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उत्तराखंड में 7 हजार किमी से अधिक सड़कें गड्ढामुक्त, पंचायत भवन निर्माण और वनाग्नि रोकने के लिए सरकार के बड़े कदम

उत्तराखंड में धामी सरकार

उत्तराखंड में धामी सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। उत्तराखंड में धामी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में सड़कों की स्थिति सुधारने, पंचायत भवनों के निर्माण और जंगलों में लगने वाली आग को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने इन पहलों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सदन में साझा कीं।

सरकार के अनुसार प्रदेश में लोक निर्माण विभाग ने सात हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों को गड्ढामुक्त किया है। इसके साथ ही पिछले चार वर्षों में सैकड़ों पंचायत भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण भी कराया गया है। वहीं वनाग्नि की समस्या से निपटने के लिए पिरूल खरीद, जनजागरूकता और फायर वाचर्स के लिए बीमा जैसी कई नई पहल शुरू की गई हैं।

चार वर्षों में 819 पंचायत भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण

प्रदेश में ग्रामीण प्रशासन को मजबूत करने के लिए पंचायत भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण किया जा रहा है। पंचायतीराज विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के चार वर्षों में राज्य में 819 पंचायत भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण किया गया है।

प्रदेश में कुल पंचायत भवनों की संख्या 5867 है। इनमें से 1134 भवन लंबे समय से जर्जर हालत में थे। इन भवनों की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पंचायतीराज विभाग को अभियान चलाकर इनके पुनर्निर्माण के निर्देश दिए थे।

उत्तराखंड में धामी सरकार के निर्देश के बाद विभाग ने तेजी से काम करते हुए 819 पंचायत भवनों का निर्माण या पुनर्निर्माण पूरा कर लिया है। शेष भवनों के निर्माण और मरम्मत का काम भी जारी है। इस संबंध में विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदन को विस्तृत जानकारी दी।

सरकार का कहना है कि पंचायत भवनों के निर्माण से ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक कार्यों को गति मिलेगी और पंचायतों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

7 हजार किमी से अधिक सड़कें हुईं गड्ढामुक्त

प्रदेश में सड़कों की खराब स्थिति को सुधारने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया गया है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद लोक निर्माण विभाग ने राज्य की प्रमुख सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए विशेष योजना लागू की।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में मानसून से पहले ही 3134 किलोमीटर लंबी सड़कों को गड्ढामुक्त कर दिया गया था। इसके बाद मानसून समाप्त होने के बाद मरम्मत अभियान को और तेज किया गया।

10 नवंबर 2025 तक प्रदेश में कुल 4149.17 किलोमीटर लंबी सड़कों को गड्ढामुक्त किया गया। इस तरह पूरे अभियान के दौरान सात हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें गड्ढामुक्त की जा चुकी हैं।

इस अभियान के दौरान हरिद्वार जनपद में सबसे अधिक कार्य हुआ, जहां 313 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों की मरम्मत कर उन्हें गड्ढामुक्त बनाया गया।

उत्तराखंड में धामी सरकार का कहना है कि इस पहल से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

तीर्थ स्थलों के लिए रोपवे परियोजनाओं पर तेजी

उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण रोपवे परियोजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। पर्यटन विभाग के अनुसार राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों को रोपवे से जोड़ने की योजना पर कार्य जारी है।

पर्यटन मंत्री ने विधानसभा में बताया कि टिहरी जनपद में कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर तक रोपवे का संचालन पीपीपी मोड में शुरू कर दिया गया है।

इसके अलावा चम्पावत जिले में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी मंदिर तक रोपवे का निर्माण भी पीपीपी मोड में किया जा रहा है।

उत्तरकाशी जिले में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक रोपवे परियोजना विकसित की जा रही है। वहीं गौरीकुंड से केदारनाथ धाम और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे निर्माण की प्रक्रिया भी गतिमान है।

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी।

वनाग्नि रोकने के लिए सरकार के गंभीर प्रयास

उत्तराखंड में हर साल गर्मियों के दौरान जंगलों में लगने वाली आग एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कई नई पहल शुरू की हैं।

वन विभाग के माध्यम से ग्रामीणों से पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) खरीदने की योजना लागू की गई है। सरकार का मानना है कि जंगलों में पिरूल के अधिक जमा होने से आग फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले एक वर्ष में उत्तराखंड में धामी सरकार ने ग्रामीणों से 5 करोड़ 42 लाख रुपये से अधिक का पिरूल खरीदा है। वर्ष 2025 में कुल 5532 टन पिरूल खरीदा गया।

अब सरकार ने इस लक्ष्य को बढ़ाकर 8555 टन कर दिया है ताकि जंगलों में आग लगने की संभावना को कम किया जा सके।

जनजागरूकता अभियान और ग्राम समितियों का गठन

वनाग्नि को रोकने के लिए जनजागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में 1239 जागरूकता शिविर आयोजित किए गए हैं।

इसके अलावा ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटियां भी गठित की गई हैं। ये समितियां वन विभाग के साथ मिलकर जंगलों में आग रोकने के प्रयासों में सहयोग कर रही हैं।

उत्तराखंड में धामी सरकार ने इन समितियों को प्रोत्साहित करने के लिए संबंधित ग्राम पंचायत को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान किया है।

फायर वाचर्स को मिला पहली बार बीमा सुरक्षा

वनाग्नि नियंत्रण में फायर वाचर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इन कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पहली बार इनके लिए बीमा योजना लागू की है।

सरकार ने फायर वाचर्स को दस लाख रुपये का सामूहिक बीमा कवर प्रदान किया है। पिछले वर्ष लगभग 5600 फायर वाचर्स ने जंगलों में आग रोकने के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने विधानसभा में बताया कि सरकार वनाग्नि की घटनाओं को कम करने के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रही है।

विकास और संरक्षण पर सरकार का फोकस

उत्तराखंड में धामी सरकार का कहना है कि उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को समान प्राथमिकता दी जा रही है। सड़कों के सुधार, पंचायत भवनों के निर्माण, पर्यटन परियोजनाओं और वनाग्नि नियंत्रण जैसे प्रयास इसी दिशा में किए जा रहे हैं।

सरकार को उम्मीद है कि इन पहलों से प्रदेश के ग्रामीण विकास, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ मजबूती मिलेगी।

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