देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC चिटफंड घोटाला (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी) में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ा कदम उठाते हुए 18 आरोपियों और एक संस्था के खिलाफ देहरादून स्थित विशेष BUDS (Banning of Unregulated Deposit Schemes) कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस कार्रवाई के साथ ही प्रदेश के हजारों निवेशकों को प्रभावित करने वाले इस बहुचर्चित मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है।
LUCC चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS), उत्तराखंड जमाकर्ताओं के हित संरक्षण अधिनियम तथा Banning of Unregulated Deposit Schemes Act, 2019 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है और आने वाले समय में और कार्रवाई संभव है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई CBI जांच
(लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी) इस पूरे मामले की जांच उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सीबीआई को सौंपी गई थी। वर्ष 2025 में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दर्ज 18 एफआईआर को एक साथ लेकर सीबीआई ने 26 नवंबर 2025 को नियमित मामला दर्ज किया और विस्तृत जांच शुरू की।
LUCC चिटफंड घोटाला मामले में जांच के दौरान एजेंसी के सामने ऐसे तथ्य आए जिन्होंने इसे उत्तराखंड के सबसे बड़े कथित वित्तीय घोटालों में से एक बना दिया। सीबीआई के अनुसार, संस्था ने लगभग एक लाख निवेशकों से करीब 800 करोड़ रुपये जमा किए, जबकि 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निवेशकों को वापस नहीं मिली।
कैसे चला कथित निवेश का जाल?
जांच में सामने आया कि LUCC सोसायटी का गठन वर्ष 2012 में हुआ था, लेकिन वर्ष 2016 में समीर अग्रवाल ने इसका संचालन अपने हाथ में लेकर नया बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स गठित किया। इसके बाद उत्तराखंड में 50 से अधिक शाखाओं के जरिए कथित तौर पर आकर्षक रिटर्न का लालच देकर निवेश योजनाएं चलाई गईं।
सीबीआई का दावा है कि संस्था के पास कोई ऐसा वास्तविक व्यवसाय नहीं था जिससे निवेशकों को वैध लाभ मिल सके। जांच में यह भी सामने आया कि पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से जुटाए गए धन से किया जाता था। इसी आधार पर एजेंसी ने इसे पोंजी स्कीम (Ponzi Scheme) का स्वरूप बताया है।
मुख्य आरोपी विदेश फरार, लुकआउट सर्कुलर जारी
सीबीआई के मुताबिक, पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल है। जांच में आरोप है कि उसने कई शेल कंपनियों के माध्यम से निवेशकों के पैसे को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कराया और वित्तीय लेन-देन को जटिल बनाया।
एजेंसी का कहना है कि समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल फिलहाल विदेश में हैं। दोनों के खिलाफ नोटिस जारी किए जा चुके हैं और लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया गया है ताकि उनके भारत लौटते ही कानूनी कार्रवाई की जा सके।
इन पदाधिकारियों पर भी गंभीर आरोप
LUCC चिटफंड घोटाला मामले की चार्जशीट के अनुसार, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत और दिनेश सिंह संस्था के महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे। सीबीआई का आरोप है कि इन लोगों ने कथित रूप से निवेश योजनाओं के संचालन और धन संग्रह की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई।
इसके अलावा चेस्ट मैनेजर तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी पर आरोप है कि विभिन्न शाखाओं से एकत्र नकदी को बैंकिंग प्रणाली से बचाते हुए अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि इस तरीके से वित्तीय लेन-देन को छिपाने का प्रयास किया गया।
मुंबई में खोले गए शेल फर्मों के खाते
सीबीआई जांच में यह भी सामने आया कि सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन ने कथित तौर पर मुंबई में लगभग 10 शेल फर्मों के बैंक खाते खुलवाए।
आरोप है कि उत्तराखंड के निवेशकों से जुटाई गई धनराशि पहले इन खातों में ट्रांसफर की गई और उसके बाद कई स्तरों वाले बैंकिंग लेन-देन (Layering) के जरिए सैकड़ों अन्य खातों में भेजी गई। जांच एजेंसी का मानना है कि ऐसा धन के वास्तविक स्रोत और उपयोग को छिपाने के उद्देश्य से किया गया।
39 संपत्तियां जांच के दायरे में, 29 पहले ही कुर्क
मामले की आर्थिक जांच के दौरान सीबीआई ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में आरोपियों से जुड़ी 39 संपत्तियों की पहचान की है।
इनमें से 29 संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किए जाने के आदेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष 10 संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया जारी है। एजेंसी का उद्देश्य कथित रूप से निवेशकों के धन से अर्जित संपत्तियों का पता लगाकर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त करना है।
सात आरोपी न्यायिक हिरासत में
सीबीआई अब तक इस मामले में तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन को गिरफ्तार कर चुकी है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी गहन जांच जारी है।
हजारों परिवार अब भी न्याय की उम्मीद में
LUCC चिटफंड घोटाला केवल वित्तीय अपराध का मामला नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों की पीड़ा भी है जिन्होंने बेहतर भविष्य, बच्चों की पढ़ाई, शादी, इलाज और बुजुर्गों की बचत को सुरक्षित समझकर इस संस्था में निवेश किया था।
कई निवेशकों की वर्षों की मेहनत की कमाई आज भी फंसी हुई है। ऐसे में चार्जशीट दाखिल होना जांच प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। हालांकि निवेशकों की सबसे बड़ी उम्मीद अब भी यही है कि उन्हें उनकी मेहनत की कमाई वापस मिले और दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा मिले।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के LUCC चिटफंड घोटाला मामलों में लोगों को केवल उन्हीं वित्तीय संस्थाओं में निवेश करना चाहिए जो संबंधित नियामक संस्थाओं के अधीन विधिवत पंजीकृत और अधिकृत हों। किसी भी योजना में निवेश से पहले उसकी वैधता और नियामकीय स्थिति की जांच करना भविष्य के जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकता है।

