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बंगाल वोटर लिस्ट 2026: 7.04 करोड़ मतदाता दर्ज, 60 लाख नाम ‘अंडर एडजुडिकेशन’, SIR के बाद सियासत गरम

बंगाल वोटर लिस्ट 2026

File Photo

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के बाद जारी हुई बंगाल वोटर लिस्ट 2026 ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। चुनाव आयोग के मुताबिक राज्य में कुल 7,04,59,284 मतदाता दर्ज हैं, लेकिन इनमें से 60,60,475 नाम फिलहाल ‘अंडर एडजुडिकेशन’ श्रेणी में रखे गए हैं।

अर्थात अंतिम सूची में कितने लोगों को मतदान का अधिकार मिलेगा, यह सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही प्रक्रिया

चुनाव आयोग ने बताया कि ‘अंडर एडजुडिकेशन’ नामों की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की जा रही है। पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारी इस प्रक्रिया को पूरा करने में जुटे हैं।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा था कि अंतिम मतदाता सूची शनिवार शाम 5:30 बजे से ऑनलाइन उपलब्ध होगी। हालांकि दिनभर सर्वर काम नहीं करने से अधिकांश मतदाता वेबसाइट पर अपना नाम नहीं देख पाए।

जिलों में प्रकाशित सूची देखने के लिए बूथों और जिला कार्यालयों पर लंबी कतारें देखी गईं।


63 लाख से अधिक नाम हटाए गए

चुनाव आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया लागू होने के बाद से अब तक 63 लाख से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं।

मनोज अग्रवाल के मुताबिक, केवल फॉर्म-7 (आपत्तियों) के आधार पर 5,46,063 नाम हटाए गए। दिसंबर में प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए थे।

दिसंबर में ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद कुल मतदाताओं की संख्या 7.08 करोड़ थी, जो अब घटकर 7.04 करोड़ रह गई है।

आयोग का कहना है कि नाम हटाने के प्रमुख कारण मृत्यु, पलायन, डुप्लीकेशन और मतदाता का ट्रेस न हो पाना हैं।


1.82 लाख नए मतदाता जोड़े गए

इस बीच 1,82,036 नए मतदाताओं के नाम भी जोड़े गए हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा, “हमने सूची को यथासंभव त्रुटिरहित बनाने की कोशिश की है। यह एक बड़ा कार्य था। कुछ गलतियां हुईं, जिन्हें जल्द सुधार लिया गया।”

उन्होंने भरोसा जताया कि शेष प्रक्रिया पूरी कर पूरक सूची जल्द प्रकाशित की जाएगी।


सियासत तेज: ममता बनर्जी बनाम विपक्ष

राजनीतिक हलकों में बंगाल वोटर लिस्ट 2026 को लेकर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पहले ही आरोप लगा चुकी हैं कि राज्य में 1.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे।

वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने इसे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए झटका बताया।

उन्होंने कहा, “63 लाख से ज्यादा नाम पहले ही हट चुके हैं और 60 लाख से अधिक विचाराधीन हैं। भवानीपुर में भी ममता बनर्जी को दोबारा चुनने लायक मतदाता नहीं बचेंगे।”


भवानीपुर में 47 हजार से ज्यादा नाम डिलीट

मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में 47,111 मतदाताओं के नाम हटाए जाने की सूचना है।

बैरकपुर से तृणमूल सांसद पार्थ भौमिक ने कहा कि बिना पूरी सूची का अध्ययन किए कोई टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।

उन्होंने दावा किया कि नैहाटी में कई “वास्तविक मतदाताओं” के नाम हटाए गए हैं, जिनमें डॉक्टर और रेलवे कर्मचारी भी शामिल हैं।


जिलों में हटाए गए नामों का आंकड़ा

इन आंकड़ों ने विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।


बूथों पर उमड़ी भीड़, सर्वर ठप

राज्य के कई हिस्सों में मतदाता सूची देखने के लिए लोग नोटिस बोर्ड के सामने जुटे दिखे। लोग अपने मोबाइल फोन से पन्नों की तस्वीरें लेते नजर आए।

जिला मजिस्ट्रेट और उपमंडल कार्यालयों में ‘स्वीकृत’, ‘हटाए गए’ और ‘अंडर एडजुडिकेशन’ की स्थिति जांचने के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।

ऑनलाइन पोर्टल पर तकनीकी समस्या के कारण दिनभर लोग अपना नाम सत्यापित नहीं कर पाए।


आगे क्या?

चुनाव आयोग का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरक सूची जारी की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल वोटर लिस्ट 2026 आगामी चुनावों की दिशा तय कर सकती है।

यदि बड़ी संख्या में नाम स्थायी रूप से हटते हैं, तो इसका सीधा असर सीटों के समीकरण पर पड़ेगा।


पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण ने प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस छेड़ दी है।

एक ओर चुनाव आयोग पारदर्शिता और शुद्धता का दावा कर रहा है, तो दूसरी ओर राजनीतिक दल संभावित मतदाता विलोपन को लेकर चिंता जता रहे हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में रखे गए 60 लाख से अधिक नामों का अंतिम फैसला क्या होता है—क्योंकि यही तय करेगा कि 7.04 करोड़ की मौजूदा सूची में अंतिम मतदाताओं की संख्या कितनी होगी।

With inputs from PTI

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