नई दिल्ली। PM Modi Malaysia Visit: भारत और मलेशिया के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों के आधिकारिक दौरे पर मलेशिया पहुंच रहे हैं। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अगस्त 2024 में भारत और मलेशिया ने अपने रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक बढ़ाया था। इसके बाद पीएम मोदी की यह पहली मलेशिया यात्रा है, जिससे दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के आमंत्रण पर हो रहा है। यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक मुद्दों पर व्यापक बातचीत होने की संभावना है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करेगा, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को भी और धार देगा।
व्यापक एजेंडा, कई अहम मुद्दे
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर संवाद होगा। व्यापार और निवेश से लेकर रक्षा और समुद्री सुरक्षा तक, एजेंडा काफी व्यापक है। मलेशिया, भौगोलिक दृष्टि से भी भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यह मलक्का जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों के पास स्थित है। यही कारण है कि रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग इस दौरे का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
आसियान इंडिया इकोनॉमिक काउंसिल (AIEC) के चेयरमैन रमेश कोडम्मल ने इस यात्रा को “लंबे समय से प्रतीक्षित” बताया है। उन्होंने कहा कि मलेशियाई सरकार और वहां की जनता प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत कर रही है। उनके अनुसार, वर्ष 2023-24 में भारत और मलेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 20 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जिसमें आने वाले वर्षों में और वृद्धि की संभावना है।
जाकिर नाइक प्रत्यर्पण का मुद्दा
प्रधानमंत्री मोदी के मलेशिया दौरे का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा भगोड़े इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक का प्रत्यर्पण है। भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि इस मुद्दे को उच्च प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की बातचीत के एजेंडे में जाकिर नाइक का भारत प्रत्यर्पण प्रमुख रूप से शामिल है। भारत सरकार तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने तक मलेशिया पर दबाव बनाए रखने के संकेत दे चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा दोनों देशों के संबंधों की संवेदनशीलता की परीक्षा भी है। हालांकि, भारत को उम्मीद है कि रणनीतिक साझेदारी के नए ढांचे में इस पर सकारात्मक प्रगति हो सकती है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
वर्तमान में भारत और मलेशिया के बीच लगभग 20 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे का एक बड़ा उद्देश्य इस व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नवीकरणीय ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर खास जोर दिया जा रहा है।
इस क्रम में प्रधानमंत्री मोदी मलेशिया में आयोजित 10वें भारत–मलेशिया सीईओ फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जहां दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपति और कारोबारी नेता मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि इस मंच से कई नए निवेश प्रस्ताव और व्यावसायिक समझौते सामने आ सकते हैं, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
भारत और मलेशिया के बीच रक्षा सहयोग भी तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। भारत, मलेशिया को डॉर्नियर विमानों की बिक्री, स्कॉर्पीन पनडुब्बियों और SU-30 लड़ाकू विमानों के रखरखाव व अपग्रेडेशन जैसे प्रस्तावों पर विचार कर रहा है। इसके अलावा, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत और मलेशिया का रक्षा सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी का मजबूत संदेश
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा (PM Modi Malaysia Visit) भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का भी स्पष्ट संदेश देती है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव, चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिशें और दक्षिण-पूर्व एशिया में रणनीतिक संतुलन के बीच मलेशिया जैसे देशों के साथ मजबूत साझेदारी भारत के लिए अहम हो गई है।
यह दौरा अनवर इब्राहिम की 2024 की भारत यात्रा का प्रतिफल भी माना जा रहा है, जब दोनों देशों ने अपने रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया था। अब इस साझेदारी को ठोस परियोजनाओं और समझौतों के जरिए जमीन पर उतारने की कोशिश की जा रही है।
आगे की राह
कुल मिलाकर, PM Modi Malaysia Visit भारत–मलेशिया संबंधों के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा और संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर होने वाली बातचीत से यह साफ हो जाएगा कि दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। यदि प्रस्तावित समझौते और चर्चाएं सफल रहीं, तो आने वाले वर्षों में भारत और मलेशिया के रिश्ते केवल मजबूत ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।

