रुपए की साख लगातार गिर रही है और देश पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ता जा रहा है। हरीश रावत के अनुसार, वर्ष 2014 की तुलना में आज देश पर लगभग तीन गुना अधिक कर्ज हो चुका है, जिसका सीधा असर प्रति व्यक्ति कर्ज पर भी पड़ रहा है।
कमजोर होता रुपया और असंतुलित अर्थव्यवस्था
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर रुपया कमजोर हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आयात बढ़ रहा है और निर्यात में गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे देश की अर्थव्यवस्था में असंतुलन की स्थिति बन रही है।
उन्होंने विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र रोजगार सृजन की रीढ़ माना जाता है, लेकिन फिलहाल इसमें कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को नहीं मिल रही है। कुल मिलाकर देश का आर्थिक परिदृश्य स्वस्थ नहीं कहा जा सकता।
रोजगार देश का सबसे बड़ा प्रश्न
हरीश रावत ने कहा कि भारत जैसे विशाल और युवा आबादी वाले देश में रोजगार सबसे बड़ा प्रश्न बन चुका है। उन्होंने माना कि अमेरिका जैसी विकसित अर्थव्यवस्था में भी रोजगार एक चुनौती है, लेकिन भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था में इसका असर कहीं ज्यादा गहरा होता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग रोजगार खत्म करने के बजाय रोजगार बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
AI को लेकर चिंता, लेकिन विरोध नहीं
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर पूछे गए सवाल पर हरीश रावत ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे AI के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यदि AI युवाओं के रोजगार छीनने का माध्यम बनता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि आज टेक्नोलॉजी अत्यधिक समृद्ध लोगों के हाथ की दासी बनती जा रही है, जबकि आम युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है। बजट में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि टेक्नोलॉजी समावेशी विकास का माध्यम बने।
कृषि को लाभदायी बनाना जरूरी
हरीश रावत ने बजट में कृषि क्षेत्र पर विशेष फोकस देने की मांग की। उन्होंने कहा कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद यदि भारत अपने किसानों को लाभकारी कृषि नहीं दे पा रहा है, तो यह आत्ममंथन का विषय है।
उनका कहना था कि यदि भारत को तीसरी या दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है, तो इसके लिए कृषि को लाभदायी बनाना अनिवार्य है। साथ ही लघु और छोटे उद्योगों को भी मजबूत करना होगा, क्योंकि यही क्षेत्र सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करता है।
सिविल एविएशन में अपार संभावनाएं
हरीश रावत ने सिविल एविएशन सेक्टर को संभावनाओं से भरा क्षेत्र बताते हुए कहा कि इस दिशा में सरकार ने अपेक्षित ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय बनाए गए एयरपोर्ट और एयर स्ट्रिप्स में इसके बाद कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस बजट में सिविल एविएशन को लेकर क्या नई घोषणाएं करती है।
रेलवे और हिमालयी राज्यों पर तंज
पूर्व मुख्यमंत्री ने रेलवे क्षेत्र को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना की आधारशिला सोनिया गांधी ने रखी थी, लेकिन आज भाजपा उसी का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।
इसके साथ ही उन्होंने हिमालयी राज्यों के लिए पर्यावरण संरक्षण को और सुदृढ़ करने की मांग की। हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य हर साल आपदाओं का सामना करते हैं, लेकिन आपदा राहत पैकेज पर्याप्त नहीं होते।
केंद्रीय बजट 2026 से पहले Congress leader Harish Rawat के ये बयान सरकार के सामने कई अहम सवाल खड़े करते हैं। मध्यम वर्ग, रोजगार, कृषि, टेक्नोलॉजी और पर्यावरण—इन सभी मुद्दों पर उनकी टिप्पणी यह संकेत देती है कि इस बजट से आम जनता को बड़ी उम्मीदें हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर पाती है।

