Site icon आज की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़ और लेटेस्ट अपडेट | Bugyal News, हिंदी न्यूज़

“AI कभी डॉक्टर की संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकता”, AIIMS दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का बड़ा संदेश

Photo: @VPIndia

नई दिल्ली/ AIIMS Convocation 2026: देश में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव के बीच उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने चिकित्सा जगत को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चाहे तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, कोई भी AI मरीज के बिस्तर के पास खड़े डॉक्टर की नैतिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार की जगह नहीं ले सकता।

दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences के 51वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने डॉक्टरों से मरीजों के प्रति धैर्यशील और सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा केवल विज्ञान नहीं, बल्कि मानवता और विश्वास से जुड़ा पेशा है।

“कुछ विनम्र शब्द दवा से ज्यादा असर करते हैं”

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज AI आधारित तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं सहित लगभग हर क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बना रही है। अस्पतालों में AI का उपयोग रोगों की पहचान, डेटा विश्लेषण, सर्जरी और उपचार की योजना बनाने में किया जा रहा है। लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर और मरीज के बीच का मानवीय रिश्ता सबसे महत्वपूर्ण बना रहेगा।

उन्होंने कहा,
“AI कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए, वह मरीज के बिस्तर के पास खड़े डॉक्टर की नैतिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं की बराबरी नहीं कर सकती। आपकी संवेदनशीलता और कुछ विनम्र शब्द कई बार दवा से ज्यादा प्रभावशाली साबित होते हैं।”

उपराष्ट्रपति के इस बयान को स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही AI तकनीक के बीच संतुलन बनाए रखने की अपील के रूप में देखा जा रहा है।

डॉक्टरों को दी धैर्य रखने की सलाह

समारोह के दौरान C. P. Radhakrishnan ने युवा डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को मरीजों के साथ संवाद की अहमियत समझाई। उन्होंने कहा कि कई बार मरीज डर, तनाव और जानकारी की कमी के कारण ऐसे प्रश्न पूछते हैं जो डॉक्टरों को सामान्य या “बेतुके” लग सकते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कर्तव्य है कि वे धैर्यपूर्वक उन्हें समझाएं।

उन्होंने कहा,
“जब मरीज बार-बार सवाल पूछें या चीजों को लेकर भ्रमित हों, तब आपको उनके प्रति धैर्य रखना चाहिए। जब आप उन्हें शांति और समझदारी से समझाएंगे, तो वे आपकी बात जरूर समझेंगे।”

विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टर और मरीज के बीच संवाद की कमी कई बार इलाज को प्रभावित करती है। ऐसे में उपराष्ट्रपति का यह संदेश मेडिकल समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

AI के दौर में मानवीय चिकित्सा की जरूरत

दुनियाभर में हेल्थकेयर सेक्टर में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। मेडिकल इमेजिंग, कैंसर डिटेक्शन, रोबोटिक सर्जरी और डिजिटल हेल्थ मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में AI आधारित तकनीकों ने कई नई संभावनाएं पैदा की हैं। भारत में भी बड़े अस्पताल AI आधारित सिस्टम अपना रहे हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ लगातार यह भी कहते रहे हैं कि AI केवल डॉक्टरों की सहायता कर सकता है, उनकी जगह नहीं ले सकता। मरीज की मानसिक स्थिति, भावनात्मक समर्थन और नैतिक निर्णय जैसे पहलू आज भी इंसानी डॉक्टरों पर ही निर्भर हैं।

उपराष्ट्रपति के बयान ने इसी बहस को एक नई दिशा दी है कि तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन चिकित्सा सेवा की आत्मा मानवीय संवेदनाओं में ही निहित है।

विदेश जाकर पढ़ें, लेकिन देश लौटकर सेवा करें

AIIMS Convocation 2026 के अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों से विदेशों में शिक्षा और शोध के अवसरों का लाभ उठाने की अपील की, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अंततः अपने देश और लोगों की सेवा के लिए वापस लौटना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत को कुशल और संवेदनशील डॉक्टरों की जरूरत है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में। ऐसे में देश के प्रतिभाशाली डॉक्टरों को विदेश में अनुभव प्राप्त करने के बाद भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में योगदान देना चाहिए।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब बड़ी संख्या में भारतीय मेडिकल छात्र और डॉक्टर बेहतर अवसरों की तलाश में विदेशों का रुख कर रहे हैं।

नए AIIMS और मेडिकल कॉलेजों की सराहना

AIIMS Convocation 2026 के दौरान उपराष्ट्रपति ने देशभर में नए AIIMS, मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग संस्थान खोले जाने की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे स्वास्थ्य सेवाएं अब उन क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों का सहारा लेना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि अब दूरदराज के राज्यों और जिलों के लोगों को छोटी-बड़ी चिकित्सा जरूरतों के लिए दिल्ली आने की मजबूरी कम हो रही है। इससे न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है, बल्कि मेडिकल शिक्षा के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री Jagat Prakash Nadda भी मौजूद रहे। उन्होंने भी मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया।

स्वास्थ्य व्यवस्था में AI और मानवता के बीच संतुलन जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI हेल्थकेयर सेक्टर का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही डॉक्टरों के भीतर मानवीय संवेदनाएं, संवाद कौशल और नैतिक जिम्मेदारी को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।

AI इलाज की प्रक्रिया को तेज और सटीक बना सकता है, लेकिन मरीज को मानसिक भरोसा और भावनात्मक सहारा देने का कार्य केवल इंसान ही कर सकता है। यही कारण है कि मेडिकल शिक्षा में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है।

दिल्ली AIIMS Convocation 2026 में उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan का संदेश केवल डॉक्टरों के लिए नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेजी से बढ़ती AI तकनीक के दौर में उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि चिकित्सा सेवा का सबसे मजबूत आधार आज भी मानवीय संवेदना, धैर्य और नैतिक जिम्मेदारी ही है। तकनीक डॉक्टरों की मदद कर सकती है, लेकिन मरीज के दर्द को समझने और उसे भरोसा देने की क्षमता केवल इंसानी संवेदनाओं में ही मौजूद है।

Exit mobile version