Iran US TalksPhoto: Bugyal News

नई दिल्ली/ तेहरान/ Iran US Talks: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। तेहरान ने अमेरिका पर “अत्यधिक मांगें”, “अवास्तविक अपेक्षाएं” और “ब्लेम गेम” खेलने का आरोप लगाया है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध और गहरा गया है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Islamic Republic News Agency (IRNA) ने स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की बातचीत को लेकर चल रही खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। एजेंसी के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी रचनात्मक वार्ता की संभावना बेहद कमजोर है।


अमेरिका की ‘अत्यधिक मांगें’ बनीं मुख्य विवाद

IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की ओर से लगातार बदलते रुख, अव्यवहारिक मांगें और सैन्य दबाव की रणनीति वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और धमकी भरे बयान ceasefire (युद्धविराम) की भावना के खिलाफ हैं।

ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका जानबूझकर यह प्रचार कर रहा है कि तेहरान वार्ता में भाग लेने जा रहा है, ताकि उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके। तेहरान ने इसे “झूठ और दबाव की कूटनीति” करार दिया।


मध्य पूर्व युद्धविराम की समयसीमा नजदीक

गौरतलब है कि Middle East Conflict 2026 के तहत जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच लागू दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए अचानक हमले के बाद शुरू हुआ था।

अब जबकि युद्धविराम की अवधि समाप्त होने में केवल दो दिन बचे हैं, ऐसे में वार्ता का टूटना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है।


नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाई ने बढ़ाया तनाव

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी एक बड़ा विवादित मुद्दा बना हुआ है। हाल ही में एक अमेरिकी विध्वंसक (destroyer) द्वारा एक ईरानी जहाज पर कार्रवाई और उसे जब्त किए जाने से हालात और बिगड़ गए।

तेहरान ने इस घटना को “उकसावे की कार्रवाई” बताते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह इसका जवाब देगा। वहीं ईरान समर्थित समाचार एजेंसियों Fars News Agency और Tasnim News Agency ने भी सूत्रों के हवाले से कहा कि मौजूदा माहौल “सकारात्मक नहीं” है।


ट्रंप का बयान— ‘डील संभव है’

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अब भी समझौते की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका “एक निष्पक्ष और उचित समझौता” पेश कर रहा है और उम्मीद है कि ईरान इसे स्वीकार करेगा।

हालांकि, ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर यह भी दावा किया था कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद जाकर वार्ता करेगा।

इस प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति JD Vance, विशेष दूत Steve Witkoff और ट्रंप के दामाद Jared Kushner शामिल बताए गए हैं।


कूटनीतिक गतिरोध गहराया, समाधान दूर

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच (Iran US Talks) अविश्वास की खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि फिलहाल किसी ठोस समाधान की उम्मीद कम ही है। ईरान जहां पहले अमेरिकी नाकेबंदी हटाने को वार्ता की पूर्व शर्त बता रहा है, वहीं अमेरिका अपने सुरक्षा और रणनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है।

इस बीच, क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां भी इस संकट पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यदि युद्धविराम समाप्त होने के बाद तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

By Bhaskar

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