Bhumi Atikraman

देहरादून, 17 फरवरी 2026: उत्तराखंड में Bhumi Atikraman और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। टिहरी बांध परियोजना के अंतर्गत विस्थापित एक निम्न मध्यमवर्गीय पहाड़ी दंपति को 15 वर्षों से लंबित उनके आवासीय भूखंड पर विधिवत कब्जा दिलाया गया।

जिला प्रशासन देहरादून की इस कार्रवाई को भू-माफियाओं के खिलाफ ‘न्याय का प्रहार’ माना जा रहा है। लंबे समय से अतिक्रमण झेल रहे पीड़ित परिवार ने कब्जा मिलने के बाद जिलाधिकारी से मुलाकात कर आभार व्यक्त किया।


अटक फार्म का मामला, 15 साल से था विवाद

पूरा मामला विकासनगर तहसील के ग्राम अटक फार्म, परगना पछवादून का है। यहां टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (टिहरी बांध परियोजना) के अंतर्गत विस्थापित परिवारों को पुनर्वास के लिए आवासीय भूखंड आवंटित किए गए थे।

शिकायतकर्ता सुमेरचंद एवं अन्य लाभार्थियों को आवंटित भूखंड संख्या-29 पर अवैध कब्जे की शिकायत प्रशासन को प्राप्त हुई थी। आरोप था कि संबंधित भूमि पर वर्षों से अवैध निर्माण और खेती की जा रही थी।

जिलाधिकारी के निर्देश पर इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई सुनिश्चित की गई।


संयुक्त जांच टीम का गठन

जिलाधिकारी के आदेशानुसार उप जिलाधिकारी की अगुवाई में एक संयुक्त जांच टीम गठित की गई। टीम में तहसील विकासनगर के सर्वे लेखपाल, कानूनगो, राजस्व उपनिरीक्षक (पुनर्वास), राजस्व निरीक्षक (पुनर्वास) और सहायक अभियंता (पुनर्वास) को शामिल किया गया।

जांच टीम ने अटक फार्म में स्थलीय निरीक्षण कर भूखंड संख्या-15, 16, 17, 27, 28 और 29 का टिहरी बांध परियोजना के स्वीकृत नक्शों और राजस्व अभिलेखों से मिलान किया।

मिलान के बाद पुष्टि हुई कि ये भूखंड खसरा संख्या 301, 302 और 303 के अंतर्गत आते हैं, जिन्हें टिहरी बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए विधिवत खरीदा गया था।


अवैध कब्जा और खेती का खुलासा

संयुक्त जांच में यह तथ्य सामने आया कि स्वर्गीय कुंदन लाल जोशी के वारिसानों द्वारा उक्त भूमि पर Bhumi Atikraman कर गन्ने की खेती की जा रही थी।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। प्रशासन की निगरानी में खसरा संख्या 301, 302 और 303 से अवैध कब्जा हटवाया गया।

इसके बाद भूखंड संख्या-29 सहित संबंधित आवंटित भूखंडों पर विधिसम्मत रूप से सुमेरचंद्र एवं अन्य पात्र लाभार्थियों को कब्जा दिलाया गया।


विस्थापित दंपति ने जताया आभार

15 वर्षों से अपनी जमीन के लिए संघर्ष कर रहे दंपति ने कब्जा मिलने के बाद जिलाधिकारी से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि वर्षों से लंबित समस्या का समाधान प्रशासन की सक्रियता के कारण संभव हो पाया।

पीड़ित परिवार ने बताया कि लंबे समय से वे अपने अधिकारों के लिए भटक रहे थे, लेकिन अब उन्हें न्याय मिला है।


मुख्यमंत्री के निर्देश पर सख्त रुख

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप की गई है। राज्य सरकार ने भू-माफियाओं और अवैध Bhumi Atikraman के खिलाफ सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पात्र लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिकता है और भूमि कब्जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।


पुनर्वास नीति पर प्रशासन की प्रतिबद्धता

टिहरी बांध परियोजना के तहत हजारों परिवारों का पुनर्वास किया गया था। ऐसे में पुनर्वास भूखंडों पर अवैध कब्जा न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि विस्थापित परिवारों के अधिकारों का हनन भी है।

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ऐसे सभी प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी और जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां सख्त कार्रवाई होगी।


भूमि प्रकरणों में न्याय की उम्मीद

इस कार्रवाई से अन्य पीड़ित परिवारों में भी उम्मीद जगी है। Bhumi Atikraman के मामलों में अक्सर वर्षों तक न्याय नहीं मिल पाता, लेकिन इस मामले में त्वरित कार्रवाई ने एक सकारात्मक संदेश दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह प्रशासन सक्रियता दिखाता रहा तो भूमि विवादों में कमी आएगी और पुनर्वास योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचेगा।


ग्राम अटक फार्म में 15 वर्षों से अतिक्रमित भूमि पर कब्जा दिलाना न केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई है, बल्कि यह न्याय और अधिकारों की पुनर्स्थापना का उदाहरण भी है।

Bhumi Atikraman कार्रवाई के इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिला प्रशासन देहरादून भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। टिहरी बांध परियोजना के अंतर्गत विस्थापित परिवार को मिला यह न्याय राज्य में कानून के राज की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

By Bhaskar

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