देहरादून: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा केदार, भगवान बदरीविशाल, मां गंगा और मां यमुना के दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। हालांकि इस बार यात्रा के दौरान सामने आए स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। यात्रा शुरू होने के मात्र 56 दिनों के भीतर 190 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश मृतक पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे और स्वास्थ्य संबंधी सलाह की अनदेखी कर यात्रा पर निकल पड़े थे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित चारधामों की यात्रा सामान्य पर्यटन नहीं है। यहां कम ऑक्सीजन, कम वायुदाब, अत्यधिक ठंड और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां पहले से बीमार लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार लगातार यात्रियों से स्वास्थ्य परीक्षण करवाने और निर्धारित एडवाइजरी का पालन करने की अपील कर रही है।
34 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके हैं दर्शन
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में 13 जून तक 34 लाख 77 हजार 834 श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके हैं। हालांकि मानसून के करीब आने के साथ यात्रियों की संख्या में धीरे-धीरे कमी देखी जा रही है।
चारधामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का विवरण इस प्रकार है—
- केदारनाथ धाम – 12,23,074 श्रद्धालु
- बदरीनाथ धाम – 10,92,367 श्रद्धालु
- गंगोत्री धाम – 5,95,166 श्रद्धालु
- यमुनोत्री धाम – 5,56,227 श्रद्धालु
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस वर्ष भी यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह बना हुआ है।
6.42 लाख यात्रियों की हुई स्वास्थ्य जांच
स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा मार्गों पर रुद्रप्रयाग, चमोली, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, पौड़ी और देहरादून समेत सात प्रमुख स्थानों पर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग केंद्र स्थापित किए हैं। यहां अब तक 6 लाख 42 हजार 321 श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है।
जांच के दौरान 23 हजार 657 श्रद्धालु कोमोरबिडिटी यानी पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित पाए गए। इनमें मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग और अस्थमा जैसी बीमारियां शामिल हैं। इसके बावजूद अधिकांश यात्रियों ने अपनी यात्रा जारी रखने का फैसला किया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 2697 यात्री हाई रिस्क श्रेणी में पाए गए थे, लेकिन उनमें से केवल 170 लोगों ने ही यात्रा स्थगित कर घर लौटने का निर्णय लिया।
190 मौतों ने बढ़ाई चिंता
उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 190 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक मौतें केदारनाथ यात्रा मार्ग पर दर्ज की गई हैं।
मृतकों का धामवार आंकड़ा इस प्रकार है—
- केदारनाथ मार्ग – 91 मौतें
- बदरीनाथ मार्ग – 57 मौतें
- यमुनोत्री मार्ग – 25 मौतें
- गंगोत्री मार्ग – 17 मौतें
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश मामलों में मौत का कारण हृदय गति रुकना या गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और शारीरिक दबाव पहले से बीमार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
50 वर्ष से अधिक उम्र के यात्रियों में अधिक जोखिम
स्वास्थ्य जांच के दौरान 50 वर्ष से कम आयु के 3 लाख 89 हजार 478 यात्रियों का परीक्षण किया गया, जिनमें 6805 लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पाए गए।
वहीं 50 वर्ष से अधिक आयु के 2 लाख 52 हजार 843 श्रद्धालुओं की जांच में 16 हजार 852 लोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित मिले। इन्हीं में से बड़ी संख्या हाई रिस्क श्रेणी में दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में उच्च हिमालयी क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियां स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
हजारों श्रद्धालुओं को मिला चिकित्सा लाभ
चारधाम यात्रा 2026 मार्गों पर स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों में अब तक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का उपचार किया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार—
- ओपीडी में उपचार लेने वाले श्रद्धालु – 2,39,427
- कोमोरबिडिटी वाले मरीज – 6,168
- इमरजेंसी सेवाओं का लाभ लेने वाले यात्री – 35,456
- घायल श्रद्धालु – 3,483
- एंबुलेंस से रेफर किए गए मरीज – 753
- हेलीकॉप्टर से रेफर किए गए गंभीर मरीज – 89
ये आंकड़े बताते हैं कि यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग की सलाह: जल्दबाजी न करें
स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने कहा कि इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में अधिक श्रद्धालु यात्रा पर पहुंच रहे हैं। भीड़ बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा को जल्दबाजी में पूरा करने की कोशिश न करें।
उन्होंने कहा कि दो या तीन दिनों में यात्रा पूरी करने के बजाय श्रद्धालुओं को कम से कम एक सप्ताह का समय देना चाहिए। यदि यात्रा के दौरान सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक थकान या चक्कर जैसी समस्या महसूस हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने भी दी विशेष चेतावनी
उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार ने यात्रियों के लिए विस्तृत हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने विशेष रूप से डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हृदय रोग और अस्थमा से पीड़ित लोगों को यात्रा से पहले चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि 50 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं को हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में यदि पैदल यात्रा के दौरान थकान महसूस हो तो आराम करना चाहिए और अनावश्यक जोखिम नहीं उठाना चाहिए।
चारधाम यात्रा 2026 केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण सफर भी है। 56 दिनों में 190 श्रद्धालुओं की मौत का आंकड़ा इस बात का संकेत है कि स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यात्री यात्रा से पहले स्वास्थ्य परीक्षण करवाएं, पर्याप्त आराम करें और चिकित्सा सलाह का पालन करें तो दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उत्तराखंड सरकार भी लगातार यही संदेश दे रही है कि सुरक्षित यात्रा ही सफल यात्रा है।

