नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। खाड़ी देशों में जारी युद्ध और उससे पैदा हो रहे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने देश के हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंत्रालयों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का असर भारत की आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए और सभी मंत्रालय मिलकर स्थिति पर नजर रखें।
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के दौरान सरकार ने ग्रामीण भारत से जुड़ी एक बड़ी योजना जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने का फैसला किया। इसके लिए कुल लागत बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी गई है। सरकार का उद्देश्य देश के हर ग्रामीण घर तक पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।
जल जीवन मिशन को मिला विस्तार
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मंत्रिमंडल ने जल शक्ति मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत जल जीवन मिशन 2028 तक जारी रहेगा और इसके क्रियान्वयन को नए स्वरूप में लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अब इस योजना को केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि इसे सेवा वितरण आधारित मॉडल की ओर ले जाया जाएगा। इसका मतलब है कि अब केवल पाइपलाइन बिछाने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस विस्तार से देश के लाखों ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल की सुविधा मिलेगी।
योजना की लागत बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के फैसले के अनुसार जल जीवन मिशन की कुल लागत बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दी गई है। जब यह योजना वर्ष 2019 में शुरू की गई थी तब इसके लिए लगभग 2.08 लाख करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई थी।
अब योजना के विस्तार और संरचनात्मक सुधारों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार की सहायता भी बढ़ाई गई है। कुल लागत में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 3.59 लाख करोड़ रुपये होगी।
सरकार का कहना है कि अतिरिक्त निवेश से जल आपूर्ति प्रणाली को मजबूत बनाया जाएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
2019 में शुरू हुआ था जल जीवन मिशन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2019 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है।
सरकार के अनुसार इस योजना के तहत पिछले कुछ वर्षों में लाखों घरों को पहली बार नल से जल की सुविधा मिली है। कई राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से किया गया है।
जल जीवन मिशन के विस्तार से सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में देश के सभी गांवों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था स्थायी और भरोसेमंद बनाई जा सके।
‘सुजलाम भारत’ डिजिटल प्लेटफॉर्म की तैयारी
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक बैठक में जल प्रबंधन को और आधुनिक बनाने के लिए एक नई डिजिटल पहल की भी घोषणा की गई है। इसके तहत “सुजलाम भारत” नामक एक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश के प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट पहचान संख्या यानी “सुजल गांव आईडी” दी जाएगी। इस आईडी के जरिए पानी के स्रोत से लेकर घरों तक पहुंचने वाली पूरी पेयजल आपूर्ति प्रणाली की डिजिटल मैपिंग की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस प्रणाली से जल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी आसान होगी और किसी भी समस्या का समाधान तेजी से किया जा सकेगा।
खाड़ी युद्ध पर सरकार की नजर
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के दौरान खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध और उसके वैश्विक असर पर भी चर्चा हुई। हाल के दिनों में इस संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकार इस स्थिति पर लगातार नजर रखे और यह सुनिश्चित किया जाए कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों पर कम से कम पड़े।
उन्होंने मंत्रालयों और विभागों से समन्वय बनाकर काम करने को कहा ताकि किसी भी संभावित संकट का समय रहते समाधान किया जा सके।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। ईरान द्वारा इजरायल और खाड़ी देशों पर किए गए नए हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार को बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि बाद में इसमें कुछ नरमी आई और मंगलवार को कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही।
इसके बावजूद यह कीमत 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में करीब 24 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर और दबाव पड़ सकता है।
सरकार का फोकस: विकास और स्थिरता
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार एक ओर वैश्विक संकटों पर नजर रखते हुए देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान दे रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में भी लगातार काम कर रही है।
जल जीवन मिशन 2028 तक बढ़ाने का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार होगा और स्वास्थ्य से जुड़े कई जोखिम भी कम होंगे।

