थराली-देवाल बस सेवाPhoto: Bugyal News AI

चमोली/ थराली-देवाल बस सेवा News: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू होने के साथ ही जहां लाखों श्रद्धालु धामों की ओर रुख कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पर्वतीय क्षेत्रों के स्थानीय लोगों की परेशानियां भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। चमोली जिले के थराली और देवाल क्षेत्र में इन दिनों परिवहन व्यवस्था चरमराई हुई नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उत्तराखंड परिवहन निगम ने ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित नियमित बस सेवाओं को चारधाम यात्रा रूट पर भेज दिया है, जिसके चलते आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय से थराली-देवाल बस सेवा संचालित होने वाली रोडवेज बसें क्षेत्र के लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद साधन थीं। खासकर देहरादून और अन्य शहरों की यात्रा करने वाले बुजुर्ग, बीमार, छात्र और मध्यम वर्गीय परिवार इन्हीं बसों पर निर्भर रहते थे। लेकिन पिछले करीब डेढ़ महीने से इन बसों के नियमित मार्ग पर न चलने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है।

घंटों सड़क पर इंतजार करने को मजबूर यात्री

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही निजी वाहनों और सार्वजनिक परिवहन की कमी बनी रहती है। ऐसे में रोडवेज बसों का संचालन बंद होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। ग्रामीणों को अब घंटों सड़क किनारे वाहनों का इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार लोगों को मजबूरी में महंगे निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले बुजुर्ग और बीमार यात्रियों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि समय पर वाहन नहीं मिलने से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी दिक्कत हो रही है। कई बार महिलाएं और बच्चे भी सड़क किनारे लंबे समय तक वाहन का इंतजार करते दिखाई देते हैं।

स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश

क्षेत्र के स्थानीय निवासी यमुना प्रसाद उनियाल, कमलेश देवराड़ी, अनिल जोशी, गंभीर रावत, मुकेश रावत, कमला देवी और पुष्पा देवी समेत कई लोगों ने सरकार और परिवहन निगम पर ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चारधाम यात्रा के नाम पर स्थानीय जनता की मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के नियमित बस सेवाओं को यात्रा रूट पर भेज देना आम जनता के हितों के खिलाफ है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को यात्रा सीजन के दौरान अतिरिक्त बसों की व्यवस्था करनी चाहिए थी, ताकि स्थानीय रूट प्रभावित न हों।

ग्राम प्रधानों ने भी उठाई आवाज

सुनला गांव के ग्राम प्रधान भगवती प्रसाद, चेपड़ो की ग्राम प्रधान देवी जोशी और महावीर सिंह बिष्ट समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन केवल सुविधा नहीं बल्कि जरूरत है। पहाड़ी इलाकों में सड़क और वाहन ही लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ते हैं।

ग्राम प्रधानों ने कहा कि यदि जल्द बस सेवाएं बहाल नहीं की गईं तो ग्रामीणों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि देहरादून-देवाल रूट पर संचालित बसों को तत्काल उनके पुराने मार्ग पर वापस भेजा जाए।

गरीब और मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा असर

स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी टैक्सी और मैक्स वाहनों का किराया सामान्य लोगों की पहुंच से बाहर है। वहीं रोडवेज बसें सस्ती होने के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राहत का माध्यम थीं। देहरादून से देवाल तक का किराया भी अपेक्षाकृत कम होने से लोग आसानी से सफर कर लेते थे।

अब बस सेवाएं प्रभावित होने के कारण लोगों का मासिक खर्च बढ़ गया है। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों को सबसे अधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई ग्रामीणों ने बताया कि बस सेवा बंद होने से उन्हें जरूरी काम भी टालने पड़ रहे हैं।

चारधाम यात्रा और स्थानीय जरूरतों के बीच संतुलन की मांग

उत्तराखंड में हर साल चारधाम यात्रा के दौरान परिवहन व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से सरकार अतिरिक्त बसों और वाहनों को यात्रा मार्गों पर लगाती है। हालांकि इस बार थराली-देवाल बस सेवा प्रभावित होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि यात्रा प्रबंधन के नाम पर स्थानीय जरूरतों की अनदेखी की जा रही है।

लोगों का मानना है कि सरकार को यात्रा संचालन और ग्रामीण परिवहन व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना चाहिए। यदि स्थानीय रूटों से बसें हटानी भी पड़ें तो उनके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि आम जनता को परेशानी न उठानी पड़े।

जल्द समाधान की उम्मीद

थराली-देवाल बस सेवा प्रभावित होने से क्षेत्र के लोगों ने परिवहन निगम और राज्य सरकार से मांग की है कि स्थानीय रूटों पर बस सेवाएं तत्काल बहाल की जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।

चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास और व्यवस्थाओं का लाभ तभी सार्थक होगा जब पहाड़ के गांवों में रहने वाले लोगों की बुनियादी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए।

By Bhaskar

Bhaskaranand Founder, Editor & Content Strategist | Bugyal News भास्करानन्द एक पत्रकार, कंटेंट क्रिएटर और मीडिया प्रोफेशनल हैं, जो उत्तराखंड, राष्ट्रीय समाचार, जनसरोकार, संस्कृति, पर्यटन, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं। वे डिजिटल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भास्करानन्द ने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे बच्चों और युवाओं के लिए दो दर्जन से अधिक थिएटर कार्यशालाओं में थिएटर मेंटर के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा रचनात्मक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े रहे हैं। Bugyal News के संस्थापक एवं संपादक के रूप में उनका उद्देश्य उत्तराखंड सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को तेज़, सटीक और जनहितकारी रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। उनकी लेखनी में जमीनी मुद्दों, विकास, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और जनकल्याण से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिलता है। Contact 📧 Email: anandbhaskar462@gmail.com 🌐 Website: bugyalnews.com

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